जानिए कैसे एक एकड़ से कमा रहे तीन लाख रुपये, आठ फसलें उगाकर

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हरियाणा के फरीदाबाद जिले के मानव रचना विश्वविद्यालय से बीटेक (सिविल इंजीनियरिंग) करने वाले मनजीत ने खेती की राह चुनी। उन्होंने इस धारणा को गलत साबित किया है कि युवा खेती में नवोन्मेषक की भूमिका में नहीं निभा सकते। इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भविष्य की संभावनाएं तलाशने के बजाय मनजीत ने मल्टीपल ऑर्गेनिक क्रापिंग पद्धति से खेती शुरू की और एक एकड़ में बेड सिस्टम से आठ फसलें उगाईं।

इन आठ फसलों में अमेरिकी केसर सबसे ज्यादा कामयाब साबित हुई है। एक एकड़ भूमि पर ढाई से तीन किलो अमेरिकी केसर का उत्पादन मनजीत ने किया है। मनजीत ने सभी फसलों में बीमारियों का निदान भी रासायनिक दवाओं से नहीं, बल्कि गोबर और अन्य अपशिष्ट पदार्थों से किया।

मनजीत का कहना है कि साल भर इसी तरीके से खेती कर एक एकड़ से औसतन करीब तीन लाख रुपये की आय की जा सकती है। मनजीत के अनुसार, एक एकड़ में अमेरिकन केसर की फसल औसतन ढाई से तीन किलो पैदा होती है।

यह दिल्ली के बाजार में 50 से 70 हजार रुपये किलो के हिसाब से बिकती है। इसके अलावा अभी गन्ने की फसल खड़ी है, जो कमाई में इजाफा कर देगी। मनजीत का कहना है कि अब आने वाले समय में इसी एक एकड़ में वह दालें भी उगाएंगे, इससे मुनाफा और बढ़ेगा।

यह मनजीत का आत्मविश्वास ही था कि उसने चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से एमबीए (एग्रीकल्चर) करने के बाद निजी कंपनियों के लिए काम करना ठीक नहीं समझा। वह नहीं चाहता था कि किसानों को घातक और जहरीले कीटनाशक बेचे। इसी पर फोकस करते हुए उसने परिवार को विश्वास में लेकर एक एकड़ में ऑर्गेनिक खेती शुरू कर दी।

नजीत ने बताया कि एमबीए के दौरान विभिन्न प्रकार से फसलों की तकनीक सिखाई गई थीं। मुझे बचपन से ही खेती का शौक रहा है। एमबीए करते हुए ही मन बना लिया था कि सिखाई हुई तकनीक का प्रयोग अपने खेतों में करूंगा और अन्य किसानों को प्रेरित करूंगा।

अब खेती का रकबा बढ़ाकर किसानों को साथ खड़ा करूंगा। तभी मेरी पढ़ाई का लक्ष्य पूरा होगा। मनजीत ने बताया कि बेड सिस्टम के आधार पर गन्ना उगाया जाता है। ऐसे में गन्ने के साथ कई फसलों को उगाकर अच्छी पैदावार की जा सकती है। मैं एक एकड़ में पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर सात अन्य फसलों को उगाया।

एक एकड़ में गन्ने के बेड के साथ साथ अमेरिकी केसर, सरसों, लहसुन, धनिया, मेथी , चना और गेहूं की फसल उगाई। बेड सिस्टम में गन्ने को पानी देने के दौरान नमी से ही अन्य फसलों को पानी की मांग खत्म हो जाती है। सितंबर से लेकर मार्च तक गन्ना विकसित होता है, तब तक सभी फसलें तैयार हो जाती हैं। इन फसलों की कटाई के बाद हल्दी की फसल भी किसान गन्ने की फसल के साथ लगा लाभ कमा सकते हैं।

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