क्या आप भी जानते है आलू के आयुर्वेदिक उपयोग

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आलू पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली सब्जी है, जो सभी जगह आसानी से उपलब्ध भी हो जाती है। आलू केवल सब्जी ही नहीं बल्कि जबरदस्त औषधि है। आलू मक्का, गेहूँ और चावल के बाद विश्व की चौथी सबसे ज्यादा खाने के लिए उगाई जाने वाली फसल है। इसका कारण इसका आसानी से पकने का गुण, इसके फायदे और इसका स्वाद है।

वजन बढ़ने में और पेट के रोगों में तो आलू पूर्णरूप से निषेध कहा गया है। आलू के अनेकों फायदे भी हैं और इसमें अनेकों औषधीय गुण भी होते है, जिन्हें हमने इस लेख में संकलित करने का प्रयास किया है।

आलू के पोषक तत्व

आलू में विटामिन सी, बी कॉम्पलेक्स, आयरन , कैल्शियम, मैंगनीज और फास्फोरस आदि तत्त्व होते हैं।

आलू में बड़ी मात्रा में स्टार्च होता है, जो कार्बोहाइड्रेट में बदलकर ऊर्जा और पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है। आलू में प्रोटीन, कई प्रकार के विटामिन, खनिज तथा ऑर्गेनिक कंपाउंड पाए जाते हैं।

आलू में पोटेशियम की मात्रा केले से भी ज्यादा होती है। जो की आलू के छिलके में तथा उसके नीचे ज्यादा होती है। अतः आलू छिलके सहित खाना ज्यादा लाभदायक होता है।

आलू का कुछ हिस्सा फाइबर की तरह काम करता है।इसलिए यह आंतो के कैंसर से बचाता है। ये कोलेस्ट्रॉल को जमने से रोकता है। आलू के कार्बोहाईड्रेट और प्रोटीन, ग्लूकोज़ और एमिनो एसिड में बदल कर शरीर को तुरंत शक्ति देते है।

आलू खाने से संतृप्ति मिलती है। इसके अलावा आलू में कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते है जो फ्री रेडिकल से होने वाले नुकसान से बचाते है। आलू के तत्व हड्डी को मजबूत बनाते है।

भुना हुआ आलू खाने से पेट भर जाता है और आप दूसरी ज्यादा कैलोरी वाली चीजें खाने से बच जाते है। इस तरह ये वजन कम करने में सहायक है। इसके फाइबर भी वजन बढ़ने से रोकते हैं।

आलू खाने का तरीका

आलू के गुण कच्चा होने पर , पकने पर और पकने के बाद ठण्डे होने पर अलग अलग होते है। आलू को तल कर , उबाल कर और सब्जी बना कर खाने के अलग अलग फायदे और नुकसान होते है। तले हुए आलू मोटापा बढ़ा सकते है।

आलू को तल कर जैसे फ्रेंच फ्राई या चिप्स के रूप में खाना सबसे ज्यादा नुकसान देह होता है। ये पचने में भारी होते है। इनसे गैस , पेटदर्द , कब्ज हो सकते है। इसलिए तला हुआ आलू ना खायें।

आलू को उबाल कर या भून कर खाने से ही आलू के सभी फायदेमंद पोषक तत्व मिलते है ।

भून कर या सब्जी बना कर खाने से ये वजन कम करता है और ब्लड प्रेशर को कम रखता है।

आलू के छिलके वाली सब्जी खाने से छिलकों में पाये जाने वाले तत्वों का भी लाभ मिल जाता है। इस तरह खाने से अधिक मात्रा में आलू से फाइबर मिलता है। अतः आलू की छिलके वाली सब्जी खाएँ। अन्यथा आलू उबाल कर या भून कर खाएँ। ये पचने में भी हल्का होता है।

आलू का हरापन

आलू पर हरा रंग सोलेनिन नामक विषैले तत्व के कारण होता है। इस विषैले तत्व की वजह से साँस की तकलीफ , दस्त और मांसपेशी में दर्द भी हो सकता है। इससे सिर दर्द या पेटदर्द की शिकायत भी हो सकती है। यह अत्यंत हानिकारक होता है। अतः इसके प्रयोग से बचें।

आलू किस तरह रखना चाहिये

आलू को ठण्डी और अँधेरी जगह में रखना चाहिए। ये जगह सूखी और हवादार होनी चाहिये। । आलू को हवादार टोकरी में रखना चाहिए। टोकरी में कोई ख़राब पीस दिखे तो उसे हटा देना चाहिए वरना ये दूसरे आलू को भी ख़राब कर सकता है।

