आप कभी बीमार नहीं होंगे, अगर अपनाएगें ये चार नियम

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भागदौड़ भरी ज़िंदगी में आप अपने लिए कुछ पल निकालने में कंजूसी करते है. यही कंजूसी आपकी सेहत के साथ खिलवाड़ करने में जरा सा भी नहीं सोचती |अगर आप थोड़ा समय निकाल कर इन सात बातों  पर माइंड मेकअप करते है,तो हमेशा स्वस्थ रह सकते हैं |अच्छे स्वास्थ्य के लिए आपका खाना या भोजन प्रमुख भूमिका निभाता है |

अगर आपका खाना अच्छा और पौष्टिक होगा तो वह आपकी सेहत को भी अच्छा बनाएगा वही अगर आप अपने भोजन के प्रति लापरवाही बरतते है या पौष्टिक भोजन नहीं लेते है तो यह आपके स्वास्थ्य को बीमार बना देगा | आपको कौन सी चीज खानी चाहिए तथा किन चीजो से आपको परहेज करना चाहिए यह बात आपको अपने शरीर की मांग  के हिसाब से पता होनी चाहिए|

अगर आप इन नियमों पालन करे तो जिंदगी भर निरोगी रह सकते है | जिससे आने वाले स्वास्थ्य के दुस्प्र्भावों से बचा जा सकता है |

आइये जानें वो चार :

पहला नियम:- पहला सूत्र ये है कि सुबह उठते ही सबसे पहले पानी पीना है. आपके दिन की शुरुआत पानी से करे | चाय से नही, कॉफ़ी से नही, दिन शुरू होना चाहिए पानी के साथ | और पिने का तरीका आपको पिछले पोस्ट में बताया गया था, पानी हमेस बैठकर और सिप सिप करके पीना चाहिए | जैसे चाय पीते है या गर्म दूध पीते है वैसे ही, धीरे धीरे पानी पीना चाहिए | और पिछले पोस्ट में आपको ये भी बताया था कि आपके लिए सबसे अच्छा मिटटी के घड़े का पानी है |

दूसरा नियम:- दूसरा सूत्र ये था कि आप जब भी पानी पिएंगे तो एक दम नहीं पिएंगे, पानी को घुट घुट करके पिएंगे | जिससे की आपके मुह की लार पेट में जाए | मुंह की लार क्षारीय होती है, और हमारे पेट में एसिड होता है जो अम्लीय होता है | दोनों जब मिले तो न्यूट्रल हो जाता है | यही सबसे आदर्श स्थिति है | अगर आपका शरीर न्यूट्रल रहता है तो आपको कोई बीमारी नहीं आयेगी | इसलिए पानी जब भी पियेंगे सिप-सिप करके पिए, थोडा थोडा घूंट घूंट करके पानी पीना है |

तीसरा नियम:- तीसरा सूत्र था कि आपको जिंदगी में कभी भी ठंडा पानी नही पीना है | आप आप कहेंगे ठंडे पानी से मतलब क्या है | तो जवाब ये है कि फ्रिज में रखा पानी या बर्फ डाला हुआ पानी | ये कभी भी नही पीना है | आब आप कहेगे क्यों ? आप मुझे ये बताओ अगर आपका शरीर ठंडा हो जाये तो इसका मतलब क्या है, इसका सीधा सा मतलब है कि आप मर जायंगे, फिर क्यूँ ठंडा पानी पीना चाहते है | ये ठंडा पानी शरीर के अनुकूल नही है |

अब मै आपका समझाता हूँ | आप जैसे ही ठंडा पानी पीते है, शरीर ठंडा ना हो इसके लिए हमारा पेट उस ठन्डे पानी को गर्म करता है | आप कितना भी ठंडा पानी पियेंगे, पेट उसको गर्म करेगा और पानी को गर्म करने के लिए उर्जा लगती है और वो उर्जा है आपका रक्त (खून) |

अगर ज्यादा ठंडा पानी पियेंगे तो पेट उस पानी को गर्म करने के लिए सारे शरीर से थोडा थोडा रक्त खिचेगा, और जब तक वो पानी गर्म नहीं होता उतनी देर के लिए बाकि सब अंगो को खून की कमी होने लगेगी | और अगर शरीर के अंगो को ये रक्त की कमी नियमित आने लगी तो ये अंग खराब हो जायंगे, तो आपको कभी भी हार्ट अटैक आ सकता है, किडनी फ़ैल हो सकती है, लीवर डैमेज हो सकता है, आप के शरीर के किसी भी अंग का कबाड़ा निकल सकता है |

चौथा नियम:- चौथा सूत्र ये था कि “भोजनान्ते विषमभारी” अर्थात भोजन के अंत मे पानी बिलकुल नही पीना है, डेढ़ घन्टे के बाद ही पानी पीना है | भोजन के बाद अगर कुछ पीना है तो जूस या छांछ या दूध | सुबह भोजन के बा जूस पीना है, दोपहर को  छांछ या लस्सी पीनी है, और रात को दूध पीना है |

अधिक जानकारी के लिए ये विडियो देखे :-

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