जानिए छोटी सी राई के पहाड़ जितने बड़े आयुर्वेदिक फायदे

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राई के कई फायदे होते है यह एक गुणकारी मसाला है। इसमें भी काफी औषधीय गुण मौजूद होते हैं। इसका लगभग सभी तरह के आचारो को बनाने में प्रयोग किया जाता है यह रसोई की शान तो है ही, साथ ही अनेक रोगों को भी भगाती है। बतौर औषधि इसके द्वारा कई रोगों को दूर रखा जा सकता हैं। राई के दाने सरसों के दानों से काफी मिलते हैं। बस राई सरसों से थोड़ी छोटी होती है। दिखने में यह सरसों के दानो से छोटा- दाना है राई, मगर कमाल के गुण हैं इसमें।

इसके छोटे-छोटे दाने होते हैं जो कि गहरे लाल होते हैं। इसका सेवन मसाले के रूप में होता है। इसके अन्दर तेल का अंश भी काफी मात्रा में होता है, जो कि सभी जगह उपलब्ध होता है और इसे खाना बनाने में प्रयोग करते हैं। इसका स्वाद चरपरा और कुछ कड़वाहट लिये हुए होता है। इसकी तासीर गरम होती है, इसीलिए यह पाचक अग्नि को बढ़ाती है, यह रुचिकर होती है।

गर्म होने के कारण वात एवं कफ को खत्म करती है। इससे वात एवं कफ की बहुत-सी बीमारियां ठीक हो जाती हैं। पेट के दर्द, शरीर के दर्द को दूर करती है और पेट के कीड़ों को भी खत्म करती है। राई के सेवन से पेट का अफारा दूर होता है। पेट में आंव की शिकायत तथा हिचकी एवं सांस की बीमारी में भी यह लाभकारी है।

आज हम राई के छोटे छोटे दानों के 4 ऐसे बड़े फायदों के बारे में बताने वाले है जो दिखाते है कि राई में भी अनेक सेहत के राज छिपे है।

पहले उपाय में हम बताएँगे कि किस तरह राई और शहद जीभ पर जमी सफ़ेद परत को साफ़ करने, बुखार दूर करने और भूख को बढाने में मदद करता है।

जबकि दुसरे प्रयोग में हम जानेंगे कि कुष्ट रोग से छुटकारा पाने के लिए राई का प्रयोग कैसे करना है।

तीसरे नुस्खे में हम राई, सेंधा नमक और मिश्री से एक मिश्रण तैयार करेंगे, जो फेफड़ों से कफ हटाकर फेफड़ों की सफाई करता है और श्वास संबंधी हर रोग से मुक्ति दिलाता है।

चौथे उपाय में हम आपको दिखाएँगे कि किस तरह आप राई का प्रयोग करके बालों के डैंड्रफ और बालों की सफेदी को दूर कर अपने बालों को मजबूत व घना बना सकते हो।

राई में छुपे सेहत के राज :

पहला प्रयोग :

अकसर जब हम बीमार हो जाते है तो जीभ पर एक सफ़ेद रंग की परत सी जमनी शुरू हो जाती है, साथ ही भूख प्यास भी कम होने लगती है और बुखार तेज हो जाता है। ऐसे में आपको 4 चम्मच राई का पाउडर लेना है और उसमें शहद मिलाकर उसको खाना है। ये उपाय आपकी तुरंत बुखार को कम करता है, जीभ पर जमी उस सफ़ेद परत को साफ़ करता है और भूख भी बढाता है।

दुसरा उपाय :

कुष्ट रोग से छुटकारा पाने के लिए भी आप राई का प्रयोग किया जा सकता है। इसके लिए आपको एक नुस्खा तैयार करना है। जिसके अनुसार आप 1 भाग राई का पाउडर लें और उसमें 4 भाग गाय का घी मिलाएं। अब इस पेस्ट से प्रभावित अंगों पर मसाज करें, आप इस प्रयोग को कुछ दिनों तक लगातार अपनाएँ आपका रोग धीरे धीरे ठीक होने लगेगा।

