जानिए करेला खाने का सही समय, तरीका और इसके आयुर्वेदिक लाभ

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करेले के जूस और करेले (Bitter Gourd ) के औषधिय गुणों को भारतीय होम्योपैथिक में भी सराहा गया है इसीलिए “Momordica charantia” होम्योपैथिक औषधि का मूल तत्व करेला ही है। हरा करेला पके हुए सफेद पीले रंग के करेले की अपेक्षा ज्यादा लाभदायक है इसलिए हमेशा हरे रंग के करेले का ही उपयोग करना चाहिए । करेले के बेहतरीन स्वास्थ्य वर्धक गुणों के अलावा एक और खास बात यह है की इसको सुखाकर रखने पर भी इसके औषधिय गुण नष्ट नहीं होते हैं।

करेला कैसे खाये

हमारे शरीर में छ: रस चाहिए – मीठा, खट्टा, खारा, तीखा, कषाय और कड़वा। पांच रस, खट्टा/खारा/ तीखा, तो बहुत खाते हैं लेकिन कड़वा नहीं खाते हैं। कड़वा कुदरत ने करेला बनाया है लेकिन करेले को निचोड़ के उस की कड़वाहट निकाल देते हैं।

करेले का छिलका नहीं उतारना चाहिए और उसका कड़वा रस नहीं निकालना चाहिए | हफ्ते में, पन्दरह दिन में एक दिन करेला खाना तबियत के लिए अच्छा है।

करेला के फायदे

करेले का स्वाद भले ही कड़वा हो, लेकिन सेहत के लिहाज से यह बहुत फायदेमंद होता है। करेले में अन्य सब्जी या फल की तुलना में ज्यादा औषधीय गुण पाये जाते हैं।

करेला खुश्क तासीर वाली सब्जी है। यह खाने के बाद आसानी से पच जाता है। करेले में फास्फोरस पाया जाता है जिससे कफ की शिकायत दूर होती है। करेले में प्रोटीन, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट, फास्फोरस और विटामिन पाया जाता है। आइए हम आपको कडवे करेले के गुणों के बारे में बताते हैं।

करेला खाने के लाभ

कफ की शिकायत होने पर करेले का सेवन करना चाहिए। करेले में फास्फोरस होता है जिसके कारण कफ की शिकायत दूर होती है।

करेला हमारी पाचन शक्ति को बढाता है जिसके कारण भूख बढती है।

करेले ठंडा होता है, इसलिए यह गर्मी से पैदा हुई बीमारियों के उपचार के लिए फायदेमंद है।

दमा होने पर बिना मसाले की छौंकी हुई करेले की सब्जी खाने से फायदा होता है।

लकवे के मरीजों के लिए करेला बहुत फायदेमंद होता है। इसलिए लकवे के मरीज को कच्चा करेला खाना चाहिए।

उल्टी-दस्त या हैजा होने पर करेले के रस में थोड़ा पानी और काला नमक मिलाकर सेवन करने से तुरंत लाभ मिलता है।

लीवर से संबंधित बीमारियों के लिए तो करेला रामबाण औषधि है।

जलोदर रोग होने पर आधा कप पानी में 2 चम्मच करेले का रस मिलाकर ठीक होने तक रोजाना तीन- चार बार सेवन करने से फायदा होता है।

पीलिया के मरीजों के लिए करेला बहुत फायदेमंद है। पीलिया के मरीजों को पानी में करेला पीसकर खाना चाहिए।

डायबिटीज के लिए करेला रामबाण इलाज है। करेला खाने से शुगर का स्तर नियंत्रित रहता है।

करेला खून साफ करता है। करेला खाने से हीमोग्लोबिन बढ़ता है।

बवासीर होने पर एक चम्मच करेले के रस में आधा चम्मखच शक्कर मिलाकर एक महीने तक प्रयोग करने से बवासीर की शिकायत समाप्त हो जाती है।

गठिया रोग होने पर या हाथ-पैर में जलन होने पर करेले के रस से मालिश करना चाहिए। इससे गठिया के रोगी को फायदा होगा।

दमा होने पर बिना मसाले की करेले की सब्जी खाना चाहिए। इससे दमा रोग में फायदा होगा।

उल्टी, दस्त और हैजा होने पर करेले के रस में थोडा पानी और काला नमक डालकर पीने से फायदा होता है।

करेले के रस को नींबू के रस के साथ पानी में मिलाकर पीने से वजन कम किया जा सकता है।

उल्टी दस्त और हैजा में करेले के फायदे :- करेले का रस निकाल ले अब उसमे थोडा पानी और चटकी भर कला नामक मिला ले।

इसे पिये आपको आराम मिलेगा।मधुमेह की बीमारी में “करेले के फायदे” :- करेले का प्रतिदिन सेवन करे। करेले की सब्जी के रूप में या कच्चे करेले के जूस के रूप में इससे मधुमेह कंट्रोल में रहता है।

पीलिया के रोग में करेले के फायदे :- कच्चे करेले का जूस निकाल ले और उसमे थोडा पानी मिला ले। अब इसका सेवन करे आपको आराम मिलेगा।

रुसी की समस्या में “करेले के फायदे” – करेले और जीरे को पीसकर अपने बालों की जड़ो में अच्छे से लगाये और लगभग 25 मिनट तक रहने दे। उसके बाद अच्छे से अपने बालों को साफ कर ले। इससे आपकी रुसी की समस्या से छुटकारा मिलेगा।

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