दिल्ली-मुंबई जैसे महानगर गैस चैम्बर बन चुके है, तो जानिए इनमे बढ़ते प्रदूषण से बचने के आयुवेदिक उपाय

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शहरीकरण हर दिन बढ़ रहा है और इसके साथ बढ़ रहा है वायु प्रदूषण। नई दिल्ली और इसके जैसे तमाम महानगर गैस चैम्बर बन चुके हैं। आम आदमी का सांस लेना मुश्किल है। आमतौर पर हम बढ़ते वायु प्रदूषण को गंभीरता से नहीं लेते लेकिन इसकी चपेट में आकर इलाज में हजारों-लाखों रुपये गंवाने के बाद होश में आते हैं। ऐसे में अगर समय रहते सम्भल जाया जाए तो गैस चैम्बर बने महानगरों में भी हम मामूली उपाय करके खुद को स्वस्थ रख सकते हैं। यह भी सही है कि प्रदूषण से घबराकर हम अपने दैनिक कार्यो को रोक नहीं सकते लेकिन प्रदूषण का स्तर जब खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है तो यह हमारे शरीर पर विपरीत असर दिखाने लगता है।

ऐसे में आयुर्वेद को अपनाकर हम प्राकृतिक उपायों के माध्यम से अपने फेफड़ों को स्वस्थ रख सकते हैं, क्योंकि वायु प्रदूषण का सबसे गम्भीर असर फेफड़ों पर ही पड़ता है।

अगर गौर करें तो हर मिनट 18 सांस की दर से हम दिन में 26 हजार बार सांस लेते हैं। इस दौरान अरबों प्रकार के बारीक कण हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं। इन बातों को ध्यान में रखे हुए हमें अपने फेफड़ों को प्राकृतिक तरीकों से स्वस्थ रखने की जरूरत है।

आयुर्वेद के पास ऐसे उपाय हैं, जो बिना किसी विपरीत प्रभाव के हमारे शरीर को प्रदूषण के खतरों से बचा सकते हैं। और तो और अगर आयुर्वेद को लम्बे समय तक अपनाया जाए तो यह शरीर की मृत कोशिकाओं को भी जिंदा करने लगता है। इस तरह हमारे शरीर को नया जीवन मिलता है। यह चिकित्सा की किसी और पद्धति में संभव नहीं।

क्लिनिकल न्यूट्रीशियन, डाइटिशियन और हील योर बॉडी के संस्थापक डॉ। त्रेहन कहते हैं, “जो लोग भयानक प्रदूषण स्तर वाले दिल्ली, कोलकाता जैसे शहरों में रहते हैं, उनके लिए प्रदूषण संबंधी समस्याएं आम बात हैं। इन शहरों में रहने वाले लोगों को नेचुरोपैथी को अपनाना चाहिए, जिससे शरीर बिना किसी साइड इफेक्ट के स्वस्थ बना रह सकता है।

तो आइये जानते है बढ़ते प्रदूषण से बचने के लिए आयुर्वेदिक घरेलू उपाय

हल्दी

आयुर्वेद और डॉक्टर्स के मुताबिक हल्दी एक नेचुरल एंटी बायोटिक और एंटी बैक्टीरियल होती है, जिसकी वजह से ये आसानी से प्रदूषण के साइड इफेक्ट्स को खत्म करने में सहायक है। अगर सुबह खाली पेट घी या शहद के साथ एक चम्मच हल्दी के पाउडर का सेवन करने से तुरंत लाभ मिलता है।

तुलसी

आमतौर पर हम सभी घरों में तुलसी का पौधा होता है, क्योंकि उसमें बहुत सारे औषधिय गुण पाए जाते हैं। दरअसल तुलसी में प्रदूषण को अवशोषित करने के भी गुण पाएं जाते हैं। जिसकी वजह से रोजाना तुलसी का काढ़ा या तुलसी के रस का सेवन करने से सांस संबधी परेशानी को दूर करने में मदद मिलती है।

नीम

नीम भी हल्दी की तरह ही एक नेचुरल एंटी बैक्टीरियल पौधा होता है। अगर नीम के पत्तों को उबालकर नहाने के पानी में मिलाएं, तो उससे आपके शरीर और बालों में जमा प्रदूषक तत्वों को हटाने में मदद मिलती है। इसके साथ ही अगर आप 2-3 नीम की पत्तियों का सेवन करते हैं तो इससे हमारा खून शुद्ध होता है।

देशी घी का करें सेवन

अगर आप दिल्ली के प्रदूषण से खुद को और अपनों को बचाना चाहते हैं तो उसके लिए रोजाना सुबह या सोते वक्त नाक के दोनों नथुनों में दो बूंद गाय का घी डालें जिससे हानिकारक तत्व आपके फेफड़ों में नहीं पहुंचेंगे। साथ ही घी का रोजाना सेवन करने से लेड और पारे जैसे तत्व आपके लिवर और किडनी में जमा नहीं होते।