तीसरा प्रयोग :

अगर आपकी छाती में या गले में कफ जमा हुआ है तो आप ¼ चम्मच पीसी हुई राई लें और उसमें चुटकी भर सेंधा नमक और थोड़ी सी मिश्री मिलाकर एक मिश्रण बनायें। इस मिश्रण की आप पानी के साथ फांकी मारे। ये उपाय दिन में 2 बार अपनाएँ जल्द ही कफ पतला होकर बाहर निकल जाएगा।

चौथा प्रयोग :

वे व्यक्ति जो बालों के झड़ने, बालों में डैंड्रफ या बालों के सफ़ेद होने की समस्या से परेशान है उन्हें 2 चम्मच राई को 1 गिलास पानी में रात भर के लिए भिगोकर छोड़ देना है। अगले दिन सुबह आप इस पानी को राई के साथ ही उबाल लें और पानी के ठंडा होने पर इससे अपने बालों को साफ़ करें। इस उपाय का सेवन बालों और स्कैल्प से जुडी हर समस्या को दूर करता है, बालों को सफ़ेद होने से बचाता है और बालों को मजबूती प्रदान करता है।

अन्य प्रयोग :

लगभग हर घर में लोग जोड़ों के दर्द व अकडन से परेशान रहते है। इन लोगों को राई को पीसकर पाउडर तैयार करना है और उसमें थोड़ा सा कपूर व पानी मिलाकर एक पेस्ट तैयार करना है। इस पेस्ट से जोड़ों की मालिश करें, जल्द ही आपके जोड़ों का दर्द दूर होगा।

धुम्रपान करने वाले लोगों के होंठ काले पड़ जाते है, इन लोगों को समान मात्रा में अकरकरा और राई का पाउडर मिलाकर एक पाउडर तैयार करना है और उसकी ½ चम्मच की मात्रा में गुलाबजल मिलाकर होंठों पर दिन में 2-3 बार लगाना है। जल्द ही ये उपाय होंठों का कालापन दूर कर उन्हें फिर से पहले जैसी रंगत प्रदान करता है।

माइग्रेन से परेशान रोगियों के लिए भी राई बहुत कारगर दवा है। उन्हें राई को बारीक पिसना है और फिर पानी मिलाकर एक पेस्ट तैयार करना है। इस पेस्ट को आप अपने माथे पर लगायें तुरंत आधासीसी के दर्द में आराम मिलेगा।

मिरगी रोग में मिरगी के रोग में, दौरे पड़ना आम बात है। जब रोगी को मिर्गी के दौरे पड़े तब राई लेकर इसे पीसें तथा बारीक साफ सुथरे कपड़े में लपेटें। रोगी को दौरों के दरम्यान सुंघाएँ। इसी से होश आ जाएगा।

जुकाम का इलाज यदि जुकाम हो तो राई को थोड़ा पीसकर शहद में मिलाएँ। इस राई मिले शहद को जुकाम का रोगी सूंघे तथा एक चम्मच खा भी ले। हर चार घंटे बाद ऐसी खुराक सूंघे व खाए। जुकाम नहीं रहेगा।

घबराहट के साथ आप बेचैनी और कंपन महसूस कर रहे हैं, तो अपने हाथों और पैरों में राई के पेस्ट को मलने से आपको आराम मिलेगा।

गठिया और लकवा – राई और सरसों का तेल भी निकाला जाता है। राई के तेल को गठिये की सूजन अथवा दर्द वाले स्थान पर लगाने से लाभ होता है। लकवे के रोगियों को भी राई के तेल की मालिश की जाती है। मालिश के बाद शरीर के अंग को कपड़े से ढक देना चाहिए।

सावधानी – राई की तासीर गर्म होती है इस वजह से रक्तपित्त, रक्तवात, खूनी बवासीर, शरीर में जलन, चक्कर आना, ब्लडप्रेशर बढ़ जाने पर राई के सेवन से बचना चाहिए।

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