जानिए क्यों जमीन पर बैठकर खाना खाने को आयुर्वेद में सबसे अच्छा तरीका कहा है और जानिए इसके लाभ

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“नीचे बैठकर खाना!! ना बाबा ना, कितना आउटडेटेड और असभ्य सा तरीका है.” जब कभी कोई आपको नीचे बैठकर खाने के लिए कहता है तो आपके दिमाग में यही शब्द घूमते होंगे कि कहीं किसी ने आपको नीचे बैठकर खाना खाते हुए देख लिया तो ये आपके लिए कितना शर्मिंदगी भरा होगा। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि प्राचीन काल में बड़े-बड़े ऋषि-महर्षि जमीन पर बैठकर ही भोजन क्यों किया करते थे? वे ना तो असभ्य थे और ना ही निचले तबके के, फिर क्यों भोजन करने के लिए वे भूमि को ही चुनते थे?

चलिए आज हम आपको जमीन पर बैठकर खाने का तात्पर्य और उसके फायदे बताते हैं, जिनसे अभी तक आप पूरी तरह अपरिचित हैं। जमीन पर बैठकर खाना खाने का अर्थ सिर्फ भोजन करने से नहीं है, यह एक प्रकार का योगासन कहा जाता है। जब भारतीय परंपरानुसार हम जमीन पर बैठकर भोजन करते हैं तो उस तरीके को सुखासन या पद्मासन की तरह देखा जाता है। यह आसन हमारे स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत लाभप्रद है।

यह तो आप जानते ही होंगे कि आपका गलत पॉश्चर आपकी बहुत सी परेशानियों का कारण बनता है लेकिन जब आप जमीन पर पैर क्रॉस करके बैठे होते हैं तो आपके शरीर का पॉश्चर एकदम सही होता है। जिसके कारण आपकी कमर, मसल्स और ज्वांइट्स पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता। इस प्रकार आपको कमर में दर्द, घुटनों में दर्द या गर्दन में दर्द आदि शिकायत का सामना नहीं करना पड़ता।

पाचन क्रिया ठीक रहती है

जमीन पर बैठकर खाना खाते समय हम लोग सुखासन की मुद्रा में बैठते हैं। इस योग मुद्रा में बैठकर खाना खाने से खाना सही तरह से पच जाता है। जमीन पर बैठकर भोजन करते समय निवाला उठाते वक़्त आगे की ओर झुकते हैं और फिर निवाला निगलने के बाद पहले वाली पोजिशन में आना जाते हैं। ऐसा बार-बार करने से पेट की मांशपेशियां एक्टिव हो जाती हैं और खाना तेज़ी से पचने लगता है। इस मुद्रा में बैठने से पेट से जुड़ी कई समस्याएं भी कम हो जाती हैं।

वज़न कंट्रोल करें

ज़मीन पर बैठकर खाना खाते समय आप सुखासन की अवस्था में बैठते हैं, जिससे दिमाग़ अपने आप शांत हो जाता है। ज़मीन पर बैठकर खाने से पेट और दिमाग़ को सही समय पर एहसास हो जाता है कि आपने भरपूर खा लिया है और आप ओवरईटिंग से बच जाते हैं। जिससे आपका वज़न कंट्रोल रहता है।

शरीर को लचीला बनाएं

ज़मीन पर बैठकर खाते समय जब आप पद्मासन की मुद्रा में बैठते हैं, तो आपकी पीठ और पेट के आसपास की मांसपेशियों में खिंचाव होता है। जिससे शरीर में लचीलापन बना रहता है।

गठिया रोग से बचाए

ज़मीन पर बैठकर खाना खाते समय पद्मासन और सुखासन की मुद्रा में होते हैं। यह एक ऐसी मुद्रा है जो न केवल हमारे पाचन तंत्र को ठीक रखती है, बल्कि जोड़ों को कोमल और लचीला बनाती है। इस लचीलेपन से जोड़ों की चिकनाई बनी रहती है, जिससे आगे चलकर उठने-बैठने में दिक्कत नहीं होती है और हड्डियों के रोग, जैसे ओस्टियोपोरोसिस और आर्थराइटिस की समस्या से भी बचे रहते हैं।

मन को शांत करें

जब हम लोग ज़मीन पर बैठकर सुखासन की मुद्रा में खाना खाते हैं। तो दिमाग़ तनाव रहित और शांत अवस्था में रहता है।

हार्ट को हेल्दी बनाएं

ज़मीन पर बैठकर खाना खाने से हमारे शरीर में रक्‍त का संचार अच्‍छे से होता है और हृदय बड़ी सहजता से सभी पाचन अंगों तक ख़ून पहुंचाता है, लेकिन कुर्सी मेज पर बैठ कर खाना खाने से ब्लड सर्कुलेशन विपरीत होने लगता है। इसलिए ज़मीन पर बैठकर भोजन करें और हार्ट को हेल्दी बनाएं।

दिमाग के लिए फायदेमंद

जमीन पर बैठकर खाने से दिमाग मजबूत होता है। जो लोग सुखासन में बैठकर खाना खाते हैं। उनका दिमाग तनाव रहित रहने की संभावना अधिक होती है, क्योंकि यह दिमाग औेर तंत्रिकाओं को शांत करता है।

समय से पहले बूढ़ा नहीं होने देता

जमीन पर बैठकर खाने का फायदा है कि आप समय से पहले बूढ़े नहीं होते हैं। क्योंकि इस मुद्रा में बैठकर खाना खाने से रीढ़ की हड्डी और पीठ से जुड़ी समस्याएं नहीं होती है। साथ ही, जो लोग कंधों को पीछे धकेलते हुए गलत मुद्रा में बैठने के कारण किसी तरह के दर्द से परेशान होते हैं। वह समस्या भी इस आसन में बैठकर खाना खाने से दूर हो जाती है।

उम्र बढ़ती है

जमीन पर बैठकर खाने से उम्र बढ़ती है। एक अध्ययन में पाया गया है कि जो लोग जमीन पर पद्मासन में या सुखासन में बैठते है और बिना किसी सहारे के खड़े होने में सक्षम होते हैं। उनकी लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना ज्यादा होती है, क्योंकि इस मुद्रा से उठने के लिए अधिक लचीलेपन और शारीरिक शक्ति की आवश्यकता होती है।

जोड़ों के लिए फायदेमंद

पद्मासन और सुखासन एक ऐसी मुद्रा है जो आपके पूरे शरीर को लाभ पहुंचाती है और लचीला बनाती है। ये केवल आपके पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में ही मदद नहीं करते, बल्कि आपके जोड़ों को कोमल और लचीले बनाए रखने में भी मदद करते हैं। गठिया व हड्डियों की कमजोरी जैसे रोगों से भी बचाता है।

संबंध गहरे होते हैं

एक साथ जमीन पर बैठकर खाने से पारिवारिक संबंध मजबूत होते हैं। आमतौर पर जमीन पर बैठे कर खाना खाने की प्रथा एक परिवारिक गतिविधि है। सही समय पर यदि पूरा परिवार एक साथ खाना खाए तो आपसी सामंजस्य बढ़ता है। इसके अलावा यह परिवार के साथ जुड़ने का एक बेहतरीन कारण है।

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