जानिए सुबह खाली पेट भीगे हुए चने खाने के 70 फायदे और इस्तेमाल की विधि

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आयुर्वेद में चने की दाल और चने को शरीर के लिए स्वास्थवर्धक बताया गया है। चने के सेवने से कई रोग ठीक हो जाते हैं। क्योंकि इसमें प्रोटीन, नमी, कार्बोहाइड्रेट, आयरन, कैल्शियम और विटामिन्स पाये जाते हैं। चना दूसरी दालों के मुकाबले सस्ता होता है और सेहत के लिए भी यह दूसरी दालों से पौष्टिक आहार है। चना शरीर को बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनाता है। साथ ही यह दिमाग को तेज और चेहरे को सुंदर बनाता है। चने के सबसे अधिक फायदे इन्हे अंकुरित करके खाने से होते है। चना शरीर में ताकत लाने वाला और भोजन में रुचि पैदा करने वाला होता है।

इसको पानी में भिगोकर चबाने से शरीर में ताकत आती है। इसके लिए 125 ग्राम देशी काले चने लेकर अच्छी तरह से साफ कर लें। मोटे पुष्ट चने को लेकर साफ-सुथरे, कीडे़ या डंक लगे व टूटे चने निकालकर फेंक देते हैं। शाम के समय इन चनों को लगभग 125 ग्राम पानी में भिगोकर रख देते हैं।

जिसकी पाचक शक्ति (भोजन पचाने की शक्ति) कमजोर हो, या चना खाने से पेट में गैस होता है तो उन्हें चने का सेवन नहीं करना चाहिए।

चना न्यूट्रिएंट्स के मामले में बादाम से ज्यादा फायदेमंद होता है। आयुर्वेद में चने की दाल और चने को शरीर के लिए बेहद स्वास्थवर्धक बताया गया है। चने के सेवन से कई बीमारियां दूर हो जाती हैं। भीगे हुए चने में प्रोटीन, फाइबर, मिनरल और विटामिन्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो कई बीमारियों से बचाने के साथ-साथ हेल्दी रहने में भी हमारी मदद करते हैं। वैसे तो हर इंसान के लिए चने खाने के अपने अलग ही फायदे हैं, लेकिन खासकर मर्दों को तो ये जरूर खाने चाहिये। क्योंकि चना शरीर को बीमारियों से लड़ने में काफी सक्षम बनाता है।

चने अंकुरित करने की विधि :

अंकुरित करने के लिए चने को अच्छी तरह पानी में साफ करके इतने पानी में भिगोएं कि उतना पानी चना सोख ले। इसे सुबह के समय पानी में भिगो दो और रात में साफ, मोटे, गीले कपडे़ या उसकी थैली में बांधकर लटका देते हैं। गर्मी में 12 घंटे और सर्दी के मौसम में 18 से 24 घंटों के बाद भिगोकर गीले कपड़ों में बांधने से दूसरे, तीसरे दिन उसमें अंकुर निकल आते हैं। गर्मी में थैली में आवश्यकतानुसार पानी छिड़कते रहना चाहिए। इस प्रकार चने अंकुरित हो जाएंगे। अंकुरित चनों का नाश्ता एक उत्तम टॉनिक है। अंकुरित चनों में कुछ व्यक्ति स्वाद के लिए कालीमिर्च , सेंधानमक, अदरक की कुछ कतरन एवं नींबू के रस की कुछ बून्दे भी मिलाते हैं परन्तु यदि अंकुरित चने को बिना किसी मिलावट के साथ खाएं तो यह बहुत अधिक उत्तम होता है।

आइये जानते है चने खाने के 70 अद्भुत फायदे :

शरीर को कोई बीमारी नहीं लगती : शरीर को सबसे ज्यादा पोषण काले चनों से मिलता है। काले चने अंकुरित होने चाहिए। क्योंकि इन अंकुरित चनों में सारे विटामिन्स और क्लोरोफिल के साथ फास्फोरस आदि मिनरल्स होते हैं जिन्हें खाने से शरीर को कोई बीमारी नहीं लगती है। काले चनों को रातभर भिगोकर रख लें और हर दिन सुबह दो मुट्ठी खाएं। कुछ ही दिनों में र्फक दिखने लगेगा।

