गुजरात चुनाव से पहले बीजेपी का ये मास्टर स्ट्रोक, जो यूपी में किया था वो अब गुजरात में..

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मोर्चा फिर से अमित शाह ने संभाला और उन पर एकतरफा फैसले के आरोप भले ही लगते गए हों, लेकिन व्यूहरचना ऐसी की कि बीजेपी सिर्फ रेस में नहीं बल्कि नतीजों में सत्ता तक पहुंचती नजर आने लगी। 2014 जैसी मोदी की हवा तो नहीं, लेकिन हवा एक बार फिर बहेगी और वो भी रणनीति से बनाई गयी।

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अगर ये फार्मुला सफल होता है तो फिर शाह और पीएम मोदी की चाणक्य नीति पर सही होने की मुहर भी लग ही जाएगी। आइए जानते हैं क्या था ये मास्टर स्ट्रोक।

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गुजरात चुनाव से पहले बीजेपी का ये मास्टर स्ट्रोक :-

तीन तलाक का मुद्दा यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने बहुत भुनाया और इसका नतीजा यह हुआ की यूपी में बीजेपी की सरकार बन गयी। यही तीन तलाक का मुद्दा बीजेपी ने गुजरात चुनाव से पहले शुरू कर दिया है। चुनाव से पहले तीन तलाक पर चर्चा जोरों पर हैं। तीन तलाक पर मोदी सरकार इसी शीतकालीन सत्र में कानून बना सकती है।

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इसके लिए सख्त सजा का प्रावधान रखा जाएगा। सरकार ने इसी आशय से विधेयक का मसौदा आज राज्य सरकारों को उनकी राय के लिए भेजा है। साथ ही कहा है कि इस मामले में अपनी राय जल्द से जल्द केंद्र सरकार को भेजें।

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सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक तीन तलाक खत्म करने के लिए सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में कानून लाएगी। सरकार ‘द मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज एक्ट’ नाम से इस विधेयक को लाएगी। ये कानून सिर्फ तीन तलाक (INSTANT TALAQ, यानि तलाक-ए-बिद्दत) पर ही लागू होगा। इस कानून के बाद कोई भी मुस्लिम पति अगर पत्नी को तीन तलाक देगा तो वो गैर-कानूनी होगा।

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इसके बाद से किसी भी स्वरूप में दिया गया तीन तलाक वह चाहें मौखिक हो, लिखित और यो मैसेज में, वह अवैध होगा। जो भी तीन तलाक देगा, उसको तीन साल की सजा और जुर्माना हो सकता है। यानि तीन तलाक देना गैर-जमानती और संज्ञेय ( Cognizable) अपराध होगा। इसमें मजिस्ट्रेट तय करेगा कि कितना जुर्माना होगा।

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अगर किसी महिला को तीन तलाक दिया जाता है तो वह महिला खुद अपने और अपने नाबालिग बच्चों के लिए मजिस्ट्रेट से भरण-पोषण और गुजारा भत्ता की मांग कर सकती है। कितना गुजारा भत्ता देना है, उसका अमाउंट मजिस्ट्रेट तय करेगा। महिला अपने नाबालिग बच्चों की कस्टडी के लिए भी मजिस्ट्रेट से गुहार लगा सकती है।

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पीएम नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक पर कानून बनाने के लिए एक मंत्री समूह बनाया था, जिसमें राजनाथ सिंह, अरुण जेटली,  सुषमा स्वराज, रविशंकर प्रसाद, पीपी चौधरी और जितेंद्र सिंह शामिल थे।

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सरकार के सूत्रों का कहना है कि 1986 के शाहबानो केस के बाद बना कानून तलाक के बाद के लिए था जबकि इस नए कानून से सरकार तीन तलाक को रोकना चाहती है और पीड़ित महिलाओं को न्याय देना चाहती है। सूत्रों का कहना है ये कानून संसद से पारित होने के बाद अस्तित्व में आएगा पर संसद चाहे तो इसे रेट्रोस्पेक्टिवली भी लागू कर सकती है।


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