कहीं सर्दियों में आपके शरीर पानी की कमी ना हो जाए ! तो जानिए अपने जल को कैसे खाए

525

“जल ही जीवन है” ये कहावत तो आपने सुनी ही होगी। सर्दियों का मौसम चल रहा है और आपको ऐसे में बहुत सावधान रहने की आवश्यकता है। आपको इस मौसम में बिल्कुल भी लापरवाही नहीं करनी है। अगर आपने थोड़ी से भी लापरवाही की तो ये आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। आपको ये समझना है कि सर्दियों के मौसम में कौन सी समस्या ज्यादा पैदा होती है। जैसे आपको बता दें कि इस मौसम में पसीना न आने के कारण और कम प्यास लगने के कारण डीहाईड्रेशन की समस्या हो जाती है।

इसके अलावा सर्दियों में सांस लेने छोड़ने के दौरान मुंह से निकलने वाली भाप शरीर में पानी का स्तर कम कर देती है।

मनुष्य के शरीर में शरीर के आकार के अनुसार 55% से लेकर 77% तक पानी होता है। अपने शरीर को जलयुक्त रखना हमारे शारीरिक और मानसिक व्यवहार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जल की कमी को संतुलित करने के लिए हमें पर्याप्त जल पीना चाहिए। उचित प्रकार से कार्य करने के लिए और शरीर में जल की कमी न होने देने के लिए, शरीर को प्रतिदिन एक से सात लीटर के बीच जल की जरूरत होती है; जल की बिलकुल निश्चित मात्रा सक्रियता के स्तर, तापमान, आर्द्रता, और कुछ अन्य कारकों पर निर्भर करती है। यह स्पष्ट नहीं है कि स्वस्थ मनुष्यों को कितने जल के सेवन की आवश्यकता होती है, लेकिन जल की उचित मात्रा बनाए रखने के लिए प्रतिदिन कम-से-कम लगभग 2 लीटर (7 से 8 गिलास) जल की आवश्यकता होती है।


आपके शरीर में पानी की कमी होती कैसे है?

त्वचा द्वारा और साँस लेने में लगभग 700 मिली पानी कम हो जाता है। मूत्र के रूप में लगभग 1.5 लीटर, 100 मिली मल के रूप में और पसीने में 200 मिली पानी कम हो जाता है। व्यायाम के और गर्म मौसम के दौरान सामान्य के मुकाबले शरीर अधिक पानी का उपयोग करता है। अतिसार, बीमारी और रोग के समय शरीर से पानी की काफी कमी हो जाती है। यदि आप कम हुए पानी की पूर्ति नहीं करते, तो आप निर्जलीकृत (शरीर में पानी की कमी होना) हो जाते हैं।

पानी की कमी के लक्षण

मूत्र का कम होना या ना होना

मूत्र का रंग सामान्य से गहरा होना,

मुँह सूखना, तीव्र प्यास, सिरदर्द, असमंजस, चक्कर आना आदि।

हमारे शरीर में जल की पूर्ति कैसे होती है?

अपनी कार्यप्रणाली को सामान्य बनाए रखने के लिए 24 घंटों के दौरान शरीर जल की चालीस हजार गिलास जितनी मात्रा को बार-बार प्रयोग में लेता है। इस प्रक्रिया में, शरीर में प्रतिदिन 6-10 गिलास पानी की कमी हो जाती है। जल की कम हुई यह मात्रा शरीर को प्रतिदिन पहुंचाई जानी चाहिए। शरीर को प्रतिदिन औसतन 8-10 गिलास जल की आवश्यकता होती है।

