अच्छे स्वास्थ्य व घर की सुख-शांति और समृद्धि के लिए अपनाये ये कुछ सरल वास्तु टिप्स

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जहाँ स्वास्थ्य वहाँ संपत्ती” या “आरोग्यम् धनसंपदा” इस युगो-पुरानी प्राचीन कहावत के अनुसार लोग रहते थे । इस आदर्श वाक्य के अनुसार लोगों ने अपने शरीर, जो अन्न वो खाते हैं, जिस हवा में साँस लेते हैं, जो स्वास्थ्य बीमा वओ लेते हैं आदि पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए । परन्तु, स्वास्थ्य के लिए वास्तु टिप्स के बारे में लोग भूल जाते हैं । एक स्वस्थ जीवन के लिए अन्य सभी उपायों के बावजूद अगर वास्तु को टाला गया तो परिवार में स्वास्थ्य संबंधी संभाव्य मसलें आ सकते हैं ।

स्वास्थ्य के लिए वास्तु लौकिक विज्ञान के उस पहलु से संबंध रखता है जहाँ वह घर की सकारात्मक ऊर्जा को लक्ष्य बनाता है जिससे न सिर्फ व्यक्ति के तथा उसका / उसकी परिवार के शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य में बल्कि उनकी समस्त तंदुरूस्ती में सुधार होता है ।

व्यक्ति की शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाने के अलावा स्वास्थ्य के लिए वास्तु का सबसे बड़ा लाभ यह है कि शरीर के भीतर 7 चक्र सक्रिय तथा संतुलित हो जाते हैं । चक्र एक और प्राचीन विज्ञान है जो समग्र तंदुरूस्ती के लिए आवश्यक है।

जब शरीर के 7 चक्र खुल जाते हैं अथवा संतुलित हो जाते हैं तब व्यक्ति अपने सर्वोत्तम स्वास्थ्य में होता है । अच्छे वास्तु से उत्पन्न होनेवाली सकारात्मक ऊर्जा सात चक्रों के संतुलन के लिए व्यापक रूप से उत्तरदायी है और व्यक्ति की आंतरिक शांति को खोजने में तथा फुरतीला व स्वस्थ जीवन जीने में मदद करता है ।

कुछ सुझावों का परिपालन करने के लिए नीचे कुछ वास्तु सुझाव दिए हैं

सीढ़ियां

हमारे घर का एक अभिन्न होती है लेकिन वास्तु के अनुसार, यह आपके स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती है। अगर घर का द्वार खोलते ही सामने सीढ़ियां दिखाई देती हैं तो यह अशुभ है। अगर तोड़फोड़ संभव नहीं है तो दोनों के बीच एक पर्दा लगा दें। इससे आपका स्वास्थ हमेशा अच्छा रहेगा और घर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहेगी।

क्या आप बीम के नीचे बैठकर काम करते हैं ? बीम के नीचे बैठकर या खंबे के पास बैठकर काम करना टालें क्योंकि उससे आपकी सेहद पर गंभीर प्रभाव पड सकता है । बीम संपूर्ण आवास की नकारात्मक ऊर्जा को खींच लेती है जो आपको हस्तांतरित होती है । इसलिए स्थायी रूप से उस जगह पर बैठने से बचें ।

स्नानगृह तथा शौचालय

स्नानगृह तथा शौचालय का ध्यान रखें । घर या कार्यालय में खुले हुए स्नानगृह तथा शौचालय आपके स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं । स्नानगृह तथा शौचालय से बहुत सारी नकारात्मक ऊर्जा का उत्सर्जित होती है इसलिए उन्हें बंद करके रखना सबसे बेहतर है ।

दवाईयाँ

क्या आपके घर में इस्तेमाल न किये हुई दवाईयाँ है ? यदि ऐसा है तो तुरंत उन्हें हटा दें । सरल वास्तु के अनुसार ऐसी काम में न लायी हुई दवाईयों को घर में रखने से आपके स्वास्थ्य पर असर पड़ता है क्योंकि यह दवाईयाँ पिछली बिमारियों की नकारात्मक मानसिक छवि का प्रतिनिधित्व करते हैं ।

सोने की सही दिशा :