आलू के औषधीय प्रयोग

आलू दुनिया भर में सबसे ज्यादा लोकप्रिय और सबसे ज्यादा प्रयोग होने वाली सब्जी है। आलू पूरी दुनिया में उगाया जाता है। हालांकि, इसका मूल स्थान दक्षिण अमेरिका है। बताया जाता है कि भारत में आलू 16वीं शताब्दी के आसपास पुर्तगालियों ने लाया था। पौष्टिक तत्वों से भरपूर आलू में स्टार्च होता है। इसमें उच्च जैविक मान वाले प्रोटीन होते हैं। आलू क्षारीय होता है जो शरीर में क्षारों की मात्रा बढ़ाने या उसे बरकरार रखने में बहुत सहायक होता है। आलू का सबसे अधिक महत्वपूर्ण पौष्टिक तत्व विटामिन सी है। आलू खाने से स्कर्वी नामक रोग भी काफी कम देखने में आता है।

आलू के पौष्टिक तत्वों का ज्यादा लाभ पाने के लिए इसे हमेशा छिलके समेत पकाना चाहिए। आलू का सबसे अधिक पौष्टिक भाग छिलके के एकदम नीचे होता है। यह प्रोटीन और खनिज से भरपूर होता है। आलू को उबालना, भूना या अन्य सब्जियों के साथ पकाया जाता है, इस कारण इसके पौष्टिक तत्व आसानी से हजम हो जाते हैं। आलू का रस निकालने के लिए जूसर का प्रयोग किया जा सकता है या फिर उसे कूट-पीसकर उसका रस कपड़े में से छाना जा सकता है।

तेज धूप, लू से त्वचा झुलस गई हो तो कच्चे आलू का रस झुलसी त्वचा पर लगाने से सनबर्न ठीक हो जाता है।

आलू में पोटैशियम साल्ट होता है जो अम्लता यानि एसिडिटी को कम करता है।

पेट में गैस हो तो कच्चे आलू को पीसकर उसका रस पीने से आराम मिलता है।

आलू का रस निकालकर आंखों के काले घेरों पर लगाने से आंखों के नीचे का कालापन दूर हो जाता है।

चोट लगने पर नीले रंग का निशान पड़ जाता है। उस पर कच्चा आलू पीसकर लगाने से फर्क पड़ता है।

कच्चे आलू का रस एलर्जी वाले स्थान पर लगाने से लाभ होता है।

चेहरे पर चेचक या मुंहासों के दाग या झांइयां हो तो कच्चे आलू को पीसकर, तीन बूंद ग्लिसरीन, सिरका और गुलाब का रस मिलाकर फेस पैक बना लें। इसे चेहरे पर अच्छी तरह लगाने से चेहरे के दाग और झांइयां बहुत ही जल्दी दूर हो जाती हैं।

हाथों की झुर्रियों में कच्चे आलू के रस की मालिश करने से झुर्रियां नहीं पड़ती हैं।

आलू या उसके पत्तों का काढ़ा बनाकर पिलाने से पीलिया दूर हो जाता है।

कच्चे आलू का रस पीने से दाद ठीक हो जाता है।

जलने पर आलू को बारीक पीसकर शरीर क़े जले हुए भाग पर मोटा-सा लेप लगाने से जलन में आराम मिलता है।

आलू को पीसकर शरीर पर लेप करने से शरीर की त्वचा चमकदार हो जाती है।

उबाले हुए आलू के पानी से शरीर को साफ करने से त्वचा सुंदर और साफ हो जाती है।

कच्चे आलू का छिलका हटाकर उसका रस निकालकर चेहरे पर लगाने से चेहरे का रंग गोरा हो जाता है।

शरीर में सूजन हो तो आलू को पानी में उबालकर आलू के पानी से सूजन वाले भाग को सेकने से सूजन दूर हो जाती है।

आलू का लेप चोट पर करने से के सूजन दूर हो जाती है।

आलू को उबालकर, गर्म रेत या गर्म राख में भूनकर खाना लाभकारी है।

सूखे आलू में 8.5 प्रतिशत प्रोटीन होता है जबकि सूखे चावलों में 6-7 प्रतिशत प्रोटीन होता है। ऐसे में आलू में अधिक प्रोटीन पाया जाता है। बढ़ती आयु वालों के लिए प्रोटीन आवश्यक है।

बढ़ते बच्चों के लिए आलू पौष्टिक आहार है। दूध पीते बच्चों और बड़े बच्चों को आलू के रस में मधु मिलाकर पिलाने से वे मोटे-तगड़े हो जाते हैं।

