खाने के बाद क्यों खाई जाती है सौंफ और मिश्री ? जानिए इसके 10 गुणकारी फायदे

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आपने अक्सर शादी में या होटल में खाने सौंफ रखी देखी होगी जिसका प्रयोग आप खाने के बाद के लिए करते हैं. खाने के बाद अक्सर लोग सौंफ खाते हैं और ये ज्यादातर रेस्टोरेंट में दिखाई देती हैं. मगर क्या आप जानते हैं कि खाने के बाद सौंफ क्यों खाई जाती है ? दरअसल खाने के बाद सौंफ इसलिए खाई जाती है क्योंकि इसे खाने से आपकी पाचन क्रिया झट से काम करेगी और आपका खाना अच्छे से पच जाता है. इसमें अगर मिश्री यौ चीनी का मिश्रण हो तो और भी अच्छा है क्योंकि सौंफ और चीनी को एक साथ मिलाकर खाने से आपका पाचन क्रिया दुरुस्त रहेगा और खाना बहुत अच्छे से डायजेस्ट हो सकता है. क्यों खाई जाती है खाने के बाद सौंफ ये तो आपको बता दिया लेकिन इसके अलावा भी इसके कई गुणकारी लाभ होते हैं, चलिए आपको बताते हैं.

क्यों खाई जाती है खाने के बाद सौंफ 

सौंफ गले को साफ करता है इसलिए जब बड़े-बड़े गायक गाना गाते हैं तो अक्सर सौंफ का इस्तेमाल करते हैं या फिर जब कहीं जागरण होता है तब भी इसका प्रयोग किया जाता है लेकिन इस चमत्कारिक सौंफ में और भी फायदे होते हैं.

1. बादाम, सौंफ और मिश्री को समान मात्रा मे मिलाकर पीस लें. फिर इसे आप नियमित रूप से हर रात और दिन के खाने के बाद खाएं, ऐसा करने से आपका पाचनतंत्र दुरुस्त रहेगा और आपकी याद्दाश्त भी अच्छी रहेगी.

2. अगर किसी महिला को अनियमत पीरियड्स होते हैं और उसे असहनीय दर्द भी होता है तो वो हर दिन नियमित रूप से सौंफ खाएं. इसका परिणाम दो महीनों में ही पता चलने लगेगा.

3. हर दिन सौंफ खाने से आपके आंखो की रोशनी भी ठीक रहती है. अगर आप चाहें तो इसमें मिश्री भी मिला सकते हैं.

4. अगर किसी के मुंह से बहुत दुर्गंध आती है तो उसे नियमित रूप से दिन में तीन से चार बार आधा-आधा चम्मच सौंफ जरूर चबाना चाहिए. ऐसा करने से मुंह से बदबू आऩा बंद हो जाती है और सांस की दुर्गंध भी खत्म हो जाती है.

5. हर दिन अगर आप नियमित रूप से सुबह खाली पेट सौंफ खाने से खून साफ होता है और त्वचा में भी चमक आती है.

6. सौंफ में कैल्शियम, पोटेशियम के अलावा आयरन और सोडियम जैसे औषधीय तत्व पाये जाते हैं. इसका हर दिन सेवन करने से आपकी बॉडी में होने वाली ये सारी कमियां खत्म हो जाएंगी.

7. हर दिन सौंफ का प्रयोग करने से खांसी, मुंह के छाले और लूज मोशन जैसी बीमारियां नहीं होती और अगर हो गई है तो ऐसे में सौंफ का सेवन समय-समय पर करते रहें.

8. अगर आपकी आवाज थोड़ी बहुत अच्छी है और आप रियाज करते हैं तो उसके साथ-साथ हर दिन भुनी हुई सौंफ गरम पानी के साथ खाएं. इससे आपकी आवाज साफ और मधुर होगी.

9. अगर आप चाहते हैं कि आपका कोसेस्ट्रॉल ना बढ़े तो आपको लगभग 30 मिनट एक चम्मच सौंफ चबानी चाहिए. सौंफ आपके बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करती है.