अच्छा स्वास्थ्य काफी कुछ हमारे सोने की अवस्था पर भी निर्भर करता हैं. जैसे यदि आप अपना सिर दक्षिण दिशा की ओर करके सोते हैं तो आपका स्वास्थ्य हमेशा ठीक रहेगा. इसके अलावा यदि आपको पित्त की शिकायत हैं तो आप अपने दाहिने हाथ की ओर करवट लेकर सो सकते हैं तथा यदि आपको कफ की शिकायत हैं. तो वास्तुशास्त्र के अनुरूप आपको बाई और करवट लेकर सोना चाहिए

फर्नीचर :

अक्सर लोग अपने घरों में फर्नीचर ड्राइंग रूम के बीच में रखते हैं लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के बीच में फर्नीचर नहीं रखने चाहिए. घर के बीच का स्थान ब्रहमस्थल होता हैं. इस स्थान में किसी तरह के पत्थर का या कंकरीट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए तथा प्रयास करना चाहिए कि यह स्थाम अधिकतर खाली ही रहे. क्योंकि इससे घर के सदस्यों की तबियत अधिकतर समय ख़राब रहती हैं.

अग्नि :

वास्तुशास्त्र के अंतर्गत घर में बिमारियों के पैदा होने का सबसे बड़ा कारण हैं घर में अग्नि का गलत दिशा में का प्रयोग होना. यदि आप दक्षिण मुखी घर में रहते हैं तो कभी भी अपने घर की दक्षिण दिशा में आग न जलाएं.

रौशनी देने वाली वस्तुएं :

वास्तु शास्त्र के अनुसार जिन वस्तुओं से घर में रौशनी होती हैं जैसे दीपक मोमबती या अन्य चीजें. उन्हें हमेशा घर की दक्षिण पश्चिम दिशा में रखे और यदि आपके घर में कोई व्यक्ति बीमार हैं तो उसके कमरे में लगातार एक हफ्ते तक मोमबती जलाकर रखें. इससे उस व्यक्ति के स्वास्थ्य में जल्द ही सुधार होगा.

दक्षिण मुखी घर :

यदि आप के घर का में गेट दक्षिण दिशा की ओर हैं तो जितना सम्भव हो उसे बंद रखें, जिससे की आपके घर से आपको बाहर की सडक न दिखाई दें. ऐसा करने से आपके घर के व्यक्तियों का स्वास्थ्य हमेशा ठीक रहेगा.

रसोई घर का स्थान :

हमारे स्वास्थ्य से किचन का स्थान भी जुडा हुआ होता हैं. इसलिए यदि आप सुखी और स्वस्थ रहना चाहते हैं तो घर बनवाते समय रसोई का स्थान दक्षिण – पश्चिम दिशा की ओर रखें. इससे घर के व्यक्ति मानसिक अवसाद की चपेट में नहीं आते.

मुख्य द्वार और रसोई :

यदि आपके घर के मुख्य द्वार के ठीक सामने रसोई घर हैं. जिससे की आपके घर के सामने से आने जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति को आपका घर दिखाई देता हैं. तो वास्तु के अनुरूप इससे घर की मुख्य महिला के द्वारा बनाये गये भोजन में स्वाद नहीं आता तथा उसकी तबियत अधिकतर समय खराब रहती हैं. इसके यदि आपके घर की रसोई बड़ी हैं तो आप अपना भोजन रसोईघर में ही बैठ कर करें. इससे यदि आपके घर के किसी सदस्य की कुंडली में राहु के दुष्ट प्रभाव हैं तो उस व्यक्ति की कुंडली में से ये प्रभाव नष्ट हो जायेंगे.

पलंग :

वास्तुशास्त्र में यह मान्यता हैं कि हमेशा पलंग की लम्बाई सोने वाले व्यक्तियों की लम्बाई से अधिक होनी चाहिए. इसके साथ ही पलंग पर छोटा या बड़ा कैसा भी दर्पण नहीं लगा होना चाहिए. क्योंकि यदि दर्पण लगा होगा और सोने से पहले आप उसमें अपना प्रतिबिम्ब देखते हैं तो इससे आपकी सेहत को नुकसान पहुँचता हैं और आपकी आयु भी कम होती हैं.

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