जानिए सर्दियों के मौसम की बिमारियों से खुद को कैसे रखे दूर

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सर्दियों का मौसम आपको कई बीमारियों के करीब पहुंचा सकता है। अनेक बीमारियां इस मौसम में हमारे आसपास मंडराती रहती हैं। इनसे आप खुद को कैसे बचाए रख सकते हैं,

सर्दियों के मौसम की बिमारियों के मुख्य कारण-

1.अधिक ठन्डे भोज्य पदार्थों का सेवन।

2.पैरों में बिना जूते पहन के घूमना।

3.कुछ गरम खाने के तुरंत बाद ही कुछ ठंडा खा लेना।

4.वायरल इन्फेक्शन।

5.सर्दी से ग्रसित अन्य व्यक्तियों के संपर्क में रहना।

6.आसपास की किसी वस्तु से ऐलर्जी हो जाना।

7.आहार विहार में लापरवाही।

8.बहुत अधिक थकान।

सर्दी, जुकाम, बुखार, त्वचा आदि समस्याएं सर्दियों के मौसम में आम होती हैं। जो लोग समय पर इन बातों का ध्यान रखते हैं और मौसम के अनुरूप अपना खयाल रखते हैं, उन्हें तो सर्दी की ये बीमारियां छू भी नहीं पातीं, लेकिन जो लोग बदलते मौसम में शरीर की जरूरतों का बिल्कुल ध्यान नहीं रखते, उन्हें कई बीमारियां अपनी चपेट में लेने को आतुर रहती हैं। ऐसे में क्यों न सावधानी बरतकर स्वस्थ रहा जाए।

सर्दी-जुकाम

इसे कॉमन कोल्ड भी कहते हैं, जो तापमान में परिवर्तन के कारण होता है। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उन्हें यह जल्दी पकड़ता है। संक्रमण वाली इस बीमारी के वारयस से बचने के लिए साफ-सफाई का खास ध्यान रखना होता है। बार-बार हाथ को साबुन से धोते रहना चाहिए, ताकि संक्रमण से बचे रह सकें। यह वायरल इंफेक्शन है, इस कारण इसमें एंटीबायटिक की जरूरत नहीं होती और यह 5 से 7 दिन में खुद ही ठीक हो जाता है। इसमें एंटी एलर्जिक दवा दी जाती है, ताकि मरीज को आराम मिले। इसमें भाप, नमक के पानी के गरारे आदि काफी लाभदायक हैं। इसमें गर्म तरल पदार्थ का ज्यादा प्रयोग करना चाहिए। तुरंत गर्म से ठंडे में और ठंडे से गर्म में न जाएं, अन्यथा इससे इस संक्रमण की गिरफ्त में आ सकते हैं।

हाइपोथर्मिया

सर्दियों में अगर शरीर का ताप 34-35 डिग्री से नीचे चला जाए तो उसे हाइपोथर्मिया कहते हैं। इसमें हाथ-पैर ठंडे हो जाते हैं, सांस लेने में तकलीफ होती है। हार्ट बीट बढम् जाती है, बीपी कम हो जाता है। अगर शरीर का तापमान कम हो जाए तो मृत्यु भी हो सकती है। तेज ठंड का सामना न करें।

टॉन्सिलाइटिस

बच्चों में पाई जाने वाली यह आम समस्या भी टॉन्सिल में संक्रमण के कारण होती है। गले में काफी दर्द होता है। खाना खाने में दिक्कत होती है, तेज बुखार भी हो सकता है। यह बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण से हो सकता है।  इससे बचे रहने के लिए इस मौसम में ठंडी चीजों का प्रयोग करने से बचें। गर्म भोजन और गुनगुने पानी का प्रयोग करें।

