फेफड़ों की सफाई के लिए बहुत फायदेमंद है शलजम, फेफड़ों में जमा बलगम भी होता है दूर

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शलजम एक ऐसी सब्जी है जिसमें नमात्र कैलोरी के अलावा कई तरह के एंटी-ऑक्‍सीडेंट, विटामिन्स, भारी मात्रा में प्रोटीन और मिनरल्स होते हैं। आयुर्वेद में कहा जाता है कि सिर्फ शलजम मात्र को खाने से ही शरीर को वह सभी पोषक तत्व मिल जाते हैं जिसकी उसे जरूरत रहती है। शलजम तुरंत एनर्जी देने के साथ ही इम्‍यूनिटी को बढ़ाता है।

यदि आप रात में शलजम का सेवन करते हैं तो हानिकारक फ्री रेडिकल्‍स से छुटकारा मिलता है। अगर फेफड़ों की बात करें तो शलजम खाने से फेफड़े दुरुस्त होते हैं और शरीर की सारी गंदगी भी साफ होती है। शलजम की सब्जी किसी भी बीमारी का रोगी बेझिझक खा सकता है। यकीन मानिए शलजम के सेवन से फेफड़ों की गंदगी के साथ ही फेफड़ों की सूजन और बलगम की समस्या भी दूर होती है।

फेफड़ों के लिए शलजम :-

फेफड़ों के लिए शलजम का सेवन बहुत फायदेमंद है। सिर्फ शलगम का फल ही नहीं बल्कि इसकी जड़े भी बहुत फायदेमंद होती हैं। शलजम की जड़ों में कई गुना मिनरल और विटामिन होते हैं। यह विटामिन ए, विटामिन सी, कैरोटीनॉयड और ल्‍यूटीन जैसे एंटीऑक्सीडेंट का समृद्ध स्रोत है। इसके अलावा, इसके पत्ते विटामिन ‘के’ के बहुत अच्छे स्रोत हैं।

साथ ही यह कैल्शियम, कॉपर, आयरन और मैंगनीज जैसे महत्वपूर्ण मिनरल के भी बेहतरीन स्रोत हैं।सिगरेट के धुएं में पाया जाने वाला कार्सिनोजेन्‍स शरीर में विटामिन ‘ए’ की कमी के कारण नुकसान पहुंचाता है। जिसके परिणामस्‍वरूप फेफड़ों की सूजन, एम्फीसेमा (वातस्फीति) और अन्‍य फेफड़े की समस्याएं हो सकती है। शलजम में निहित विटामिन ‘ए’ इस कमी को दूर करके फेफड़ों को स्‍वस्‍थ बनाए रखने में मदद करता है।

शलजम के अन्य लाभ :-

1-शलजम में मौजूद उच्‍च मात्रा में फाइबर शरीर की पाचन प्रणाली का समर्थन करता है। एक शोध के अनुसार, इसमें मौजूद  ग्लूकोसाइनोलेट्स, हेलिकोबेक्टर बैक्‍टीरिया की तरह पेट प्रक्रिया की मदद करता है।

2-शलजम में एंटीऑक्सिडेंट और फाइटोकेमिकल्स के उच्‍च स्‍तर के कारण यह कैंसर के खतरे को कम करने में मदद करता है। ग्लूकोसाइनोलेट्स की उपस्थिति के कारण यह कैंसर के प्रभाव को कम करने में मदद करता है। अपने दैनिक आहार में इस सब्जी का समावेश कर स्तन कैंसर के जोखिम के साथ-साथ मलाशय और ट्यूमर को भी कम कर सकते हैं।

3-शलजम में मौजूद विटामिन ‘ए’ के कारण यह एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होता है। यह गुण हार्ट अटैक, हार्ट स्‍ट्रोक और अन्‍य हृदय रोगों को रोकने में मदद करता है। शलजम फोलेट का भी एक बेहतरीन स्रोत है जो हृदय प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद करता है।

4-कैल्शियम और पोटेशियम का एक महत्वपूर्ण स्रोत होने के कारण शलजम स्वस्थ हड्डियों के विकास और रखरखाव के लिए महत्वपूर्ण होता हैं। शलजम का सेवन नियमित रूप से करने से हड्डियों के टूटने, ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे और रुमेटी गठिया की समस्‍याओं को रोका जा सकता है।

5-शलजम की रोगनाशक शक्ति कई प्रकार की आम बीमारियों जैसे भूख कम लगाना या बवासीर को दूर करने में फायदेमंद होती है। नियमित रूप से शलजम का उपयोग करने से किडनी की पत्‍थरी का इलाज आसानी से हो सकता है।

6-शलजम में कम कैलोरी के कारण इसका इस्‍तेमाल प्रभावी ढ़ग से वजन घटाने के कार्यक्रम के रूप में कर सकते हैं। दूसरी तरफ इसमें मौजूद उच्‍च फाइबर चयापचय में सुधार कर शरीर के वजन को नियंत्रित करता है और पेट से जुड़ी परेशनियों को दूर करता है।

7-शलजम में मौजूद विटामिन सी एक शक्तिशाली एंटीऑक्‍सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण यह अस्थमा के इलाज और इसके लक्षणों को रोकने में प्रभावी ढ़ग से काम करता हैं। एक नए शोध से भी यह बात स‍ाबित हुई है कि दमा रोगियों को शलजम देने से उनके सीने से आने वाली घरघराहट की आवाज को कम किया जा सकता है।

8-गर्मियों के महीनों में शरीर से गंध आना एक आम समस्‍या है। शलजम का रस शरीर की गंध से छुटकारा दिलाने में काफी फायदेमंद होता है। आमतौर पर शलजम का रस पीना स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्‍छा होता है और शरीर की गंध से बचाने में भी मदद करता है।

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