जानिए लहसुन के बेमिसाल फायदे और इसके इस्तेमाल में बरते जाने वाली सावधानियां

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लहसुन का इस्तेमाल आमतौर पर रोजाना हमारे घरों में किया जाता है। लहसुन खाने में इस्तेमाल करने से खाने का स्वाद और बढ़ जाता है। लहसुन का प्रयोग कर दाल व सब्ज़ी में तड़का लगाने से ना केवल स्वाद में वृद्धि होती है बल्कि सेहत के दृष्टिकोण से भी यह बहुत फायदेमंद हैं। दुनिया में लगभग हर संस्कृति में लहसुन के औषधीय गुणों का उपयोग करते है।

लहसुन विटामिन ए, बी-कॉम्प्लेक्स और सी का एक उत्कृष्ट स्रोत है। यह मैंगनीज, फास्फोरस, कैल्शियम, तांबे, पोटेशियम, आयरन और तांबे जैसे खनिजो का भी स्रोत है। आयुर्वेद में लहसुन के काफी फायदे बताए गए हैं। कोई लहसुन का प्रयोग कच्‍चा करता है तो कोई इसे सब्‍जी या चटनी में लेता है। लेकिन कम ही लेाग जानते हैं कि लहसुन का सेवन भूनकर भी किया जाता है और खासतौर पर पुरुषों के लिए इस तरह लहसुन खाना बेहद फायदेमंद होता है।

लहसुन से पुनर्योवन

लहसुन से कायाकल्प अमृत (Elixir of Rejuvenation) बनाकर लेने से कायाकल्प होकर पुनर्योवन की प्राप्ति होती है। यह बहुत आसान व सुलभ नुस्खा है जिसे उपयोग में लाकर इसका फायदा लिया जा सकता है। इसे बनाना भी बहुत आसान है।

इसकी विधि इस प्रकार है :

250 ग्राम लहसुन छीलकर बारीक पीस लें। लगभग 25 नींबूओं का रस निकालकर एक कांच के बर्तन में भर लें। अब इसमें पिसा हुआ लहसुन डालकर अच्छे से हिला लें। इसे 24 घंटे के लिए रख दें।  कायाकल्प अमृत तैयार है। इसमें से एक चम्मच रस लेकर एक कप गुनगुने पानी में मिलाकर पी लें। लगातार 15 दिनों तक पीए।

दिल रहेगा सेहतमंद

लहसुन दिल से संबंधित समस्याओं को भी दूर करता है। लहसुन खाने से खून का जमाव नहीं होता है और हार्ट अटैक होने का खतरा कम हो जाता है। लहसुन और शहद के मिश्रण को खाने से दिल तक जाने वाली धमनियों में जमा वसा निकल जाता है, जिससे ब्‍लड सर्कुलेशन ठीक तरह दिल तक पहुंचता है।

हाई बीपी से छुटकारा

लहसुन खाने से हाई बीपी में आराम मिलता है। दरअसल, लहसुन ब्‍लड सर्कुलेशन को कंट्रोल करने में काफी मददगार है। हाई बीपी की समस्‍या से जूझ रहे लोगों को रोजाना लहसुन खाने की सलाह दी जाती है।

पेट की बीमारियां छूमंतर

पेट से जुड़ी बीमारियों जैसे डायरिया और कब्‍ज की रोकथाम में लहसुन बेहद उपयोगी है। पानी उबालकर उसमें लहसुन की कलियां डाल लें। खाली पेट इस पानी को पीने से डायरिया और कब्‍ज से आराम मिलेगा। यही नहीं लहसुन शरीर के अंदर मौजूद जहरीलें पदार्थों को बाहर निकालने का काम भी करता है।

डाइजेशन होगा बेहतर

लहसुन में आपके डाइजेस्टिव सिस्‍टम को ठीक करने की ताकत होती है। खाली पेट लहसुन की कलियां चबाने से आपका डाइजेशन अच्‍छा रहता है और भूख भी खुलती है।

दांत दर्द

दांत दर्द में मिलेगा आराम लहसुन में एंटीबैक्‍टीरियल और दर्द निवारक गुण मौजूद होते हैं। अगर आपके दांत में दर्द है तो लहसुन की एक कली पीसकर दर्द वाली जगह पर लगा दें। कुछ ही देर में आपको दांत दर्द से आराम मिल जाएगा। यही नहीं खाली पेट लहसुन का सेवन करने से नसों में झनझनाहट से भी आराम मिलता है।

एक चम्मच शहद में चार पांच बूँद लहसून का रस मिलाकर सुबह शाम लेने से खांसी ठीक हो जाती है।

एक कली लहसून और एक काली मिर्च पीसकर सूंघने से फ्लू जल्दी ठीक होता है।

ज्यादा ठंडी चीजें खाने से या तेज बोलने से गला बैठ गया है तो गर्म पानी में लहसून का रस डालकर गरारे करने से गला ठीक हो जाता है।

लहसुन को सुखाकर उसका पाउडर बना लें। इस पाउडर को अलमारी या अन्य जगह डालने से कॉकरोच , झींगुर , कीड़े आदि नहीं आते।

कमरे में कलर करवाने से तेज गंध आती है। चार पांच कली लहसून बारीक काटकर कमरे में फैला देने से गंध चली जाएगी।

चींटियाँ भगाने के लिए उनके घर के पास लहसुन छीलकर रख दो। चींटियाँ भाग जाएगी।

छिपकली आती हो तो दरवाजे के पास लहसुन रखने से इसकी गंध छिपकली को दूर रखेगी।

अधिक मात्रा में लहसुन छीलना हो तो हाथों में तेल लगा लेना चाहिए। इससे हाथों में जलन नहीं होगी , लहसुन छीलना आसान होगा।

लहसुन की कलियों को अलग करके थोड़ी देर पानी में भिगो देने से छिलका जल्दी निकल जाता है।

अब जानिए लहसुन कब नहीं खाना चाहिए

यदि लिवर की किसी बीमारी से ग्रस्त हो तो लहसुन नहीं खाना चाहिए , इससे समस्या और बढ़ सकती है।

पेट में अल्सर हो तो लहसून का उपयोग नहीं करना चाहिए।

लहसुन की तासीर गर्म होती है अतः डायरिया यानि दस्त लगे हों तो लहसून नहीं लेना चाहिए।

खून की कमी हो तो लहसून नहीं खाना चाहिए।

यदि एलर्जी हो तो लहसून का उपयोग नहीं करना चाहिए। लहसून से परेशानी बढ़ सकती है।

कुछ विशेष दवा के साथ लहसून खाना बंद करना पड़ सकता है , यह डॉक्टर से पूछ लेना चाहिए।

होमियोपेथी की दवा ले रहे हों तो लहसून जैसी तेज गंध वाली चीजें का परहेज बताया जाता है।

अगर आपको इससे कोई फायदा लगे तो इसे शेयर करके औरों को भी बताएं. साथ ही ध्यान रखें कि सभी घरेलु नुस्खे सभी के लिए बराबर कारगर नहीं होते. अपनी तासीर के हिसाब से इनका इस्तेमाल करें. कोई भी दिक्कत हो तो तुरंत वैद्य या चिकित्सक से संपर्क करें.

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