जानिए गेहूं और इससे बनने वाले चोकर के औषधीय लाभ और आयुर्वेदिक गुण

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गेहूं आम भारतीय परिवारों का मुख्य आहार है। इसको पीसकर इसके आटे से गरमागरम चपातियां व दूसरे तमाम व्यंजन तो बनाए जाते हैं। इसका अपना अलग औषधीय महत्त्व भी होता है तथा चिकित्सा जगत में इसके औषधीय प्रयोग भी किए जाते हैं।

आइये, इसके प्रमुख गुणों के बारे में जानें। – गेहूं शक्तिवद्र्धक होता है। इसके निरंतर सेवन से शरीर को शक्ति मिलती है। इसके दानों को भिगोकर या उबालकर खाने से शरीर को काफी ऊर्जा मिलती है। – गेहूं की पत्तियों का रस अत्यंत लाभप्रद होता है। यह न सिर्फ रक्तशोधक का कार्य करता है बल्कि स्नायु दुर्बलता को भी दूर करता है।

यह शरीर के विषैले तत्वों को बाहर करने में मददगार साबित होता है। – शारीरिक रूप से दुर्बल व्यक्ति यदि प्रतिदिन तीन चार गिलास गेहूं की पत्तियों का रस पिएं तो वे शीघ्र हृष्ट-पुष्ट हो सकते हैं। – गेहूं की पत्तियों (ज्वारों) का रस शहद मिलाकर पीने से भी फायदा करता है। इससे पेट साफ रहता है। – गेहूं के अंकुरित दानों को चबाने से मुख की दुर्गन्ध तो दूर होती ही है, दांत और मसूड़े भी इससे मज़बूत होते हैं। – गेहूं की बालियां भूनकर भी खायी जाती हैं।

इन्हें भूनकर खाने पर स्वाद व लाभ दोनों प्राप्त होते हैं। – गेहूं के आटे का चोकर विशेष रूप से कब्ज़ आदि की शिकायत में अत्यंत लाभप्रद सिद्ध होता है। चोकर की रोटी बनाकर खाने से कब्ज़ में आराम मिलता है। बवासीर के रोगी के लिए भी चोकर की रोटी फायेदमंद रहती है।

पेचिश आदि की शिकायत में भी चोकर की रोटी फायदा करती है। – गेहूं के आटे की पुल्टिस बांधने से फोड़ा-फुंसी आसानी से फूट जाते हैं और रोगी को पीड़ा का सामना नहीं करना पड़ता। त्वचा की सफाई व स्नान आदि में भी महिलाएं गेहूं के आटे का प्रयोग करती हैं। इसे उबटन के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है।

जलने पर गेहूं के आटे को गूंथ कर जले हुए स्थान पर लगाने से फफोले पडऩे की संभावनाएं घट जाती हैं, साथ ही पीडि़त व्यक्ति को तीव्र जलन से भी आराम मिलता है। – नया पैदा हुआ गेहूं थोड़ा गरम होता है। यह दस्तावर भी होता है, अत: इसे धोकर इस्तेमाल करना चाहिए। – गेहूं का सेवन वीर्य व पौरूष में वृद्धि करता है।

अब जानिए चोकर के फायदे 

आटे से बने रोटी का सेवन तो हर घरों में किया जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि अब के आटे को रिफाइंड कर करके उसकी चोकर को निकाल दिया जाता है, जिसमें भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मौजूद होता है। पहले के जमाने में चक्की से आटा को पिसा जाता था जो अधिक गुणकारी होता था। आइए जानते हैं चोकर से मिलने वाले फायदे के बारे में।

चोकर युक्त आटे में विटामिन बी कॉन्प्लेक्स बहुत अच्छी मात्रा में होता है। जब गेहूं को पीसकर बारीक आटा बनाया जाता है तब उसका चोकर नष्ट हो जाता है और उसमें मौजूद विटामिन भी नष्ट हो जाता है।

इसके अलावा भी बारीक पीसने की वजह से अन्य कई पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं। चोकर प्रोटीन का भी अच्छा स्रोत होता है। यदि चोकर को छानकर आटे से अलग कर दिया जाए तो आटा प्रोटीन से रहित हो जाता है।

चोकर युक्त आटा को खाने से पेट बहुत देर तक भरा रहता है और इस वजह से बार-बार भूख नहीं लगती है। ऐसे में अपना वजन कम करना हो तो चोकर युक्त आटे का सेवन करना चाहिए, जिससे आप बहुत देर तक किसी भी चीज को खाने से बचे रहेंगे।

अगर आपको कब्ज की समस्या है तो चोकर युक्त रोटियों का सेवन बहुत ही फायदेमंद होता है। इससे आंतों की अच्छी तरह सफाई होती है। आंतों के साफ रहने से गैस नहीं बनती और पेट फूलने और पेट संबंधी अन्य समस्याओं से भी हमें छुटकारा मिलता है।

शोधकर्ताओं के अनुसार चोकर खून में इम्यूनोग्लोब्यूलीन्स की मात्रा को बढ़ाता है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मददगार है। यह टीबी जैसी खतरनाक बीमारी से लड़ने की ताकत रखता है।

यह बवासीर, अपेंडिसाइटिस, बड़ी आंत एवं मलाशय के कैंसर से बचाता है और पेट साफ करने में काफी मददगार साबित होता है।

चोकर युक्त आटे का प्रयोग कोलेस्ट्रॉल को कम करने में अहम भूमिका निभाता है, अत: मोटापे एवं हार्ट के मरीजों के लिए चोकर युक्त आटे का प्रयोग बेहद फायदेमंद साबित होता है।

चोकर आँतों में जाकर उत्तेजना पैदा नहीं करता अपितु गुदगुदी पैदा करता है जो के एक प्राकृतिक नियम है. गुदगुदाहट पैदा होकर बिना जोर लगाये मल आसानी से निकल जाता है. जोर लगाकर मल निकालने से नाडी कमज़ोर हो जाती है तथा वायु भरना, बवासीर, कांच निकलना इत्यादि रोग हो जाने का डर रहता है. चोकर से मल पतला नहीं आता अपितु यह मुलायम और बंधा हुआ आता है. आँतों में मरोड़ पैदा नहीं होती.

शारीरिक श्रम करने वालों को इसका सेवन अवश्य करना चाहिए क्योंकि यह अत्यधिक ऊर्जा प्रदान करता है।

चोकर के लिए आप एक तो जब भी आटा पिसवायें उसको थोडा मोटा पिसवायें और रोटी बनाते समय जब इसको छानते हैं तो छानने के लिए मोटी छन्नी का प्रयोग करें. बस इतना सा ही काम है. आटा जितना बारीक होगा स्वास्थय के दृष्टि कोण से उतना ही बेकार होगा.

अगर आपको इससे कोई फायदा लगे तो इसे शेयर करके औरों को भी बताएं. साथ ही ध्यान रखें कि सभी घरेलु नुस्खे सभी के लिए बराबर कारगर नहीं होते. अपनी तासीर के हिसाब से इनका इस्तेमाल करें. कोई भी दिक्कत हो तो तुरंत वैद्य या चिकित्सक से संपर्क करें.

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