अदरक

अक्सर लोग सर्दियों में अदरक का सेवन करते हैं, लेकिन शायद आपको ये नहीं पता होगा कि अदरक हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाती है और ये सांस से जुड़ी हुई समस्याओं में भी बेहद फायदेमंद होता है। ऐसे में अक्सर बाहर जाते समय हमेशा अपने पास अदरक जरूर रखें,पर अदरक का सेवन एक सीमित मात्रा में ही करें, क्योंकि इसके शरीर पर कुछ साइड इफेक्ट भी होते है।

अनार का जूस

अगर आप रोजाना अनार के जूस का सेवन करते हैं तो आप आसानी से दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण के साइड इफेक्ट्स को कम करता है, क्योंकि ये रक्त को शुद्ध करता है साथ ही आपके दिल को भी सुरक्षित रखता है।

त्रिफला का करें सेवन

त्रिफला एक ऐसी आयुर्वेदिक दवा है जो हमारे शरीर के वात, कफ और पित को बैलेंस करने में मदद मिलता है। इसके साथ ही इसका सेवन करने से हमारा इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है। दरअसल प्रदूषण हमारे शरीर के त्रिदोष का बैलेंस बिगाड़ देता है। ऐसे में अगर रात के वक्त शहद के साथ त्रिफला का चूर्ण लेना बेहद फायदेमंद होगा।

भाप लेना(स्टीम)

अगर आप बढ़ते प्रदूषण से ज्यादा परेशानी महसूस कर रहे हैं तो जल्द आराम के लिए रोजाना पांच मिनट के लिए दिन में दो बार गुनगुने पानी में यूकेलिप्टस तेल या पेपरमिंट ऑयल की 5-10 बूंदे डालें और इसकी भाप लें।

पीपली

पीपली एक मसाला होने के साथ ही एक औषधि भी है। पीपली का सेवन करने से फेफड़ें के इंफेक्शन को रोका जा सकता है, जिससे सांस संबधी बीमारियों में भी लाभ मिलता है। अगर रोजाना 1/4 चम्मच सोंठ(अदरक का पाउडर)1/4 चम्मच हल्दी, 1/8 चम्मच पीपली पाउडर को 1 चम्मच शहद के साथ सेवन करने से प्रदूषण के साइड इफेक्ट्स से आसानी से बचा जा सकता है।

मसाज करना

अगर रोजाना गुनगुने औषधीय गुणों वाले तेलों से शरीर की हल्के हाथों से मसाज या मालिश की जाए, तो भी आप प्रदूषण के साइड इफेक्ट्स को कम कर सकते हैं, क्योंकि मसाज करने से हमारे शरीर और मस्तिष्क को फिर से रिचार्ज करने में मदद मिलती है।

कुछ जरूरी सुझाव :

एक्यूआई इंडेक्स 150 से ज्यादा होने पर ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी वाली एक्सरसाइज, क्रिकेट, हॉकी, साइकलिंग, मैराथन से परहेज करें। प्रदूषण स्तर के 200 से ज्यादा होने पर पार्क में भी दौड़ने और टहलने ना जाएं। जब प्रदूषण स्तर 300 से ज्यादा हो तो लंबी दूरी की वॉक ना करें। जब स्तर 400 के पार हो तो घर के अंदर रहें, सामान्य वॉक भी ना करें। घर के भीतर रहें। प्रदूषण स्तर 1000 पर होने पर पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी जैसे हालात होते हैं। इस स्तर पर बिल्कुल भी घर से बाहर ना निकलें, घर पर ही रहें।

घर से बाहर निकलने से पहले चेहरे पर मास्क जरूर लगाएं।

अपने घर और आस-पास की जगहों पर ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं। ये हवा को प्यूरीफाई करने का काम करते हैं। जिससे आप ताजी हवा में सांस ले पाएंगे।

सांसों से शरीर में पहुंचे जहर को बाहर निकालने के लिए पानी बहुत जरूरी है। इसलिए पानी पीना नहीं भूलें। दिन में तकरीबन 4 लीटर तक पानी पिएं। घर से बाहर निकलते वक्त भी पानी पिएं। इससे शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई सही बनी रहेगी और वातावरण में मौजूद जहरीली गैसें अगर ब्लड तक पहुंच भी जाएंगी तो कम नुकसान पहुंचाएंगी।

खाने में जितना हो सके विटामिन-सी, ओमेगा-3 को प्रयोग में लाएं। शहद, लहसुन, अदरक का खाने में ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें। खांसी, जुकाम की स्थिति में शहद और अदरक के रस का सेवन करें।

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