जानिए नानी-दादी के आयुर्वेदिक घरेलू नुस्खे ,और दूर रहिये दवाओं से

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दादी मां का कहना है कि रोजमर्रा की छोटी-मोटी समस्‍याओं से निपटने के लिए दवा की नहीं बल्कि घरेलू नुस्‍खों को अपनाने की जरूरत है। वह कहती है कि इन घरेलू नुस्‍खों अपनाकर आप दवाओं से कोसों दूर रह सकते हैं। वह कहती है कि पहले के समय में छोटी-मोटी बीमारी का इलाज घर पर ही कर लिया जाता था।

हमारे घर की रसोई में ऐसी बहुत सी चीजें उपलब्‍ध है जिनमें औषधीय गुण होते हैं। इन सदियों पुराने नुस्खों का सेहत को कोई नुकसान नहीं होता है और ये उपाय सस्‍ते और असरदार होते हैं।मेरी भी आदत कुछ ऐसी ही है। थोड़ा सा सिर दर्द या खांसी-जुकाम होने पर मैं तुरंत दवा खा लेती हूं। इस बात पर मेरी दादी हमेशा मुझे टोकती है कि बेटा ऐसा दवा खाना सही नहीं है। अभी तो तुझे राहत मिल जायेगी लेकिन भविष्या में यह तेरी सेहत के लिए ठीक नहीं है।

लेकिन मैं भी क्या करूं व्य स्तब होने के कारण हेल्थख से जुड़ी इन छोटी-छोटी दिक्कतों से निपटने के लिए मुझे दवा लेना पड़ता है। आइए मेरे साथ-साथ आप भी जानिए कि दादी मां किन बीमारियों का इलाज किन घरेलू नुस्खेी से करने के लिए कहती है।

कान दर्द –  प्याज पीसकर उसका रस कपड़े से छान लें। फिर उसे गरम करके 4 बूंद कान में डालने से कान का दर्द समाप्त हो जाता है।

दांत दर्द – हल्दी एवं सेंधा नमक महीन पीसकर, उसे शुद्ध सरसों के तेल में मिलाकर सुबह-शाम मंजन करने से दांतों का दर्द बंद हो जाता है।

सिरदर्द – सोंठ को बहुत महीन पीसकर बकरी के शुद्ध दूध में मिलाकर नाक से बार-बार खींचने से सभी प्रकार के सिरदर्द में आराम होता है।

कब्ज दूर करने हेतु – 1 बड़े साइज का नींबू काटकर रात्रिभर ओस में पड़ा रहने दें। फिर प्रात:काल 1 गिलास चीनी के शरबत में उस नींबू को निचोड़कर तथा शरबत में नाममात्र का काला नमक डालकर पीने से कब्ज निश्चित रूप से दूर हो जाता है।

पेशाब की जलन – ताजे करेले को महीन-महीन काट लें। पुन: उसे हाथों से भली प्रकार मल दें। करेले का पानी स्टील या शीशे के पात्र में इकट्ठा करें। वही पानी 50 ग्राम की खुराक बनाकर 3 बार (सुबह, दोपहर और शाम) पीने से पेशाब की कड़क एवं जलन ठीक हो जाती है।

आग से जल जाने पर – कच्चे आलू को पीसकर रस निकाल लें, फिर जले हुए स्थान पर उस रस को लगाने से आराम हो जाता है। इसके अतिरिक्त इमली की छाल जलाकर उसका महीन चूर्ण बना लें, उस चूर्ण को गो-घृत में मिलाकर जले हुए स्थान पर लगाने से आराम हो जाता है।

उदर विकार – अजवाइन, कालीमिर्च एवं सेंधा नमक- इन तीनों को एक में ही मिलाकर चूर्ण बना लें। ये तीनों बराबर मात्रा में होने चाहिए। इस चूर्ण को प्रतिदिन नियमित रूप से रात को सोते समय गरम जल के साथ सेवन करने से (मात्रा अठन्नीभर) सभी प्रकार के उदर रोग दूर हो जाते हैं।

मोटापा दूर करना – 1 नींबू का रस 1 गिलास जल में प्रतिदिन खाली पेट पीने से मोटापा दूर हो जाता है। ऐसा 3 महीने तक निरंतर करना चाहिए। गर्मी एवं बरसात के दिनों में यह प्रयोग विशेष लाभदायक होता है।

बच्चों के पेट के कीड़े – छोटे बच्चों के पेट में कीड़े हों तो सुबह एवं शाम को प्याज का रस गरम करके 1 तोला पिलाने से कीड़े अवश्य मर जाते हैं। धतूरे के पत्तों का रस निकालकर उसे गरम करके गुदा पर लगाने से चुन्ने (लघु कृमि) से आराम हो जाता है।

छोटे बच्चों को उल्टी दस्त – पके हुए अनार के फल का रस कुनुकुना गरम करके प्रात:, मध्यान्ह एवं सायं को 1-1 चम्मच पिलाने से शिशु-वमन अवश्य बंद हो जाता है।

कान की फुंसी – लहसुन को सरसों के तेल में पकाकर, उस तेल को सुबह, दोपहर और शाम को कान में 2-2 बूंद डालने से कान के अंदर की फुंसी बह जाती है अथवा बैठ जाती है तथा दर्द समाप्त हो जाता है।

कुकुर खांसी – फिटकरी को तवे पर भून लें और उसे महीन पीस लें। तत्पश्चात 3 रत्ती फिटकरी के चूर्ण में समभाग चीनी मिलाकर सुबह, दोपहर और शाम को सेवन करने से कुकुर खांसी ठीक हो जाती है।

फोड़े – नीम की मुलायम पत्तियों को पीसकर गो-घृत में उसे पकाकर (कुछ गरम रूप में) फोड़े पर हल्के कपड़े के सहारे बांधने से भयंकर एवं पुराने तथा असाध्य फोड़े भी ठीक हो जाते हैं।

अधकपारी का दर्द – 3 रत्ती कपूर तथा मलयागिरि चंदन को गुलाब जल के साथ घिसकर (गुलाब जल की मात्रा कुछ अधिक रहे) नाक के द्वारा खींचने से अधकपारी का दर्द अवश्य समाप्त हो जाता है।

खूनी दस्त – 2 तोला जामुन की गुठली को ताजे पानी के साथ पीस-छानकर, 4-5 दिन सुबह 1 गिलास पीने से खूनी दस्त बंद हो जाता है। इसमें चीनी या कोई अन्य पदार्थ नहीं मिलाना चाहिए।

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