गैस, घबराहट, छाती में जलन से हैं परेशान तो यह है इसका अचूक समाधान

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लगातार बैठ कर काम करने और खान-पान सावधानी नहीं रखने के कारण गैस की समस्या आज आम हो गई है। इस रोग में डकारें आना, पेट में गैस भरने से बेचैनी, घबराहट, छाती में जलन, पेट में गुड़गुडाहट, पेट व पीठ में हलका दर्द, सिर में भारीपन, आलस्य व थकावट तथा नाड़ी दुर्बलता जैस लक्षण देखने को मिलते हैं। कभी-कभी भूख नहीं लगने पर भी कुछ न कुछ खाने की बेवजह आदतों से भी पेट में एसिडिटी बनने लगती है।

आजकल की व्यस्ततम जिंदगी के चलते हुए सेहत और इम्यून सिस्टम का ध्यान रखना इतना आसान काम नहीं हैं। लोगों को अपने इम्यून सिस्टम की खराबी के चलते कई रोजमर्रा की कई बिमारियों से रूबरू होना पड़ता हैं। जिसमें से एक हैं गैस प्रॉब्लम की वजह से सीने में उठने वाला दर्द।

अपूर्ण पाचन, जल्दी जल्दी खाना खाते समय खाने के साथ हवा निगलने, कब्ज़, तैलीय और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ खाने, अधिक फाइबर और स्टार्च युक्त आहार लेने, खाद्य पदार्थों की एलर्जी आदि के कारण आँतों में गैस बन सकती है। जिससे सीने में दर्द होता हैं।

क्या होता है इस रोग में :-

इस रोग में डकारें आना, पेट में गैस भरने से बेचैनी, घबराहट, छाती में जलन, पेट में गुड़गुडाहट, पेट व पीठ में हलका दर्द, सिर में भारीपन, आलस्य व थकावट तथा नाड़ी दुर्बलता जैस लक्षण देखने को मिलते हैं। इसका प्रमुख कारण असंयमित तथा अनियमित जीवनशैली, आरामतलबी, धूम्रपान, मानसिक तनाव, चिंता व शोक में डूबे रहना आदि हैं। इस परेशानी से बचने के लिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ घरेलू उपाय। आइये जानते हैं उन उपायों के बारे में।

धनिया :-

गर्मी के कारण, बासी भोजन करने, खट्टी डकारें आने, अम्लपित्त बनने के कारण रोगी की छाती में जलन होती है। जलन के कारण रोगी बड़ी बेचैनी महसूस करता है, अधिक घबराया रहता है और उसे ऐसा महसूस होता है जैसे उसका हृदय बैठा जा रहा है। ऐसी अवस्था में रोगी को 5 ग्राम सूखा धनिया, 2 ग्राम कालानमक, 1 ग्राम हींग और 5 ग्राम अजवायन को मिलाकर चूर्ण बनाकर दिन में 3-4 बार सेवन करना चाहिए। इससे छाती की जलन दूर होती है।

अदरक :-

अदरक के कई औषधीय गुण हैं। अगर आपको गैस या एसीडिटी से हार्टबर्न हो रहा है, छाती में दर्द हो रहा हो तो अदऱक की चाय आजमा सकते हैं। यह छाती के दर्द के साथ , कफ, खांसी समेत कई बिमारियों के इलाज में काम आता है।

पेपरमिंट टी :-

यह भी वातहर की तरह काम करता है क्योंकि यह पेट से गैस निकालने में सहायक होता है। यह भोजन के पाचन में भी सहायक होता है। यह जी मचलाने और उल्टी के लिए भी एक प्रभावी उपचार है। छाती में फंसी हुई गैस को निकालने के लिए पेपरमिंट टी एक प्राकृतिक उपाय है।

तुलसी :-

तुलसी में सिर्फ एंटी बैक्टीरियल गुण ही नहीं बल्कि एंटी इंफ्लामेट्री गुण भी होते हैं। इसके अलावा तुलसी में ऐसे कई कंपाउड पाए जाते हैं जो दिल के सेहत के लिए भी गुणकारी है। तुलसी में Eugenol पाया जाता है जो दिल के सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। तुलसी के पत्ते लोग चबा कर खाते हैं और कई लोग चाय और काढ़ा बना कर पीते हैं। अगर छाती में दर्द है तो तुलसी-अदरक का काढ़ा बना कर उसमें शहद की बूंदे डाल कर पी लीजिए काफी फायदा करेगा।

आसन के द्वारा इलाज :-

गैस की समस्या से निपटने में महत्वपूर्ण आसन हैं- पवनमुक्तासन, शशांकासन, भुजंगासन, धनुरासन, मरकटासन, सर्वागासन, व्याघ्रासन, बज्रासन, सुप्त बज्रासन आदि। यदि पवनमुक्तासन की पांच से दस आवृत्तियों का प्रतिदिन अभ्यास किया जाए तो इस समस्या से पूरी तरह मुक्ति पाने में मदद मिलती है।

पवनमुक्तासन की अभ्यास विधि :-

पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं। दाएं पैर को घुटने से मोड़ें। इस घुटने को दोनों हाथों से पकड़ कर छाती की ओर लाएं। इसके बाद सिर को जमीन से ऊपर उठा कर प्रयास करें कि नाक घुटने को स्पर्श करे, किन्तु किसी भी प्रकार की अधिकता न करें।

इस स्थिति में आरामदायक अवधि तक रुक कर वापस पूर्व स्थिति में आएं। यही क्रिया दूसरे पैर से भी करें। इसके बाद इस क्रिया को दोनों पैरों से एक साथ करें। यह पवनमुक्तासन की एक आवृत्ति है। इसके बाद तीन-चार चक्रों का अभ्यास प्रारंभ में करें। इसके बाद इसे बढ़ा कर 10 चक्रों तक ले जाएं।

धनुरासन भी है जरूरी :-

पवनमुक्तासन के अभ्यास के बाद धनुरासन का अभ्यास अवश्य करें। इसमें पेट के बल जमीन पर लेट कर दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ लें। दोनों पैरों के पंजों को हाथों से पकड़ कर घुटने, जांघों, सिर एवं छाती को जमीन से ऊपर उठाएं। इस स्थिति में आरामदायक समय तक रुक कर वापस पूर्व स्थिति में आएं। यह धनुरासन है।

कैसा हो आहार :-

भूख लगने पर ही सादा, सुपाच्य व प्राकृतिक भोजन करें। मूली, बथुआ, करेला, मेथी, अदरक, नींबू, पालक, आंवला, टिंडा, हरा धनिया अधिक सेवन करें। आलू, मटर, गोभी, अरबी, सेम, चना, उड़द, गरिष्ठ एवं तली-भुनी चीजों का सेवन कम से कम करें।

अन्य उपाय :-

प्रतिदिन कोई न कोई व्यायाम करने की आदत बनाएं। सैर करना या तैरना सरल व्यायाम है।

भोजन के साथ अधिक मात्रा में पानी न पिएं। भोजन जल्दी-जल्दी बिना चबाये न निगलें।

सुबह-शाम के भोजन के बाद छोटी हरड़ मुंह में डाल कर चूसें।

आधा चम्मच अजवाइन में चुटकी भर काला नमक मिला कर भोजन के बाद चबाएं और गुनगुना पानी पिएं।

प्रतिदिन रात्रि में जल्दी सोकर पूरी नींद लें। प्रतिदिन ध्यान का अभ्यास करें।

जरूरत महसूस हो तो किसी डॉक्टर से मिलने से न हिचकें।

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