वजन कम करना : अगर आपको अपना वजन कम करना है तो रोज़ाना सुबह उठकर खाली पेट भीगे हुए चने खाने से आपका वजन जल्द ही कम होने लगेगा।

कब्ज और पेट दर्द : रातभर भिगे हुए चनों से पानी को अलग कर उसमें अदरक, जीरा और नमक को मिक्स कर खाने से कब्ज और पेट दर्द से राहत मिलती है।

शरीर की ताकत : शरीर की ताकत बढ़ाने के लिए अंकुरित चनों में नींबू, अदरक के टुकड़े, हल्का नमक और काली मिर्च डालकर सुबह नाश्ते में खाएं। आपको पूरे दिन की एनर्जी मिलेगी।

चने का सत्तू : चने का सत्तू भी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद औषघि है। शरीर की क्षमता और ताकत को बढ़ाने के लिए गर्मीयों में आप चने के सत्तू में नींबू और नमक मिलकार पी सकते हैं। यह भूख को भी शांत रखता है।

पथरी की समस्या में चना : पथरी की समस्या अब आम हो गई है। दूषित पानी और दूषित खाना खाने से पथरी की समस्या बढ़ रही है। गाल ब्लैडर और किड़नी में पथरी की समस्या सबसे अधिक हो रही है। एैसे में रातभर भिगोए चनों में थोड़ा शहद मिलाकर रोज सेवन करें। नियमित इन चनों का सेवन करने से पथरी आसानी से निकल जाती है। इसके अलावा आप आटे और चने का सत्तू को मिलाकर बनी रोटियां भी खा सकते हो।

शरीर की गंदगी साफ करना : काला चना शरीर के अंदर की गंदगी को अच्छे से साफ करता है। जिससे डायबिटीज, एनीमिया आदि की परेशानियां दूर होती हैं। और यह बुखार आदि में भी राहत देता है।

डायबिटीज के मरीजों के लिए : चना ताकतवर होता है। यह शरीर में ज्यादा मात्रा में ग्लूकोज को कम करता है जिससे डायबिटीज के मरीजों को फायदा मिलता है। इसलिए अंकुरित चनों को सेवन डायबिटीज के रोगियों को सुबह-सुबह करना चाहिए।

मूत्र संबंधी रोग : मूत्र से संबंधित किसी भी रोग में भुने हुए चनों का सवेन करना चाहिए। इससे बार-बार पेशाब आने की दिक्कत दूर होती है। भुने हुए चनों में गुड मिलाकर खाने से यूरीन की किसी भी तरह समस्या में राहत मिलती है।

पुरूषों की कमजोरी दूर करना : अधिक काम और तनाव की वजह से पुरूषों में कमजोरी होने लगती है। एैसे में अंकुरित चना किसी वरदान से कम नहीं है। पुरूषों को अंकुरित चनों को चबा-चबाकर खाने से कई फायदे मिलते हैं। इससे पुरूषों की कमजोरी दूर होती है। भीगे हुए चनों के पानी के साथ शहद मिलाकर पीने से पौरूषत्व बढ़ता है। और कमजोरी दूर होती है।

पीलिया के रोग में : पीलिया की बीमारी में चने की 100 ग्राम दाल में दो गिलास पानी डालकर अच्छे से चनों को कुछ घंटों के लिए भिगो लें और दाल से पानी को अलग कर लें अब उस दाल में 100 ग्राम गुड़ मिलाकर 4 से 5 दिन तक रोगी को देते रहें। पीलिया से लाभ जरूरी मिलेगा। पीलिया रोग में रोगी को चने की दाल का सेवन करना चाहिए।

मुंह का सौंदर्य : चना के बेसन में नमक मिलाकर अच्छी तरह गौन्दकर लेप बना लें। इस लेप को चेहरे पर मलने से त्वचा में झुर्रियां नहीं आती हैं और चेहरा सुन्दर रहता है।

