पाटीदार आरक्षण पर हार्दिक पटेल को साइड कर कांग्रेस ने बनाई ये नई रणनीति, देखें पूरी खबर

2021

दरअसल इस अल्टीमेटम ने उनकी कांग्रेस से दूरी बढ़ा दी है. भाजपा से पहले ही वे “दुश्मनी”  मोल ले चुके हैं. ऐसे में उनके पास अब कोई और बेहतर विकल्प नहीं है, जिससे वे चुनाव में जलवा दिखा सकें. शनिवार को ही हार्दिक ने पाटीदार कोटा पर कांग्रेस को 3 नवंबर तक अपना रुख साफ करने को कहा है. यह अल्टीमेटम उनके राजनीतिक भविष्य के लिए फायदेमंद रहेगा या नुकसानदेह, यह विधानसभा चुनाव में ही पता चल जाएगा.

Image result for rahul gandhi and hardik

गुजरात में विधानसभा चुनाव बेहद करीब है. भाजपा और कांग्रेस दो बड़े सियासी दल हैं जो चुनाव जीतने का दावा कर रहे हैं. दलित नेता बनकर उभरे जिग्नेश मेवानी और ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है. लेकिन, पाटीदार समाज का प्रतिनिधित्व कर रहे हार्दिक पटेल के लिए अब चुनौती अपना वजूद बनाए रखने की है. उन्होंने कांग्रेस को अल्टीमेटम देकर खुद पैर में कुल्हाड़ी मार ली है.

Image result for rahul gandhi and hardik

पाटीदार के बाद कुर्मी और गुज्जरों पर थी नजर – 2014 में नरेंद्र मोदी राज्य से निकलकर केंद्र की सत्ता पर आसीन हो गए. मोदी की गैरमौजूदगी में राज्य में 22 साल के हार्दिक पटेल पाटीदार समाज के बड़े युवा नेता बनकर उभरे. हार्दिक ने पाटीदार समाज के लिए आरक्षण की मांग करते हुए राज्य में कई बड़ी रैलियां कीं. पाटीदार समाज को ओबीसी का दर्जा देने की यह मांग पूरे राज्य में जोर पकड़ती गई. अपनी रैलियों में लाखों युवाओं की उमड़ती भीड़ देख हार्दिक ने अन्य राज्यों के कुर्मी और गुज्जरों को भी साथ में जोड़ने की कोशिश की. इसीलिए बिहार चुनाव में भी हार्दिक ने वहां का दौरा किया था.

Image result for rahul gandhi and hardik

दुविधा में हार्दिक – कांग्रेस को अल्टीमेटम देकर हार्दिक पटेल खुद दुविधा में फंस गए हैं. मीडिया में आई खबरों के मुताबिक पिछले हफ्ते ही अहमदाबाद में हार्दिक ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी. हालांकि बाद में उन्होंने इस मुलाकात को खारिज कर दिया था. सूत्रों के मुताबिक हार्दिक ने इस मुलाकात में पाटीदारों को नौकरी और शिक्षण संस्थानों में प्रवेश की मांग की थी. हार्दिक ने राहुल से पूछा था कि कांग्रेस कैसे पाटीदारों को कोटा दिलाएगी? संवैधानिक रूप से पाटीदारों को आरक्षण दिलाने में आ रही अड़चनों को दूर करने के बारे में भी हार्दिक ने पूछा था. सूत्रों के मुताबिक हार्दिक ने गुजरात विधानसभा चुनाव में अपना समर्थन देने से पहले कांग्रेस को इन सभी स्थितियों को साफ करने के लिए कहा था. अल्टीमेटम के बाद कांग्रेस ने अभी चुप्पी साध रखी है.

Image result for rahul gandhi and hardik

सर्वे में भी हार्दिक का नहीं दिखा था जादू – गुजरात में चुनाव से ठीक पहले इंडिया टुडे ग्रुप और AXIS MY INDIA ने मिलकर एक सर्वे किया था. सर्वे में लोगों की राय थी कि कांग्रेस को हार्दिक पटेल का साथ मिलने पर भी कोई फायदा नहीं मिलने वाला. इससे न तो उनका वोट शेयर बढ़ेगा और न ही सीट का फायदा होगा. हार्दिक के अकेले चुनाव लड़ने पर 182 सीटों वाली विधानसभा में उनका खाता भी खुलता नहीं दिख रहा था.

बेरोजगारी है बड़ा मुद्दा – गुजरात के मुख्यमंत्री रहते नरेंद्र मोदी का पूरा जोर राज्य की आर्थिक विकास बढ़ाने का रहा था. उन्होंने दुनियाभर के निवेशकों को आमंत्रित किया था. वाइब्रेंट गुजरात इसी का प्रयास है. मोदी की इन सारी कोशिशों का असर ये रहा कि राज्य में निजी एजुकेशन और प्रोफेशनल इंस्टीट्यूट्स की भरमार हो गई. इन सबके बावजूद यह शिकायत रही कि इन संस्थानों से पढ़ाई कर निकले गुजरात के युवा फिर भी बेरोजगार ही रहे. स्किल डेवलपमेंट का युवाओं को फायदा नहीं मिला.

समर्थन दिया तो कांग्रेस से छिटकेगा बड़ा वोट बैंक – पाटीदार समाज को ओबीसी कोटे में समायोजित करने के प्रयास से ओबीसी कोटे का बड़ा वोट बैंक कांग्रेस से छिटक सकता है. गुजरात में ओबीसी कोटा के मतदाताओं की संख्या तकरीबन 54 प्रतिशत है. ऐसे में सवाल ये है कि राहुल गांधी हार्दिक पटेल के समर्थन के लिए इतने बड़ा वोट बैंक छिटकने का रिस्क लेंगे? राहुल गांधी पाटीदार समाज के लिए अलग से कोटा देने का वादा भी नहीं कर सकते, क्योंकि यह संवैधानिक रूप से संभव नहीं है.

देखे विडियो :-

 


Warning: A non-numeric value encountered in /home/khabarna/public_html/suchkhu.com/wp-content/themes/Newspaper/includes/wp_booster/td_block.php on line 352