जानिए क्या है नहाने का सही समय व् वैज्ञानिक (Scientific) तरीका

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पानी या किसी अन्य तरल में शरीर को डुबाकर या बिना डुबाये शरीर को धोना स्नान कहलाता है। स्नान कई प्रयोजनोंके लिये किया जाता है; जैसे- स्वच्छता, धार्मिक अनुष्ठान, चिकित्सकीय कारण आदि।लोग चॉकलेट, कीचड़, दूध, शम्पेन आदि में भी स्नान करते हैं। सूरज के प्रकाश में खुले बदन बैठना या लेटना भी स्नान (सूर्य स्नान) कहलाता है।

 स्नान हम-आज रोज करते हैं। यदि हो सके तो यह स्नान सुबह-शाम, दोनों वक्त होना चाहिये। यदि जाड़ों में नहीं तो गर्मियों में ऐसा करने में आपत्ति नहीं होनी चाहिये। इस स्नान का समय, सबेरे, सूर्योदय से प्रथम तथा शाम को, सूर्यास्त के ठीक बाद है। स्नान का पानी ताजा एवं निर्मल होना चाहिये।Image result for नहाना

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शीत-जल में नियमित रूप से स्नान करने वाले मनुष्य, काफी बड़ी आयु पाते हैं। और मरते दम तक शक्तिशाली, तेजस्वी, एवं स्वस्थ बने रहते हैं। ठंडे जल के स्नान से शरीर की त्वचा को शक्ति मिलती है और उसके काम में सहूलियत पैदा हो जाती है, जिससे बिगड़ा हुआ स्वास्थ्य भी आसानी से सुधर जाता है। इस स्नान से शरीर की जीवन-शक्ति बढ़ती है। मोटी बात यह समझ लेनी चाहिये कि स्नान के लिये जल जितना ही ठंडा होगा, शरीर को वह उतना ही अधिक लाभ पहुँचायेगा।

मानव शरीर को स्वस्थ और साफ़ सुंदर रखने के लिए नियमित स्नान करना बहुत जरुरी  है ,तो हम आज आपको बताएगें किस प्रकार से हमे नहाना चाहिए और इसका सही वैज्ञानिक तरीका है :-

*क्या आपने कभी अपने आस पास ध्यान से देखा या सुना है कि नहाते समय बुजुर्ग को लकवा लग गया?

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*दिमाग की नस फट गई ( ब्रेन हेमरेज), हार्ट अटैक आ गया ।

*छोटे बच्चे को नहलाते समय वो बहुत कांपता रहता है, डरता है और माता समझती है की नहाने से डर रहा है,

*लेकिन ऐसा नहीँ है; असल मे ये सब गलत तरीके से नहाने से होता है ।

*दरअसल हमारे शरीर में गुप्त विद्युत् शक्ति रुधिर (खून) के निरंतर प्रवाह के कारण पैदा होते रहती है, जिसकी स्वास्थ्यवर्धक प्राकृतिक दिशा ऊपर से आरम्भ होकर नीचे पैरो की तरफ आती है।सर में बहुत महीन रक्त् नालिकाये होती है जो दिमाग को रक्त पहुँचाती है। यदि कोई व्यक्ति निरंतर सीधे सर में ठंडा पानी डालकर नहाता है तो ये नलिकाएं सिकुड़ने या रक्त के थक्के जमने लग जाते हैं और जब शरीर इनको सहन नहीं कर पाता तो ऊपर लिखी घटनाएं वर्षो बीतने के बाद बुजुर्गो के साथ होती है।

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सर पर सीधे पानी डालने से हमारा सर ठंडा होने लगता है, जिससे हृदय को सिर की तरफ ज्यादा तेजी से रक्त भेजना पड़ता है, जिससे या तो बुजुर्ग में हार्ट अटैक या दिमाग की नस फटने की अवस्था हो सकती है। ठीक इसी तरह बच्चे का नियंत्रण तंत्र भी तुरंत प्रतिक्रिया देता है जिससे बच्चे के काम्पने से शरीर में गर्मी उत्पन्न होती है , और माँ समझती है की बच्चा डर रहा है । गलत तरीके से नहाने से बच्चे की हृदय की धड़कन अत्यधिक बढ़ जाती है स्वयं परीक्षण करिये।

*तो आईये हम आपको नहाने का सबसे सही तरीका बताते है ।

*बाथरूम में आराम से बैठकर या खड़े होकर सबसे पहले पैर के पंजो पर पानी डालिये , रगड़िये, फिर पिंडलियों पर, फिर घुटनो पर, फिर जांघो पर पानी डालिये और हाथों से मालिश करिये।

*फिर हाथो से पानी लेकर पेट को रगड़िये | फिर कंधो पर पानी डालिये, फिर अंजुली में पानी लेकर मुँह पर मलिए | हाथों से पानी लेकर सर पर मलिए।इसके बाद आप शावर के नीचे खड़े होकर या बाल्टी सर पर उड़ेलकर नहा सकते है।इस प्रक्रिया में केवल 1 मिनट लगता है लेकिन इससे आपके जीवन की रक्षा होती है। और इस 1 मिनट में शरीर की विद्युत प्राकृतिक दिशा में ऊपर से नीचे ही बहती रहती है क्योंकि विद्युत् को आकर्षित करने वाला पानी सबसे पहले पैरो पर डाला गया है।

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*बच्चे को इसी तरीके से नहलाने पर वो बिलकुल कांपता डरता नहीं है।

*इस प्रक्रिया में शरीर की गर्मी पेशाब के रास्ते बाहर आ जाती है आप कितनी भी सर्दी में नहाये कभी जुखाम बुखार नहीं होगा

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