प्रदर रोग : भठ्ठी पर भूने हुऐ चने के छिलके उतारकर उसे पीसकर चूर्ण बना लें। उसमें बराबर की मात्रा में मिश्री का चूर्ण मिलाकर 6-6 ग्राम की मात्रा में ठंडे पानी के साथ सेवन करने से प्रदर में रोग लाभ मिलता है। चने के सत्तू में मिश्री डालकर गाय के दूध के साथ सेवन करने से ‘शवेत प्रदर में लाभ होता है।

मोच : मोच के स्थान पर चने बांधकर उन्हें पानी से भिगोते रहें-जैसे-जैसे चने फूलेंगे मोच अपने आप ही दूर हो जायेगी।

अम्लपित्त : काले चनों और कालीमिर्च को मिलाकर पीसकर चटनी की तरह सेवन करने से अम्लपित्त शांत हो जाती है।चने की सब्जी खाने से गले की जलन कम हो जाती है।

दर्द व सूजन : कमर, हाथ, पैर या कहीं भी दर्द हो वहां बेसन डालकर रोजाना मालिश करें। इस तरह मालिश करने से दर्द और सूजन ठीक हो जाती है।

शीतपित्त : चने से बने मोतिया लड्डुओं पर कालीमिर्च डालकर खाने से पित्ती ठीक हो जाती है।

ट्यूमर : चने का आटा गूगल में मिलाकर, टिकिया बनाकर गिल्टी (ट्यूमर) पर रखें। इससे गिल्टी (ट्यूमर) की सूजन दूर होती है।

सभी प्रकार के दर्द होने पर : भुने हुऐ चनों को खाने से `अन्नद्रव शूल´ यानी अनाज के कारण होने वाला दर्द ठीक हो जाता है।

चेहरे की झांई के लिए : 2 बड़े चम्मच चने की दाल को आधा कप दूध में रात को भिगोकर रख दें। सुबह दाल को पीसकर उसी दूध में मिला लें। फिर इसमें एक चुटकी हल्दी और 6 बूंदे नींबू की मिलाकर चेहरे पर लगाकर रखें। सूखने पर चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें। इस पैक को सप्ताह में तीन बार लगाने से चेहरे की झाईयां दूर हो जाती हैं।

खाज-खुजली : बिना नमक के चने के आटे की रोटी को लगातार 64 दिन तक खाने से दाद, खुजली आदि रोग मिट जाते हैं।

घबराहट या बेचैनी : लगभग 50 ग्राम चना और 25 दाने किशमिश को रोजाना रात में पानी में भिगोकर रख दें। सुबह खाली पेट चने और किशमिश खाने से घबराहट दूर हो जाती है।

दिल के रोग : दिल के रोगियों को काले चने उबालकर उसमें सेंधानमक डालकर खाना चाहिए।

निम्नरक्तचाप : 20 ग्राम काला चना और 25 दाने किशमिश या मुनक्का रात को ठण्डे पानी में भिगो दें। सुबह रोजाना खाली पेट खाने से निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर) में लाभ होगा और साथ ही साथ चेहरे की चमक बढ़ जाती है।

मानसिक उन्माद (पागलपन) : पित्त (गर्मी) के कारण पागलपन हो तो शाम को 50 ग्राम चने की दाल पानी में भिगो देते हैं। सुबह के समय पीसकर चीनी और पानी मिलाकर 1 गिलास भरकर पीने से पागलपन के रोग में लाभ होता है। चने की दाल को भिगोकर उसका पानी पिलाने से उन्माद (मानसिक पागलपन) और उल्टी ठीक हो जाती है।

सौन्दर्यवर्द्धक : चावल, जौ, चना, मसूर और मटर को बराबर की मात्रा में लेकर बारीक पीस लें। इसमें से थोड़ा-थोड़ा चूर्ण लेकर लेप बना लें और चेहरे पर लगायें। थोड़े दिनों तक यह लेप रोजाना चेहरे पर लगाने से चेहरा चमक उठेगा। बेसन से चेहरा धोने से चेहरे के धब्बे, झांई मिट जाती हैं। चेहरा सुन्दर निकलता है। तेज धूप, गर्मी, लू से त्वचा की रक्षा के लिए बेसन को दूध या दही में मिलाकर गाढ़ा लेप बना लें। इसे सुबह-शाम आधा घंटे चेहरे पर लगा रहने दें। इससे रूप निखर जाता है।

