पानी से भरा तांबे का एक लौटा बदल देगा आपकी किस्मत के सितारे, जानिये कैसे

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हर इंसान चाहता है कि उसके पास धन दौलत हो और साथ ही वो समाज में अपनी मान प्रतिष्ठा भी चाहता है। यदि समाज में आपका रुतबा है तो पैसे की आपके पास कोई कमी नहीं होगी। आज हम आपको बताने जा रहे हैं। तांबे के लौटे का वो चमत्कारी उपाय, जो आपकी किस्मत के सितारे बदल देगा। घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान पाने के लिए रोज रात को सोने से पहले अपने सिर के पास तांबे के लोटे में पानी भरकर रखें।

सुबह जल्दी उठें और इस लोटे को अपने सिर पर सात बार वार लें। इसके बाद ये पानी किसी कांटेदार पेड़ की जड़ में डाल दें। ये उपाय लंबे समय तक करते रहना चाहिए। ज्योतिष के अनुसार इस उपाय से व्यक्ति को मान-सम्मान की प्राप्ति होती है और नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है। ऐसा नियमित 40 दिन तक करने से आपको अवश्य ही लाभ मिलेगा।

सूर्य को चढ़ाएं जल :-

सुबह जल्दी उठकर सूर्य को जल चढ़ाना चाहिए। स्नान आदि कामों के बाद तांबे के लोटे में पानी भरें और उसमें लाल फूल, कुमकुम, चावल डालें और सूर्य को जल चढ़ाएं। जल चढ़ाते समय ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करें। इस उपाय से व्यक्ति को समाज में प्रसिद्धि मिलती है।

हिंदू शास्त्रों के अनुसार दिन का आरंभ सूर्य को अर्घ्य देकर उनकी वंदना से किया जाना चाहिए। जब श्री विष्णु धरती पर श्रीराम रूप में अवतरित हुए तो वो भी अपने दिन का आरंभ सूर्य नारायण की पूजा के उपरांत करते थे।

मान्यता है की इनकी कृपा दृष्टि से रोग और शोक नष्ट हो जाते हैं। भारत में सूर्योपासना ऋग वैदिक काल से होती आ रही है। सूर्य की शक्तियों का मुख्य श्रोत उनकी पत्नी ऊषा और प्रत्यूषा हैं।सूर्य देव को जल अर्पित करने का भी एक विधान है। यदि आप विधानपूर्वक उन्हें अर्घ्य नहीं देंगे तो सकारात्मक की बजाय नकारात्मक परिणाम मिलेंगे।

अपकी जन्मकुंडली में सूर्य शुभ है तो समाज में मान-सम्मान के साथ-साथ उच्च पद की भी प्राप्ति होगी। हंसते-खेलते परिवार का साथ मिलेगा और रोगों से कोसों दूर रहेंगे। यदि सूर्य कमजोर है तो जीवन में बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें। साफ और स्वच्छ वस्त्र पहनें।जब सूर्य लालिमा युक्त हो उस समय उनके दर्शन करके अर्घ्य देना शुभ होता है।

अर्घ्य देते समय हाथ सिर से ऊपर होने चाहिए। ऐसा करने से सूर्य की सातों किरणें शरीर पर पड़ती हैं। सूर्य देव को जल अर्पित करने से नवग्रह की भी कृपा रहती है।

तीन परिक्रमा करें :-

मनोवांछित फल पाने के लिए प्रतिदिन इस मंत्र का उच्चारण करें- ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।

पीपल पर चढ़ाएं जल :-

पीपल की जड़ में जल चढ़ाना चाहिए। शास्त्रों की मान्यता है कि पीपल भगवान श्रीहरि का ही एक स्वरूप है और इसमें सभी देवी-देवताओं का वास है। इस कारण जो लोग पीपल की पूजा करते हैं, जल चढ़ाते हैं, उन्हें सभी प्रकार की सुख-सुविधाएं प्राप्त होती हैं।

पीपल के पेड़ की पूजा करने की विधि :-

शनि के कोप से बचने से लेकर घर में किसी भी प्रकार का दुःख दूर करने के लिए पीपल ले पेड़ की पूजा की जाती है। नीचे हम आपको पीपल के पेड़ की पूजा करने की विधि बता रहे है। जिसके अनुसार आप पीपल ले पेड़ की पूजा कर सकते है।

पीपल के वृक्ष की पूजा शनिवार वाले दिन की जाती है। पूजा के लिए दूध, जल, शक्कर (ब्राउन वाली), शहद, काले तिल, गंगा जल और गुड़ आदि को एक साथ जल में मिला लें। अब इस मीठे जल को पीपल के वृक्ष पर चढ़ाएं।

साथ में आटे का दीपक सरसों के तेल में जलाएं और उसमे एक लोहे की कील व् 11 साबुत उड़द के दाने डालकर धुप के साथ अर्पित करें। बाएं हाथ से पीपल के वृक्ष को छुएं और माथे से लगाएं। 11 बार परिक्रमा करें। ऐसा करने से आपको शनिदेव की कृपा तो मिलेगी ही साथ-साथ आपके कष्ट भी दूर होंगे।

अधिक जानकारी के लिए देखे विडियो :-

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