जानिए इस दिव्य आयुर्वेदिक औषधि को जो बहुत रोगों को जड़ से खत्म करती है

1613

हारसिंगार के पेड़ बहुत बड़े नहीं होते हैं। इसमें गोल बीज आते हैं। इसके फूल अत्यन्त सुकुमार और बड़े ही सुगन्धित होते हैं। पेड़ को हिलाने से वे नीचे गिर पड़ते हैं। वायु के साथ जब दूर से इन फूलों की सुगन्ध आती है, तब मन बहुत ही प्रसन्न और आनन्दित होता है। इसे संस्कृत में पारिजात कहते है, बंगला में शिउली कहते है , उस पेड़ पर छोटे छोटे सफ़ेद फूल आते है, और फूल की डंडी नारंगी रंग की होती है, और उसमे खुसबू बहुत आती है, रात को फूल खिलते है और सुबह जमीन में गिर जाते है। हारसिंहार ठण्डा और रूखा होता है। मगर कोई-कोई गरम होता है।

प्राजक्ता एक पुष्प देने वाला वृक्ष है। इसे हरसिंगार, शेफाली, शिउली आदि नामो से भी जाना जाता है। इसका वृक्ष 10 से 15 फीट ऊँचा होता है। इसका वानस्पतिक नाम ‘निक्टेन्थिस आर्बोर्ट्रिस्टिस’ है। पारिजात पर सुन्दर व सुगन्धित फूल लगते हैं। इसके फूल, पत्ते और छाल का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है। यह सारे भारत में पैदा होता है। यह पश्चिम बंगाल का राजकीय पुष्प है।

हरसिंगार को झाड़ीनुमा या छोटा पेड़ कहा जा सकता है। इसके पेड़ की छाल जगह जगह परत दार सलेटी से रंग की होती है एवं पत्तियाँ हल्की रोयेंदार छह से बारह सेमी लंबी और ढाई से.मी. चौड़ी होती हैं। हरसिंगार के पेड़ पर रात्रि में खुशबूदार छोटे छोटे सफ़ेद फूल आते है, और एवं फूल की डंडी नारंगी रंग की होती है, प्रातःकाल तक यह फूल स्वतः ही जमीन पर गिर जाते है। इसके फूल अगस्त से दिसम्बर तक आते हैं।

हरसिंगार के औषधीय प्रयोग :-

दो कप पानी में हरसिंगार के 8-10 पत्तों के छोटे-छोटे टुकड़े करके डाल लें, इस पानी को धीमी आंच पर आधा रह जाने तक पकाएं। ठंडा हो जाने पर इसे छानकर पियें। इस काढ़े को दिन में दो बार – प्रातः खाली पेट एवं सायं भोजन के एक डेढ़ घंटा पहले पियें। इस प्रयोग से सायटिका रोग जड़ से चला जाता है। इस काढ़े का प्रयोग कम से कम 8 दिन तक अवश्य करना चाहिए।

घुटनों की चिकनाई (Smoothness)

अगर कम हो गई हो और जोड़ो के दर्द में किसी भी प्रकार की दवा से आराम ना मिलता हो तो ऐसे लोग हारसिंगार (पारिजात) पेड़ के 10-12 पत्तों को पत्थर पे कूटकर एक गिलास पानी में उबालें-जब पानी एक चौथाई बच जाए तो बिना छाने ही ठंडा करके पी लें- इस प्रकार 90 दिन में चिकनाई पूरी तरह वापिस बन जाएगी। अगर कुछ कमी रह जाए तो फिर एक माह का अंतर देकर फिर से 90 दिन तक इसी क्रम को दोहराएँ निश्चित लाभ की प्राप्ति होती है।

बंद रक्त की नाड़ियों को खोल

हारसिंगार या पारिजात के पत्तों को धीमी आंच पर उबालकर काढ़ा बना लें। इसे साइटिका के रोगी को सेवन कराने से लाभ मिलता है। यह बंद रक्त की नाड़ियों को खोल देता है यही कारण है की ये साइटिका में कारगर है।

गठिया रोग :-

अगर आपको 40 साल पुराना गठिया की शिकायत है तो हरशिंगार इसमें रामबाण का काम करेगा, हरसिंगार के पांच पत्तों को पीसकर पेस्ट बना लें, इस पेस्ट को एक गिलास पानी में मिलाकर धीमी आंच पर पकाएं। जब पानी आधा रह जाये तब इसे पीने लायक ठंडा करके पियें। इस काढ़े का सेवन प्रातः खाली पेट पियें। इससे वर्षों पुराना गठिया के दर्द में भी निश्चित रूप से लाभ होता है।