शरीर की जलन : 2 मुट्ठी भर चने का छिलका लें। फिर 2 गिलास पानी लेकर एक मिट्टी के बर्तन में डाल दें और चने का छिलका उसमें भिगो दें। सुबह उठने पर इस पानी को छानकर पी जायें इससे शरीर की जलन बिल्कुल मिट जाती है।

सदमा : 20 ग्राम काले चने और 25 दाने किशमिश या मुनक्कों को ठण्डे पानी में शाम को भिगोकर रख दें। सुबह उठकर इनको खाली पेट खाने से सदमे आना बंद हो जाता है।

बालरोग : चने के आटे को खूब बारीक पीसकर पानी में मिलाकर गर्म करके बच्चे के पेट पर मालिश करने से आराम आता है।

सफेद दाग : मुट्ठी भर काले चने और 10 ग्राम त्रिफला चूर्ण (हरड़, बहेड़ा, आंवला) को 125 मिलीलीटर पानी में भिगो दें। कम से कम 12 घंटों के बाद इन चनों को मोटे कपड़े में बांधकर रख दें और बचा हुआ पानी कपडे़ की पोटली के ऊपर डाल दें। फिर 24 घंटे के बाद पोटली को खोल दें अब तक इन चनों में से अंकुर निकल आयेंगे। यदि किसी मौसम में अंकुर न भी निकले तो चनों को ऐसे ही खा लें। इस तरह से अंकुरित चनों को चबा-चबाकर लगातार 6 हफ्तों खाने से सफेद दाग दूर हो जाते हैं।

सिर का दर्द : सिर में दर्द होने पर कच्चे चनों का जूस बनाकर पीने से सिर का दर्द ठीक हो जाता है। इसके अलावा नजला-जुकाम भी ठीक हो जाता है। 100 ग्राम नुकती, दाने या मोतीचूर के लड्डू पर आधा चम्मच घी और 10 पिसी हुई कालीमिर्च डालकर खाने से कमजोरी से होने वाला सिर दर्द समाप्त हो जाता है।

शरीर की लम्बाई : रात को सोते समय थोड़े से देशी चने लेकर उनको पानी में भिगोकर रख दें। सुबह उठकर गुड़ के साथ इन चनों को रोजाना खूब चबाकर खाने से शरीर की लम्बाई बढ़ती है। चनों की मात्रा शरीर की पाचन शक्ति के अनुसार बढ़ानी चाहिए। इन चनों को 2-3 तीन महीने तक खाना चाहिए।

जुकाम : 50 ग्राम भुने हुए चनों को एक कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। इस पोटली को हल्का सा गर्म करके नाक पर लगाकर सूंघने से बंद नाक खुल जाती है और सांस लेने में परेशानी नहीं होती है। गर्म-गर्म चने को किसी रूमाल में बांधकर सूंघने से जुकाम ठीक हो जाता है। चने को पानी में उबालकर इसके पानी को पी जायें और चने को खा लें। चने में स्वाद के लिए कालीमिर्च और थोड़ा-सा नमक डाल लें। चने का सेवन करना जुकाम में बहुत लाभ करता है।

खूनी बवासीर : सेंके हुए गर्म-गर्म चने खाने से खूनी बवासीर में लाभ मिलता है

कब्ज : 1 या 2 मुट्ठी चनों को धोकर रात को भिगो दें। सुबह जीरा और सोंठ को पीसकर चनों पर डालकर खाएं। घंटे भर बाद चने भिगोये हुए पानी को भी पीने से कब्ज दूर होती है। अंकुरित चना, अंजीर और शहद को मिलाकर या गेहूं के आटे में चने को मिलाकर इसकी रोटी खाने से कब्ज मिट जाती हैं। रात को लगभग 50 ग्राम चने भिगो दें। सुबह इन चनों को जीरा तथा नमक के साथ खाने से कब्ज दूर हो जाती है।

