जानिये बबूल के पेड़ को ये बहुत से गंभीर रोगों का सस्ता सुलभ और कारगर उपचार

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बबूल का पेड़ Babool Tree खुले सूखे इलाकों में बहुत पाया जाता है। इसे कीकर Keekar के नाम से भी जाना जाता है। बबूल को बंगाली में बबूल गाछ , मराठी में बाभुल , गुजराती में बाबूल , और पंजाबी में बाबला के नाम से जाना जाता है। इंग्लिश में बबूल का नाम अकेशिया अरेबिका Acacia arabica है ।

यह पेड़ हमेशा हरा रहता है। इसमें लम्बे और मजबूत दो दो कांटे एक साथ लगे होते हैं। बबूल की लकड़ी बहुत मजबूत होती है और खेती के औजार बनाने में काम आती है। इसका कोयला बहुत उच्च गुणवत्ता का होता है। इसकी पत्तियां इमली के पेड़ जैसी होती हैं। बबूल की पत्तियां पशुओं के लिए अच्छा आहार होती हैं।

बबूल के पेड़ में चैत्र महीने में फलियाँ आती हैं जो लगभग आधा इंच चौड़ी , 3 से 6 इंच लम्बी , चपटी और टेढ़ी होती हैं। इन फलियों में 8 से 12 बीज होते हैं। अगस्त सितम्बर में इसमें पीले रंग के गोल फूल लगते हैं। खरोंच लगने पर इसके तने से गोंद निकलता है जो अच्छी गुणवत्ता का और बहुत लाभदायक होता है।

बबूल की छाल , पत्ते , फली , फूल और गोंद सभी में औषधीय गुण होते हैं। इनमे कई प्रकार के लाभदायक तत्व तथा एंटीफंगल , एंटीमाइक्रोबायल जैसे गुण पाए जाते हैं। आयुर्वेद की कई दवाओं में इनका उपयोग किया जाता है।

बबूल के फायदे – Babool Benefits

हड्डी टूटने पर

बबूल के पंचांग का चूर्ण एक चम्मच शहद और बकरी के दूध के साथ लेने से टूटी हुई हड्डी जुड़ती है।

बबूल के बीज पीसकर तीन दिन शहद के साथ लेने से अस्थिभंग दूर होता है।

बबूल की फली का चूर्ण एक चम्मच सुबह शाम लेने से टूटी हड्डी जल्दी जुडती है। यह अर्थराइटिस में भी बहुत लाभदायक है।

यौन कमजोरी

बबूल का गोंद 100 ग्राम भूनकर पीस लें।  इसमें 50 ग्राम असगंध पाउडर मिला लें। इसमें से एक चम्मच सुबह और एक चम्मच शाम को गर्म दूध के साथ लें। इससे शुक्राणु मजबूत होते हैं और यौन शक्ति में बढ़ोतरी होती है, वीर्य की कमजोरी दूर होती है। ( इसे पढ़ें : असगंध नागौरी ताकत की बेजोड़ दवा )

बबूल का पंचांग पीस कर मिश्री मिलाकर सुबह शाम लेने से वीर्य रोग में लाभ होता है।

बबूल का गोंद घी में तलकर पकवान बनकर सेवन करने से ताकत बढती है।

मासिक धर्म

100 ग्राम बबूल का गोंद कढ़ाई में भून कर चूर्ण बना लें। इसमें से 2 चम्मच लें। इसमें 2 चम्मच मिश्री मिलाकर सेवन करें। इससे माहवारी के समय की पीड़ा नष्ट होती है तथा मासिक नियमित होता है।

बबूल की छाल 20 ग्राम लेकर एक गिलास पानी में उबालें। एक कप रह जाये तब ठंडा होने पर पियें। इस तरह दिन में तीन बार लेने से मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव होना बंद होता है।

बबूल की छाल के काढ़े में फिटकरी मिलाकर योनी में पिचकारी देने से योनिमार्ग शुद्ध होता है और योनी टाइट होती है।

दांत

बबूल की कोमल टहनी की दातुन लम्बे समय से उपयोग में ली जा रही है , इससे दातुन करने से दांत और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं तथा कई प्रकार के रोगों से बचाव होता है।

बबूल की फली के छिलके और बादाम के छिलके की राख में नमक मिलाकर मंजन करने से दांत मजबूत होते हैं।  दातों की समस्या दूर रहती है।

मुंह के रोग

बबूल , जामुन और फूली हुई फिटकरी का काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से मुंह के सभी रोग ठीक होते है।

बबुल की छाल को पीस कर पानी में उबाल लें।  इससे कुल्ला करने से मुंह के छाले ठीक होते हैं।

बबूल के गोंद के टुकड़े चूसने से मुँह के छाले ठीक होते हैं।

दस्त

बबूल के 10 -12 कोमल पत्तों के रस में मिश्री और शहद मिलाकर लेने से दस्त ठीक होते हैं।

बबूल की पत्तियों का रस छाछ में मिलाकर पीने से दस्त बंद होते हैं।

बबूल के पत्ते चीनी के साथ पीसकर लेने से दस्त के साथ आंव आनी भी बंद होती है।

आँख

बबूल के पत्ते पीसकर टिकिया बनाकर सोते समय आँख पर लगाकर सोने से आँख का दर्द , लाल होने और जलन मिटती है। आँख आने पर इससे बहुत लाभ होता है।

बिस्तर में पेशाब

बबूल की कच्ची फलियाँ छाया में सुखाकर पीस लें , इन्हें घी में थोडा भून लें। इसमें बराबर की मात्रा में मिश्री मिला लें। इसमें से आधा आधा चम्मच सुबह शाम गर्म दूध के साथ लेने से बिस्तर में पेशाब होना बंद होता है।

गला

बबूल के पत्ते , बबूल की छाल और बरगद की छाल बराबर मात्रा में एक गिलास पानी में भिगो दें। इससे कुल्ले करने से गले के सभी रोग मिटते हैं।

बबूल की छाल को पानी में उबल कर गरारे करने से गले की खराश व् सूजन मिटती है।

खूनी दस्त

बबूल की कोमल हरी पत्तियों के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर 2 -3 बार पीने से खुनी दस्त बंद होते हैं।

10 ग्राम बबूल का गोंद आधा कप पानी में घोल लें। छानकर पीने से दस्त और खुनी दस्त दोनों में लाभ होता है।

पीलिया

बबूल के फूल मिश्री के साथ पीस कर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण एक एक चम्मच सुबह शाम लें। इससे पीलिया रोग ठीक होने में मदद मिलती है।

कमर दर्द

बबूल की छाल , फली और गोंद बराबर मात्र में लेकर पीस लें। एक चम्मच दिन में तीन बार लें। इससे कमर दर्द में बहुत आराम मिलता है।

जीभ

बबूल की मुलायम पत्तियां पीसकर पानी में मिलाकर पियें। इससे गर्मी या सर्दी के छाले , जीभ सुखना , जीभ पर दाने होना ठीक होता है।

सुजाक

बबूल की 20 पत्तियां 1 गिलास पानी में रात को भिगो दें।  सुबह छान कर पिए। इससे सुजाक रोग और पेशाब की जलन में आराम मिलता है।

30 ग्राम बबूल की मुलायम पत्तियां रात को पानी में भिगो दें ,सुबह मसलकर छान लें। इसमें गर्म घी मिलाकर पियें। इसी तरह दूसरे दिन भी लें। तीसरे दिन से इसे बिना घी डाले सात दिन तक लें। इस प्रयोग से सुजाक रोग में बहुत लाभ होता है।

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