10. अगर आप खांसी से बहुत दिनों से परेशान हैं तो एक चम्मच सौंफ को 2 कप पानी में उबाल लें और इसका मिश्रण बना लीजिए. अब इस मिश्रण को दिन में दो या तीन बार पिएं इससे आपकी आंते अच्छी रहेंगी साथ ही खांसी भी छूमंतर हो जाएगी.

परिचय (Introduction) – मिश्री का रंग सफेद होता है। इसकी तासीर शीतल और हल्की होती है. मिश्री धातु को बढ़ाने वाली (वीर्यवर्द्धक), खून पित्तनाशक, दस्तावर, वात तथा पित्तनाशक है।

विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases)

आंख आना: 6 ग्राम से 10 ग्राम महात्रिफला घृत में मिश्री मिलाकर सुबह-शाम रोगी को देने से पित्तज चक्षु प्रदाह (गर्मी के कारण आंखों में जलन), आंखें ज्यादा लाल सुर्ख हो जाना, आंखों की पलकों का सूज जाना, रोशनी के ओर देखने से आंखों में जलन होना आदि रोग दूर होते हैं। इसके साथ ही त्रिफला के पानी से आंखों को धोने से भी आराम आता है।

आंख का फड़कना: 1 भाग गोघृत (गाय का घी) और 4 भाग दूध लेकर अच्छी तरह उबाल लें। फिर शुष्म-शुष्म (गर्म-गर्म) दूध के साथ मिश्री और 3 से 6 ग्राम असगंध नागौरी का चूर्ण सुबह-शाम सेवन किया जाए तो पूरी तरह से पलकों का फड़कना बंद हो जाता है।

आंखों के रोहे फूले:

  • तूतिया (नीला थोथा, कॉपर सल्फेट) और मिश्री को बराबर मात्रा में लेकर गुलाब जल में घोल बनाकर रखें। इसकी 2-3 बूंदे रोजाना 3 से 4 बार आंखों मे डालने से फूले, रोहे, कुकरे आदि रोग समाप्त हो जाते हैं।
  • 6 से 10 ग्राम महात्रिफलादि घृत इतनी ही मिश्री के साथ मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से आंखों का लाल होना, आंखों की सूजन, दर्द और रोहे आदि दूर होते हैं। इसके साथ ही त्रिफले के पानी से आंखों को बीच-बीच में धोना चाहिए।

दमा या श्वास का रोग: समीन पन्नग रस लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग, मिश्री या मिश्री के शर्बत के साथ सुबह-शाम देने से श्वास नलिका या गले के अन्दर जमी कफ निकल जाती है जिससे खराश कम हो जाती है। श्वास नली (सांस की नली) साफ हो जाने से दमा का वेग भी कम हो जाता है।

कनीनिका शोथ: 6 से 10 ग्राम महात्रिफला घृत में उतनी ही मिश्री मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से आंखों के सारे रोग दूर होते हैं। खासकर पित्तज दोष से हुए आंखों में जलन, आंखों के किसी भी भाग में सूजन आदि रोग दूर होते हैं। इसको खाने के साथ-साथ त्रिफला के पानी से आंखों को रोजाना 2-3 बार धोना भी चाहिए।

डकार के आने पर: मिश्री की चासनी में बेर की मींगी (गूदा) और लौंग को मिलाकर खाने से जी के मिचलाने में लाभ होता है।

रोशनी से डरना: 6 ग्राम से 10 ग्राम महात्रिफलादि घृत को मिश्री मिले हुए ठण्डे दूध में मिलाकर सुबह-शाम पीने से रोशनी से डरना, आंखों में जलन, आंखों का लाल होना और आंखों में दर्द आदि रोग दूर हो जाते हैं। त्रिफला के पानी से रोजाना आंखों को धोने से भी लाभ होता है।

उपतारा शोथ: 6 से 10 ग्राम महात्रिफला घृत को उतनी ही मिश्री में मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करें। इससे आंखों की सूजन, दर्द, आंखों का लाल होना, उपतारा शोथ (आंखों के अन्दर की सूजन) आदि रोग दूर होते हैं।

मुंह के छाले: 3 ग्राम बड़ी इलायची, 10 ग्राम बबूल का गोंद, 10 ग्राम मिश्री और 2 ग्राम नीम की पत्तियों को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें, फिर इसे रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से मुंह के छाले जल्दी ठीक होते हैं।

