जानिए गिलोय की बेल और पत्तों के आयुर्वेदिक फायदे और इसके औषधीय गुण

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गिलोय का इस्तेमाल कई तरह की बीमारियों में किया जाता है इसके अलावा ये एक बेहतरीन पावर ड्रिंक भी है ये इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने का काम करता है, जिसकी वजह से कई तरह की बीमारियों से सुरक्षा मिलती है

गिलोय की बेल पूरे भारत में पाई जाती है। इसकी आयु कई वर्षों की होती है। मधुपर्णी, अमृता, तंत्रिका, कुण्डलिनी गुडूची आदि इसी के नाम हैं। गिलोय की बेल प्राय कुण्डलाकार चढ़ती है। नीम और आम के वृक्ष के पस में यह उग जाती है। नीम के पेड़ पर चढ़ी गिलोय को औषधीय दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इसका काण्ड छोटी अंगुली से लेकर अंगूठे जितना मोटा हो सकता है। इसके पत्ते पान के आकार के होते हैं इसमें ग्रीष्म ऋतु में छोटे−छोटे पीले रंग के गुच्छों में फूल आते हैं। इसके फल मटर के दाने के आकार के होते हैं जो पकने पर लाल हो जाते हैं। औषधि के रूप में इसके काण्ड तथा पत्तों का प्रयोग किया जाता है।

गिलोय के काण्ड में स्टार्च के अलावा अनेक जैव सक्रिय पदार्थ पाए जाते हैं। इसमें तीन प्रकार के एल्केलाइड पाए जाते हैं जिनमें बरबेरीन प्रमुख है। इसमें एक कड़वा ग्लूकोसाइड गिलोइन भी पाया जाता है। इसके धनसत्व में जो स्टार्च होता है वह ताजे में 4 प्रतिशत से लेकर सूखे में 1.5 प्रतिशत होता है। जड़, काण्ड तथा पत्तों के अलावा गिलोय का धनसत्व भी प्रयोग किया जाता है।

धनसत्व तैयार करने के लिए ताजा गिलोय की बेल को एक या दो इंच के टुकड़ों में काट कर उन्हें कुचल लें। इस कुचले हुए गिलोय को कांच या मिट्टी के बर्तन में लगभग चार घंटे के लिए भिगो दें। चार घंटे बाद हाथों से मल−मलकर गिलोय बाहर फेंक दें और पानी को कपड़े से छानकर तीन−चार घंटे पड़ा रहने दें इससे इसका सत्व तेजी से तली में बैठ जाता है। बाद में सावधानी पूर्वक पानी को दूसरे बर्तन में निकाल लें और नीचे बची सफेद तलछट को धूप में सुखा लें। यही मटमैले रंग की तलछट गिलोय की धनसत्व है। इसका प्रयोग तीन महीने तक किया जा सकता है। पुराने बुखार या 6 दिन से भी ज्यादा समय से चले आ रहे बुखार के लिए गिलोय उत्तम औषधि है। इस प्रकार के बुखार के लिए लगभग 40 ग्राम गिलोय को कुचलकर मिट्टी के बर्तन में पानी मिलाकर रात भर ढक कर रख देते हैं।

आइए जानते हैं इसके फायदों के बारे में-

काला ज्वर में फायदेमंद

इस रोग के होने पर शरीर में खून की कमी हो जाती है और शरीर का रंग काला पड़ जाता है। ऐसे में गिलोय के ताजे रस में शहद या मिस्री मिलाकर दिन में तीन बार लेने से काला ज्वर में लाभ मिलता है।

बुखार में गुणकारी

बदलते मौसम में बुखार की चपेट में आना एक आम बात है। ऐसे में गिलोय फायदे औषधि है। गिलोय के साथ धनिया नीम की छाल का आंतरिक भाग मिला कर काढ़ा बना लें। दिन में काढ़े की दो बार सेवन करने से बुखार उतर जाएगा।

प्रेमह के रोगियों के लिए

प्रमेह या गोनोरिया एक यौन संचारित बीमारी (एसटीडी) है जो महिलाओं और पुरुषों दोनों में होता है। इस बीमारी के होने की स्थिति में गिलोय के रस में शहद मिलाकर दिन में दो बार लेना चाहिए, प्रमेह में फायदा जरूर होगा।

आंखें कमजोर होने पर

गिलोय का रस आंवले के रस के साथ मिलाकर लेना आंखों के रोग के लिए लाभकारी होता है। इसके सेवन से आंखों के रोग तो दूर होते ही है, साथ ही आंखों की रोशनी भी बढ़ती हैं। आप चाहे तो गिलोय के रस के साथ शहद या मिस्री मिलाकर ले सकते हैं।

आर्थराइटिस में फायदेमंद

आर्थराइटिस की बीमारी होने पर गिलोय का काढ़ा बनाकर उसमें अरंडी का तेल मिलाकर आर्थराइटिस वाली जगह पर लगाएं। आपको लाभ मिलेगा।

रक्त विकारों में गुणकारी

खून की खराबी अर्थात रक्त विकार एक घातक रोग है जिसका उपचार नहीं किया गया तो चर्म रोग हो सकता है। रक्त विकार में गिलोय एक रामबाण की तरह काम करता है। यह रक्त विकारों के साथ खाज, खुजली और वातरक्त में भी फायदेमंद है।

हिचकी में

वैसे हिचकी कोई बड़ी समस्या नहीं है लेकिन यदि आपको यह परेशान करता है तो सोंठ और गिलोय का चूर्ण सूंघिए। हिचकी दूर हो जाएगी।

पैरों के तलवों की जलन

कई लोगों के लिए यह एक बड़ी समस्या है। इस समस्या के चलते वह पूरी रात सो नहीं पाते। इसके लिए आप गिलोय का चूर्ण, अरंडी का बीज पीस कर दही के साथ मिलाकर तलवों में लगाने से जलन मिट जाएगी।

कब्ज में लाभकारी

शरीर में पानी की कमी, डाइट में पोषण की कमी, व्याहयाम ना करना और खराब लाइफस्टा इल की वजह से लोगों को कब्ज की बीमारी घर कर लेती है। यदि आप गिलोय का चूर्ण गुड़ के साथ सेवन करेंगे तो कब्ज को दूर किया जा सकता है।

पीलिया रोग में

गिलोय का एक चम्मच चूर्ण और काली मिर्च तथा शहद मिलाकर चाटने से पीलिया रोग में फायदा मिलता है।

मूत्र संबंधित विकार

मूत्र की जलन, मूत्र रुक जाना, मूत्र रुक-रुककर आना आदि मूत्र संबंधित विकार हैं। मूत्र संबंधित विकार को दूर करने के लिए गिलोय का काढ़ा बनाकर सेवन कीजिए।

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