शरीर में जल की कमी को पूर्ण करने का एकमात्र तरीका केवल तरल पदार्थ ही नहीं हैं। जलीय फल और सब्जियाँ जैसे ककड़ी, तरबूज और स्ट्रॉबेरी में शरीर में जल की उचित मात्रा बनाए रखने के लिए आवश्यक खनिज, लवण और प्राकृतिक रूप में शक्कर होती है। इसलिए इनका सेवन कभी-कभी हमें अकेले पानी की तुलना में अधिक प्रभावी रूप से (और अधिक स्वादिष्ट रूप से भी) जलयुक्त बनाता है। अपने चाय और कॉफ़ी के सेवन को घटाएँ। हालाँकि ये आपकी प्यास को कम करने में सहायता करते हैं लेकिन इनमें हमारे शरीर के लिए जरूरी लवण और पोषक तत्व नहीं होते। ऊर्जा पेयों (एनर्जी ड्रिंक्स) में अधिक शक्कर होती है। नीबू पानी, नारियल पानी, छाछ और फलों के ताजे रस का सेवन बढ़ाएं।

प्यास का अनुभव होने तक प्रतीक्षा ना करें, बीच-बीच में तरल पदार्थ पीते रहें।

  • भोजन के पहले पानी पियें (30 मिनट पहले)। यह पाचन मार्ग को भोजन के छोटे-छोटे टुकड़े करने के लिए तैयार करता है।
  • जब प्यास लगे तब पानी पियें – चाहे भोजन के बीच ही क्यों ना हो। भोजन के सेवन के दौरान जल की कमी पाचन को नाटकीय रूप से कमजोर कर सकती है।
  • पाचन की प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए और भोजन के विभाजन से उत्पन्न जल की कमी को दूर करने के लिए भोजन के 2-1/2 घंटों बाद पानी पियें।
  • नींद के दौरान उत्पन्न हुई पानी की कमी को दूर करने के लिए सुबह सबसे पहले 2 गिलास पानी पियें।
  • पसीने के निर्माण हेतु पानी की उपलब्धता के लिए व्यायाम के पहले पानी पियें – यह विष निकालने का महत्वपूर्ण तरीका है।
  • व्यायाम के बाद पानी पियें ताकि पसीने के माध्यम से निकले हुए पानी की पूर्ति की जा सके।

निर्जलीकरण के अलावा, यदि निम्न कारण हैं तो आपको अपने जल सेवन की मात्रा बढ़ानी चाहिए:

  • यदि आप गर्भवती हैं या स्तनपान कराती हैं।
  • गर्म वातावरण में अधिकतर समय बिताते हैं।
  • व्यायाम के दौरान।
  • बुखार होने पर
  • उल्टियाँ होने पर।
  • अतिसार होने पर।
  • कुछ चिकित्सीय स्थितियाँ जैसे गुर्दे की पथरी, मूत्राशय में संक्रमण होने पर।

यदि आपको ये चिंता है कि आप पर्याप्त पानी नहीं पी रहे, तो अपने मूत्र पर ध्यान दें। यदि मूत्र रंगहीन या हल्का पीला है तो आपके शरीर में जल की पर्याप्त मात्रा है। गहरा पीला रंग निर्जलीकरण का सूचक है।

तो आइये आपको बताते है ,आप अपने जल को किस किस तरह से पूरा कर सकते हैं और किस फल अथवा सब्जी में कितना जल है।

भोजन जल की मात्रा (%)
ककड़ी 96.7
लेट्यूस 95.6
अजमोदा 95.4
मूली 95.3
टमाटर 94.5
हरी मिर्च 03.9
फूलगोभी 92.1
तरबूज 91.5
पालक 91.4
स्ट्रॉबेरी 91
ब्रोकोली 90.7
गाजर 90.4
खरबूज 90.2

 

अगर आपको ये पोस्ट अच्छी लगी तो जन-जागरण के लिए इसे अपने Facebook पर शेयर करें

ऐसी ही और बातों के लिए like करें हमारे पेज Such Khu को।

और ऐसे ही अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी के लिए निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें और गुरूप ज्वाइन करें।

जुडें हमारे फेसबुक ग्रुप से क्लिक करें आयुर्वेदिक देशी नुस्खे।