रूसी : 4 बड़े चम्मच चने का बेसन एक बड़े गिलास पानी में घोलकर बालों पर लगायें। इसके बाद सिर को धो लें। इससे सिर की फरास या रूसी दूर हो जाती है।

श्वास नली के रोग : रात को सोते समय एक मुट्ठी भुने या सेंके हुए चने खाकर ऊपर से एक गिलास दूध पीने से श्वास नली (सांस की नली) में जमा हुआ बलगम निकल जाता है।

त्वचा का कालापन : लगभग 12 चम्मच बेसन, 3 चम्मच दही या दूध, थोड़ा सा पानी सभी को मिलाकर पेस्ट सा बनाकर पहले चेहरे पर मले और फिर सारे शरीर पर मलने के लगभग 10 मिनट बाद स्नान करें तथा स्नान में साबुन का उपयोग न करें। इस प्रकार का उबटन करते रहने से त्वचा का कालापन दूर हो जाएगा।

तेलीय त्वचा : यदि चिकनी त्वचा है तो बेसन में गुलाबजल मिलाकर चेहरे व शरीर पर लगाएं। इससे त्वचा का तैलीयपन हट जाता है।

उल्टी : रात को एक मुट्ठी चने को एक गिलास पानी में भिगो देते हैं। सुबह इसके पानी को छानकर पी लेते हैं। यदि गर्भवती स्त्री को उल्टी हो तो भुने हुए चने का सत्तू का सेवन कराना चाहिए। इससे गर्भवती स्त्री की उल्टी बंद हो जाती है।

माता के दूध में वृद्धि : यदि माता अपने बच्चे को दूध पिलाने में दूध की कमी प्रतीत कर रही हो तो उसे लगभग 50 ग्राम काबुली चने रात को दूध भिगोकर सुबह-शाम सेवन करना चाहिए। सुबह दूध को छानकर अलग कर लेते हैं। इन चनों को चबा-चबाकर खाएं। ऊपर से इसी दूध को गर्म करके पी लेते हैं। ऐसा करने से दूध बढ़ जाता है।

माँ बनने में सहायक : यदि किसी भी औरत को माँ ना बनने का भय हो उसे चनों का काढ़ा पिलाना चाहिए इससे माँ बनने की संभावना बढ़ जाती है।

पित्ती : 100 ग्राम चने के बेसन से बने मोतिया लड्डुओं के साथ 10 पिसी कालीमिर्च मिलाकर खाने से पित्ती की गर्मी में लाभ मिलता है।

पेशाब का बार-बार आना : 25 से 50 ग्राम की मात्रा में भुने हुए चने खूब चबाकर खायें बाद में ऊपर से थोड़ा गुड़ खाकर पानी पी लें। आधा महीने तक यह प्रयोग लगातार आधा पेट खाना खाने के बाद करें यदि पाचन क्रिया खराब हो तो इसे न लें।

श्वास या दमा का रोग : भुने हुए चने रात में खाकर ऊपर से गर्म दूध पीने से सांस की नली का बलगम निकल जाता है।लगभग 150 ग्राम सेंके हुए चने व 150 ग्राम खेरी गोन्द को अलग-अलग पीसकर चूर्ण बनाकर दोनों को मिला देते हैं। दिन में 3-4 बार 2-3 चुटकी चाटते रहने से श्वास रोग (दमा) में लाभ मिलता है।

खांसी : चने का जूस बनाकर पीने से जुकाम और कफज-बुखार में लाभ मिलता है।

गैस्ट्रिक अल्सर : चने का सत्तू बनाकर पीने से गैस्ट्रिक के मरीज को लाभ होता है।

हिचकी का रोग : चने की भूसी चिलम में रखकर पीने से हिचकी बंद हो जाती है। चना और अरहर की भूसी चिलम में रखकर पीने से हिचकी नहीं आती है।

कुष्ठ रोग में चना : कुष्ठ रोग से ग्रसित इंसान यदि तीन साल तक अंकुरित चने खाएं। तो वह पूरी तरह से ठीक हो सकता है।

अस्थमा रोग में : अस्थमा से पीडि़त इंसान को चने के आटे का हलवा खाना चाहिए। इस उपाय से अस्थमा रोग ठीक होता है।

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