मात्र 21 दिन करें सेवन, और दिमाग हो जाएगा 10 गुना तेज़ लोग भी लगेंगे पूछने कि !!

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बहुत लोग यह सोचते हैं कि हमारी स्मृति स्थिर और अपरिवर्तनीय है. लेकिन ऐसा नहीं है. हर व्यक्ति चाहता है कि उसकी स्मरण शक्ति, याददाश त्रीव हो, उसे अपने मित्रों-शुभचिंतको, परिचित लोगो के नाम, नंबर, चेहरे, अपनी पढ़ाई, और अपनी जरुरत की सभी चीज़े याद रहे. वस्तुत: जिस इन्सान की स्मरण शक्ति तेज होती है उसे कामयाबी भी आसानी से मिल जाती है. चाहे वह पढ़ाई का क्षेत्र हो, नौकरी का, व्यापार का या अन्य कोई भी अगर आपकी स्मरण शक्ति तेज है तो आप अलग ही नज़र आएंगे.

अगर कोई व्यक्ति मेहनती और मिलनसार है और उसकी स्मरण शक्ति भी तेज है तो उसकी सफलता की सम्भावना बहुत बड़ जाती है, आप अगर 21 दिन तक इस चूर्ण का सेवन करेंगे तो स्मरणशक्ति ऐसी बढ़ेगी की सिर्फ एक बार सुनने मात्र से सब कुछ याद रह जायेगा..

कल्याणवलेह के 21 दिन तक नित्य सेवन से स्मरण शक्ति बहुत बढ़ जाती है. ऐसा व्यक्ति सुनकर ही बातों को याद कर लेता है. उसकी आवाज़ बादलों के समान गंभीर और कोयल के समान मधुर हो जाती है. यदि को स्वयं की या अपने बच्चों की याददाश्त को बढ़ाना है तो एक बार यह प्रयोग अवश्य करे.

सामग्री : हल्दी, बच, कूठ, पीपल, सोंठ, जीरा, अजमोद, मुलेठी और सेंधा नमक सब बराबर मात्रा में मिलाकर महीन पीस कर चूर्ण तैयार कर लें.

सेवन की विधि : 8 से 16 रत्ती (1 से 2 ग्राम) तक आयु के अनुसार 21 दिनों तक प्रातःकाल खाली पेट और रात को खाना खाने के 2-3 घंटे बाद सोते वक़्त नित्य प्रयोग करें.

दिमाग तेज चले और याददाश्त अच्छी रहे, इसके लिए अगर आप को कारगर उपाय की तलाश में हैं तो जीवनशैली का यह छोटा सा बदलाव कारगर हो सकता है, वैज्ञानिकों ने एक नए शोध के आधार पर माना है कि अच्छी नींद लेने वाले लोगों का दिमाग अधिक तेज चलता है.

पानी पीने से भी द‌िमाग तेज होता है, जान‌िए कैसे : शोधकर्ताओं के अनुसार, नींद के दौरान मृत कोशिकाएं दिमाग की रक्त वाहिकाओं के जरिए शरीर की रक्त प्रवाह प्रणाली में जाती है और अंत में जिगर में पहुंच जाती है. इस तरह नींद में इन कोशिकाओं की सफाई हो जाती है.

भूलने की है बीमारी तो रोज करें ये आसन : अमेरिका के रोचेस्टर विश्वविद्यालय में हुए एक शोध में वैज्ञानिकों ने पाया कि क्यों लोग अपने जीवन का एक तिहाई भाग सोने में बिताते हैं वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में एक चुहिया पर प्रयोग कर पाया कि नींद की प्रक्रिया के दौरान मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं के जरिये निर्जीव कोशिकाएं निष्क्रिय होकर शरीर बाहर निकल जाती है और ताजगी प्रदान करती हैं.

शोधकर्ताओं ने इस प्रयोग के बाद पाया कि इन निर्जिव कोशिकाओं में एक खास किस्म का प्रोटीन तत्व एमीलोइड बीटा भी शामिल होता है जो भूलने की बीमारी अल्जाइमर को बढाने में सहायक होता है वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया को तर्कसहित स्पष्ट करते हुए कहा कि नींद लेते समय मस्तिष्क की कोशिकाएं 60 प्रतिशत तक सिकुड़ जाती हैं. जिसके कारण शरीर में मौजूद अन्य रसायन पहले से कहीं अधिक तेजी से निर्जीव कोशिकाओं को शरीर से बाहर करने में मदद करते है.

रोचेस्टर विश्वविद्यालय के शोकर्ता मैकन नेडरगार्ड ने कहा नींद लेते समय मस्तिष्क शरीर को ताजगी प्रदान रकता है तथा इन निर्जीव कोशिकाओं की भूमिका का अंत कर वह दोनों कार्य एक साथ करता है. उन्होंने बताया कि नींद के समय मस्तिष्क यह कार्य दस गुना अधिक तेजी से करता है.

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