गर्भवती स्त्री का जी मिचलाना: मिश्री की चासनी में लौंग का चूर्ण डालकर पीने से गर्भवती स्त्री का जी मिचलाना बंद हो जाता है।

बहरापन: मिश्री और लाल इलायची को लेकर बारीक पीस लें। फिर इस चूर्ण को सरसों के तेल में डालकर 2 घंटों तक रहने दें। 2 घंटे के बाद इस तेल को छानकर एक शीशी में भर लें। इस तेल की 3-4 बंदे रोजाना सुबह-शाम कान में डालने से बहरेपन का रोग दूर हो जाता है।

संग्रहणी (दस्तपेचिश): 80 ग्राम मिश्री, 80 ग्राम कैथ, 30 ग्राम पीपल, 30 ग्राम अजमोद, 30 ग्राम बेल की गिरी, 30 ग्राम धाय के फूल, 30 ग्राम अनारदाना, 10 ग्राम कालानमक, 10 ग्राम नागकेसर, 10 ग्राम पीपलामूल, 10 ग्राम नेत्रवाला, 10 ग्राम इलायची इन सभी को एक साथ लेकर बारीक पीस लें। इसमें से 2 चुटकी चूर्ण मट्ठा (लस्सी) के साथ खाने से संग्रहणी अतिसार (दस्त) के रोगी का रोग दूर हो जाता है।

खूनी अतिसार: 12 ग्राम सूखे धनिये और 12 ग्राम मिश्री को लेकर पीस लें। इस चूर्ण को आधे कप पानी में घोलकर पीने से खूनी अतिसार (दस्त) का रोग दूर हो जाता है।

गला बैठना: सौंठ और मिश्री बराबर मात्रा में मिलाकर बारीक पीसकर चूर्ण बना लें और इस चूर्ण में शहद मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। इसकी गोलियों को चूसने से बैठा हुआ गला खुल जाता है तथा गले की खुश्की खत्म हो जाती है।

गर्मी अधिक लगना: गर्मी के मौसम में गर्मी से बचने के लिए 5 से 10 ग्राम रतनपुरूष की जड़ और मिश्री को मिलाकर रोजाना सुबह-शाम पीने से मन में शांति और शरीर में ठंडक का अनुभव होता है।

मोटापा दूर करना: मिश्री, मोटी सौंफ, सूखा धनिया को बराबर मात्रा में पीसकर 1 चम्मच सुबह पानी के साथ लेने से मोटापा दूर होता है।

नकसीर: 50 ग्राम सूखे हुए कमल के फूल और 50 ग्राम मिश्री को एक साथ मिलाकर पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 1 चम्मच गर्म दूध के साथ फंकी लेने से सिर्फ 1 ही हफ्ते में ही नकसीर (नाक से खून बहना) का रोग दूर हो जाता है।

भ्रम रोग (मानसिक भ्रम): लगभग 10 ग्राम मिश्री के साथ लगभग 6 ग्राम बरियारे के बीज को मिलाकर खाने से भ्रम रोग खत्म हो जाता है।

दिमाग के कीड़े: 50 ग्राम मिश्री और इतनी ही मात्रा में शंखपुष्पी को लेकर चूर्ण बना लें और इस चूर्ण को 6 ग्राम की मात्रा में सुबह गाय के दूध के साथ खाने से दिमाग की कमजोरी दूर हो जाती है।

गुल्यवायु हिस्टीरिया:

  • 10 ग्राम मिश्री और 10 ग्राम घृतकुमारी (ग्वारपाठा) के गूदा को मिलाकर त्रिफला के पानी से खाने से हिस्टीरिया रोग दूर हो जाता है।
  • लगभग 120 ग्राम मिश्री, 25 ग्राम कूठ, 25 मीठी बच, 25 ग्राम शंखपुष्पी, 25 ग्राम ब्राह्मी और 10 ग्राम सनाय को पीसकर चूर्ण बना लें। इसके बाद 3 ग्राम चूर्ण को पानी या गाय के दूध से लेने से हिस्टीरिया रोग में बहुत लाभ होता है।