बबासीर :-

बबासीर के लिए हरसिंगार के बीज रामबाण औषधि माने गए हैं इसके एक बीज का सेवन प्रतिदिन किया जाये तो बवासीर रोग ठीक हो जाता है। यदि गुदाद्वार में सूजन या मस्से हों तो हरसिंगार के बीजों का लेप बनाकर गुदा पर लगाने से लाभ होता है।

बालों की रूसी :-

50 ग्राम हरसिंगार के बीज पीस कर 1 लीटर पानी में मिलाकर बाल धोने से रुसी समाप्त हो जाती है। इसका प्रयोग सप्ताह में 3 बार करें

गंजापन :-

हरसिंगार के बीजों को पानी के साथ पीसकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को 30 मिनट तक गंजे सिर पर लगायें। इस प्रयोग को लगातार 21 दिन तक करने से गंजेपन में अत्याधिक लाभ होता है।

स्त्री रोग :-

हरसिंगार की 7 कोंपलों (नयी पत्तियों) को पाँच काली मिर्च के साथ पीसकर प्रातः खाली पेट सेवन करने से विभिन्न स्त्री रोगों में लाभ मिलता है।

त्वचा रोग :-

हरसिंगार की पत्तियों को पीसकर त्वचा पर लगाने से त्वचा से सम्बंधित रोगों में लाभ मिलता है। त्वचा रोगों में इसके तेल का प्रयोग भी उपयोगी है।

ज्वर :-

इस काढ़े को विभिन्न ज्वर जैसे – चिकनगुनिया का बुखार, डेंगू फीवर, दिमागी बुखार आदि सभी प्रकार के ज्वर में अत्यंत लाभ मिलता।

मलेरिया :-

मलेरिया बुखार हो तो 2 चम्मच हरसिंगार के पत्ते का रस + 2 चम्मच अदरक का रस + 2 चम्मच शहद आपस में मिलाकर प्रातः सायं सेवन करने से मलेरिया के बुखार में अत्यधिक लाभ होता है।

अस्थमा में हरसिंगार के फायदे :-

हरसिंगार की पत्तियों को रोज खाने से अस्थमा जैसी बीमारी के लक्षण कम हो जाते हैं। हालांकि यह अस्थमा को पूरी तरह ठीक नहीं करता है लेकिन इसके लक्षणों को इतना कम जरूर कर देता है कि व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई नहीं होती है।

एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण हरसिंगार फायदेमंद :-

हरसिंगार का तेल ई-कोलाई नामक बैक्टीरिया से लड़ता है और फंगल इंफेक्शन से शरीर की रक्षा करता है। इसके अलावा यह ऑयल इनसिफैलोमायोकार्डिटिस कार्डियो वायरस और सेमलिकी फॉरेस्ट वायरस को नष्ट करता है। हरसिंगार का ऑयल ब्लैकहेड्स और पिंपल को भी दूर करने में बहुत सहायक होता है।

अर्थराइटिस दूर करने में हरसिंगार के फायदे :-

बूढ़े लोगों में अर्थराइटिस की समस्या आम बात है लेकिन आजकल यह वयस्कों को भी प्रभावित कर रही है। अर्थराइटिस के बेतहाशा दर्द और सूजन से निजात दिलाने में हरसिंगार की पत्तियां बहुत ही ज्यादा कारगर साबित होती हैं। अगर आप अर्थराइटिस से पीड़ित हैं तो हरसिंगार के पत्ते के पावडर को एक कप पानी में उबालकर और इसे ठंडा करके पीने से अर्थराइटिस के दर्द में राहत मिलता है। हरसिंगार का उपयोग प्रतिदिन करने से यह समस्या पूरी तरह दूर हो जाती है।

अगर आपको ये पोस्ट अच्छी लगी तो जन-जागरण के लिए इसे अपने Facebook पर शेयर करें

ऐसी ही और बातों के लिए like करें हमारे पेज Such Khu को।

और ऐसे ही अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी के लिए निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें और गुरूप ज्वाइन करें।

जुडें हमारे फेसबुक ग्रुप से क्लिक करें आयुर्वेदिक देशी नुस्खे।