एड्स से भी ज्यादा खतरनाक है ये रोग, वक्त रहते जान लें लक्षण और रामबाण घरेलु उपाय

416

एड्स एक ऐसी बीमारी है जिसे सबसे जानलेवा कहा जाता है। एड्स का पूरा नाम ‘एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिसिएंसी सिंड्रोम’ है। मानव शरीर में इस बीमारी के पनपने के पीछे एच.आई.वी. वायरस जिम्मेदार होता है। इस बीमारी की सबसे खराब चीज यह है कि यह कभी अकेले नहीं आती है। बल्कि अपने साथ कई भयानक रोग साथ लाती है।

हालांकि आज हम आपको एड्स नहीं बल्कि इससे भी गंभीर एक बीमारी के बारे में बता रहे हैं। ये रोग इतना जानलेवा है कि अगर इलाज करने में जरा भी देरी हो जाए मौत भी हो सकती है। इस रोग का नाम है हेपेटाइटिस बी। जी हां, सही सुन रहे हैं आप! हेपेटाइटिस बी रोग संक्रमण के चलते भी फैलता है।

हेपेटाइटिस बी रोग के होने के कारणों में फैलता है। संक्रमित सूई का इस्तेमाल या फिर ब्लेड, असुरक्षित यौन संबंध बनाने या फिर संक्रमित सूई के प्रयोग से फैलता है। यह संक्रमित मां से उसके गर्भ में पल रहे बच्‍चे को भी हो सकता है। यानि कि कह सकते हैं कि आनुवंशिक तौर पर भी इस रोग के फैलने की संभावना रहती है।

इसके अलवा ब्लड ट्रांसफ्यूजन या ऑर्गन ट्रांसप्लांट करते समय ठीक से जांच न करने पर भी हेपेटाइटिस बी होता है। लेकिन एक बात हमेशा ध्यान में रखें कि गले मिलने से, हाथ मिलाने से, खांसी या छींकने से हेपेटाइटिस बी नहीं होता है। माना जाता है कि यह वायरस एचआईवी वायरस से 50 से 100 गुना अधिक संक्रमित होता है। इसके कारण मरीज की मौत भी हो सकती है।

इलाज है बहुत मुश्किल :-

अगर यह कहें कि हेपेटाइटिस का इलाज आज भी मुश्किल है तो कुछ गलत नहीं होगा। क्योंकि आज भी इस रोग का सही टीका उपलब्ध नहीं है। यह वायरस 180 लाख लोगों को अब तक संक्रमित कर चुका है जिसका इलाज वैज्ञानिकों के पास स्थायी तौर पर अब तक नहीं है। इस वायरस से लड़ने के लिए अब तक कोई टीका तैयार दुनिया के वैज्ञानिक नहीं कर पाए हैं। अब तक दुनिया में 530 मीलियन लोग इस वायरस की चपेट में आ गए हैं।

क्या है हेपेटाइटिस बी :-

यह ‘बी’ टाइप के वायरस से होने वाली बीमारी है। इसे सीरम हेपेटाइटिस भी कहते हैं। यह रोग रक्त, थूक, पेशाब, वीर्य और योनि से होने वाले स्राव के माध्यम से होता है। ड्रग्स लेने के आदि लोगों में या उन्मुक्त यौन सम्बन्ध और अन्य शारीरिक निकट सम्बन्ध रखने वालों को भी यह रोग हो जाता है। विशेषकर अप्राकृतिक संभोग करने वालों में यह रोग महामारी की तरह फैलता है।

इस दृष्टि से टाइप ‘ए’ के मुकाबले टाइप ‘बी’ ज्यादा भयावह होता है। इस टाइप का प्रभाव लीवर पर ऐसा पड़ता है कि अधिकांश रोगी ‘सिरोसिस ऑफ लिवर’ के शिकार हो जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक पूरी दुनिया में लगभग दो अरब लोग हेपेटाइटिस बी वायरस से संक्रमित हैं और तकरीबन 35 करोड़ से अधिक लोगों में क्रॉनिक (लंबे समय तक होने वाला) लिवर संक्रमण होता है, जिसकी मुख्य वजह शराब का सेवन है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अल्कोहल एब्यूस एंड एल्कोहलिज्म के एक अनुसंधान से पता चला कि 15 साल से कम उम्र में शराब का सेवन शुरू करने वाले युवाओं में 21 साल की उम्र में शराब पीना शुरू करने वाले किशोरों की तुलना में शराब के आदि होने की संभावना चार गुना तक अधिक होती है। और शराब पीने की इसी आदत के चलते उन्हें कुछ ही महीनों में हेपेटाइटिस बी का शिकार भी बनना पड़ता है।