किडनी के रोगी भोजन में आलू खाएं। आलू में पोटैशियम की मात्रा बहुत अधिक होती है और सोडियम की मात्रा कम। पोटैशियम की अधिक मात्रा गुर्दों से अधिक नमक की मात्रा निकालती है जिससे गुर्दे के रोगी को लाभ होता है।

उच्च रक्तचाप यानि हाई ब्लड प्रेशर में आलू खाने से रक्तचाप सामान्य बना रहता है।

पानी में नमक डालकर बिना छिला आलू उबालें। इससे आलू नमकयुक्त भोजन बन जाएगा। इस प्रकार यह उच्च रक्तचाप में लाभ देता है। कारण यह कि आलू में मैग्नीशियम पाया जाता है।

गुर्दे की पथरी के रोगी को केवल आलू खिलाकर और बार-बार अधिक मात्रा में पानी पिलाते रहने से गुर्दे की पथरियां आसानी से निकल जाती हैं।

आलू में मैग्नीशियम पाया जाता है जो पथरी को निकालता है तथा पथरी को बनने से रोकता है।

आलू का रस शहद के साथ पीने से हृदय की जलन मिट जाती है।

गठिया या जोड़ों का दर्द हो तो गर्म राख में चार आलू सेंक लें, फिर उनका छिलका उतारकर नमक मिर्च डालकर रोज खाएं। इस प्रयोग से गठिया ठीक हो जाता है।

कमर दर्द में कच्चे आलू के गूदे को पीसकर पट्टी में लगाकर कमर पर बांधने से कमर दर्द दूर हो जाता है।

छोटी-छोटी फुंसियों होना ऐसा संक्रामक रोग है जो कि सूजनयुक्त होती हैं, त्वचा लाल दिखाई देती है और बुखार भी आता है। इस रोग में पीडि़त को आलू पीसकर लगाने से फुंसियां ठीक हो जाती हैं।

आलू में कैल्शियम, लोहा, विटामिन-बी तथा फास्फोरस बहुतायत में होता है. आलू खाते रहने से रक्त वाहिनियां बड़ी आयु तक लचकदार बनी रहती हैं तथा कठोर नहीं होने पातीं.

यदि दो-तीन आलू उबालकर छिलके सहित थोड़े से दही के साथ खा लिए जाएं तो ये एक संपूर्ण आहार का काम करते हैं.

आलू के छिलके ज्यादातर फेंक दिए जाते हैं, जबकि अच्छी तरफ साफ़ किये छिलके सहित आलू खाने से ज्यादा शक्ति मिलती है, साथ ही जिस पानी में आलू उबाले गए हों, वह पानी न फेंकें, बल्कि इसी पानी से आलुओं का रस बना लें, इस पानी में मिनरल और विटामिन बहुत होते हैं।

आलू पीसकर, दबाकर, रस निकालकर एक चम्मच की एक खुराक के हिसाब से चार बार नित्य पिएं, बच्चों को भी पिलाएं, ये कई बीमारियों से बचाता है. कच्चे आलू को चबाकर रस को निगलने से भी बहुत लाभ मिलता है.

भुना हुआ आलू पुरानी कब्ज और आतोंं की सड़ांध दूर करता है। आलू में पोटेशियम साल्ट होता है जो अम्लपित्त (Acidity) को रोकता है.

कच्चा आलू पत्थर पर घिसकर सुबह-शाम काजल की तरह लगाने से 5 से 6 वर्ष पुराना जाला और 4 वर्ष तक का फूला 3 मास में साफ हो जाता है।

आलू उबालने के बाद बचे पानी में एक आलू मसलकर बाल धोने से आश्चर्यजनक रूप से बाल चमकीले, मुलायम और जड़ों से मजबूत होते हैं और सिर में खाज, सफेद होना व गंजापन तत्काल रुक जाता है। साथ ही आलू के छिलके का काढ़ा बालों को प्राकृतिक रूप से काला भी करता है।

आलू के रस में नींबू रस की कुछ बूंदें मिलाकर लगाने से धब्बे हल्के हो जाते हैं।

आलू के टुकड़ों को गर्दन, कुहनियों आदि सख्त स्थानों पर रगडऩे से वहां की त्वचा साफ एवं कोमल हो जाती है।

झाइयों तथा झुर्रियों से छुटकारा पाने के लिए आलू के रस में मुल्तानी मिट्टी मिलाकर झाइयों और झुर्रियों पर लगाएं। बीस मिनट बाद चेहरा पानी से साफ कर लें।

आलू भूनकर नमक के साथ खाने से चर्बी की मात्रा में कमी होती है।

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