अस्थमा

यह एक एलर्जिक बीमारी है। जिन लोगों को यह बीमारी होती है, इस मौसम में उनकी तकलीफ बढ़ जाती है। सर्दियों में कोहरा बढ़ जाता है। एलर्जी के तत्व इस मौसम में कोहरे की वजह से आसपास ही रहते हैं, हवा में उड़ते नहीं हैं। इन तत्वों से अस्थमा के रोगियों को अधिक तकलीफ होती है। इस कारण इस मौसम में ऐसे लोगों के लिए धूल-मिट्टी से बचना बहुत जरूरी है। दवा खा रहे हैं तो उसे नियमित रूप से लें। कोई दवा चूकें नहीं, क्योंकि ऐसे में एलर्जेट अटैक कर सकते हैं।

हृदय रोग

सर्दी में तापमान कम होने के कारण शरीर की नसें सिकुड़ने लगती हैं जिससे हृदय रोगियों को हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। नसें सिकुड़ने से ब्लड सर्कुलेशन में होने वाले बोझ का भार सीधा हार्ट पर पड़ता है जिस कारण अटैक की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे रोगियों को हम सलाह देते हैं कि आप डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवा और चेतावनियों का पालन करें। खाने पीने में तेल, घी, नमक बहुत ही कम हो। बीड़ी, सिगरेट आदि नशा न करें। तली-भुनी चीजें न खाएं। कार्डियोलोजिस्ट द्वारा निर्धारित व्यायाम करें। सर्दी के बचाव उपाय करने के बाद ही ठंड में निकलें। ठंडे पानी के स्थान पर गुनगुने पानी का उपयोग करें और इसी से नहाएं।

बेल्स पाल्सी

इसे फेसियल पेरालिसिस कहते हैं। यह सर्दियों में बड़ा सामान्य है। इसमें मुंह टेड़ा हो सकता है, आंख खराब हो सकती है। कान के पास से सेवेंथ क्रेनियल नस गुजरती है, जो तेज ठंड होने पर सिकुड़ जाती है। इसकी वजह से यह बीमारी होती है। इसमें मुंह टेड़ा हो जाता है, मुंह से झाग निकलने लगता है, बोलने में जबान लड़खड़ाने लगती है और आंख से पानी आने लगता है। अगर आप लंबे समय तक ठंड में हैं तो कान की उस नस को नुकसान हो सकता है। खासकर ड्राइविंग करने वालों, रात में बिना सिर को ढके कहीं जाने वालों में इसका खतरा बढ़ जाता है, इसलिए मफलर का प्रयोग करें, गाड़ी के शीशे बंद रखें।

डायबिटीज़

ठण्ड में सब लोग अधिक भोजन करते हैं। भोजन पचता भी जल्द है इसलिए लोग डटकर खाते हैं। इससे रक्त में शुगर का लेवल बढ़ता है। इसलिए मधुमेह के मरीज अनुशासित मात्रा में खाएं। व्यायाम ज़रूर करें और निर्धारित दवा का सेवन करें।

रूखी त्वचा

सर्दियों में अधिक कपड़े पहनने से शरीर को मॉइश्चर नहीं मिलता, जिससे त्वचा ड्राइ हो जाती है। इससे वे फटने लगती हैं। त्वचा को ड्राइ होने से बचाने के लिए मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं। त्वचा को ड्राइनेस से बचाने के लिए मलाई या तेल का भी प्रयोग कर सकते हैं। होठों में भी यह समस्या आती है, इस मौसम में। इसके लिए घरेलू दवाएं या अपने डॉक्टर से सलाह लेकर दवा ले सकते हैं।

वजन बड़ना

खानपान की अधिकता के कारण इस मौसम में वजन एवं मोटापा बढ़ता है। इससे बचने के लिए सीमित मात्रा में खाएं। खाना ज़्यादा देर तक चबा कर ही निगलें। ऐसा करने से आपको भूख कम लगेगी। हर रोज़ व्यायाम अवश्य करें, रोज 3-4 किलोमीटर चलें व तनावमुक्त  रहें।

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