हेपेटाइटिस बी लक्षण :-

-त्वचा और आँखों का पीलापन।

-गहरे रंग का मूत्र।

-अत्यधिक थकान।

-उल्टी और पेट दर्द।

लिवर कैंसर से भी होता है यह रोग :-

हेपेटाइटिस बी एक वायरल संक्रामक रोग है जो हेपेटाइटिस बी वायरस के कारण फैलता है। कई बार हेपेटाइटिस बी से जुड़ी बीमारी में ज्यादा तकलीफ नहीं है जिस कारण लंबे समय तक इस बीमारी का पता नहीं चलता। इस कारण हर साल कई लोग इस बीमारी के कारण मर जाते हैं।

हेपेटाइटिस बी के वायरस के कारण लीवर भी खराब हो जाती है जिससे हर साल 4 हजार से 5 हजार लोगों की मृत्यु हो जाती हैं। विश्व में लीवर कैंसर के 60% मामले हपेटाइटिस के कारण होते हैं।

रोग से बचने के घरेलू उपाय :-

-आंवला विटामिन सी से भरपूर होता है जो लीवर को हर तरह से फायदा पहुंचाता है। इसमें पाए जाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट हमारे शरीर से टोक्सिन को हटाने में मदद करते हैं, और लीवर हमारे शरीर की वह जगह है जहाँ सबसे अधिक मात्रा में टोक्सिन पाया जाता है।

-मुलेठी पाउडर का आयर्वेद में बहुत पहले से नान एल्कोहल फैटी लीवर सम्बंधित बीमारियों के उपचार के लिए हो रहा है। मुलेठी पाउडर हमारे लिवर को बहुत फायदा पंहुचाती है। एक बड़ा चम्मच मुलेठी पाउडर में दो चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन खाएं। हेपेटाइटिस के उपचार में यह भी बेहद फायदेमंद है। इसके साथ ही लिकोरिस की जड़ को पानी में उबालकर उसकी चाय भी बनाई जा सकती है।

-लहसुन शरीर से विषाक्त पदार्थो को साफ़ करने में मदद करता है। लहसुन में भारी मात्रा में सेलेनियम पाया जाता है, जो की लीवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है और रक्त को साफ करता है। ऐसे में रोजाना सुबह खाली पेट लहसुन की एक से दो कली चबाएं। साथ ही खाना बनाने में भी लहसुन का प्रयोग मसाले के रूप में जरूर करें।

-हल्दी एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है। हल्दी का एंटीवायरल एक्शन हेपेटाइटिस बी के वायरस को बढ़ने से रोकता है। हल्दी को इस्तेमाल करने का सबसे आसान और अच्छा उपाय है कि इसे खाना बनाते वक्त मसालों के साथ मिलाकर खाएं या दूध में चुटकीभर हल्दी मिलाकर रोज पिएं। इससे आप लिवर संबंधी रोगों से बचे रहेंगे।

-काली गाजर के भी बहुत फायदे हैं। विटामिन से भरपूर काली गाजर से खून की कमी पूरी होती है तथा रक्त संचार सुधरता है। हेपेटाइटिस में भी गाजर को सलाद के रूप में खाने से बहुत फायदे होते हैं। हरी चाय में एंटीऑक्सीडेंट के गुण भरी मात्रा में पाए जाते है। जिससे लीवर की सफाई में मदद होती है तथा लीवर अच्छे से काम करता है। हेपेटाइटिस के उपचार और बचाव के लिए ग्रीन टी को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

अगर आपको ये पोस्ट अच्छी लगी तो जन-जागरण के लिए इसे अपने Facebook पर शेयर करें

ऐसी ही और बातों के लिए like करें हमारे पेज Such Khu को।

और ऐसे ही अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी के लिए निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें और गुरूप ज्वाइन करें।

जुडें हमारे फेसबुक ग्रुप से क्लिक करें आयुर्वेदिक देशी नुस्खे।