गौमूत्र के आयुर्वेदिक लाभ जरुर पढ़े, कैंसर रोगियों के लिए भी है बहुत फायदेमंद

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शास्‍त्रों में ऋषियों-महर्षियों ने गौ की अनंत महिमा लिखी है। उनके दूध, दही़, मक्खन, घी, छाछ, मूत्र आदि से अनेक रोग दूर होते हैं। गोमूत्र एक महौषधि है। इसमें पोटैशियम, मैग्नीशियम क्लोराइड, फॉस्‍फेट, अमोनिया, कैरोटिन, स्वर्ण क्षार आदि पोषक तत्व विद्यमान रहते हैं इसलिए इसे औषधीय गुणों की दृष्टि से महौषधि माना गया है। हमारे देश में गौमूत्र का इस्तेमाल पूजा-पाठ के लिए किया जाता हैं लेकिन इसके अलावा भी लोग इसका कई तरह से उपयोग करते हैं। इसमें कई तरह की बीमारियां से लड़ने की क्षमता पाई जाती है। गौमूत्र कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को जड़ से खत्म करता है। जी हां, गौमूत्र कैंसर के रोगियों के लिए संजीवनी औषधि की तरह काम करता है।

गौमूत्र कैंसर के रोगियों के लिए फायदेमंद :

गौमूत्र का सेवन करने से कैंसर का प्रभाव कम होने लगता है और धीरे-धीरे खत्म हो जाता है।

इससे दवाईयों का प्रभाव बढ़ता है और कैंसर से लड़ने की शारीरिक क्षमता बढ़ती है।

इसमें कैंसर को रोकने वाले प्राकृतिक एजेंट टैक्सॉल को क्रियाशील करने में सहायक होता है।

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद में भी गौमूत्र को कैंसर के लिए सबसे उत्तम दवाई प्रमाणित किया गया है।

कैंसर के अलावा यह डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद होता है। गौमूत्र स्तन कैंसर के संक्रमण को रोकने वाले प्रतिरोधक मोलेक्यूल की क्रियाशीलता को तीव्र करता है।

सुबह खाली पेट गौमूत्र का सेवन करने से कैंसर सेल को बढ़ने से रोका जा सकता है। इसका सेवन करने से शरीर स्वास्थ्य और रोगमुक्त रहता है।

गले का कैंसर – 100 मिली गोमूत्र तथा सुपारी के बराबर गाय का गोबर दोनों को मिलाकर स्वच्छ बर्तन में छान लें। सुबह नित्य कर्म से निवृत्त होकर निराहार 6 माह तक प्रयोग करें।

जानिए वि‍भि‍न्न रोगों में गोमूत्र के लाभ

जोड़ों का दर्द – जोड़ों में दर्द होने पर गोमूत्र का प्रयोग दो तरीकों से किया जा सकता है। इनमें से पहला तरीका है, दर्द वाले स्थान पर गोमूत्र से सेंक करें। और सर्दी में जोड़ों का दर्द होने पर 1 ग्राम सोंठ के चूर्ण के साथ गोमूत्र का सेवन करें।

मोटापा – गोमूत्र के माध्यम से आप मोटापे पर आसानी से नियं‍त्रण पा सकते हैं। आधे गिलास ताजे पानी में 4 चम्मच गोमूत्र, 2 चम्मच शहद तथा 1 चम्मच नींबू का रस मिलाकर नित्य सेवन करें।

दंत रोग – दांत दर्द एवं पायरिया में गोमूत्र से कुल्ला करने से लाभ होता है। इसके अलावा पुराना जुकाम, नजला, श्वास- गोमूत्र एक चौथाई में एक चौथाई चम्मच फूली हुई फिटकरी मिलाकर सेवन करें।

हृदयरोग – 4 चम्मच गोमूत्र का सुबह-शाम सेवन करना हृदय रोगियों के लिए लाभकारी होता है। इसके साथ ही मधुमेह रोगियों के लिए भी यह लाभकारी है। मधुमेह के रोगियों को बिना ब्यायी गाय का गोमूत्र प्रतिदिन डेढ़ तोला सेवन करना चाहिए।

पीलिया – 200-250 मिली गोमूत्र 15 दिन तक पिएं, उच्च रक्तचाप होने पर एक चौथाई प्याले गोमूत्र में एक चौथाई चम्मच फूली हुई फिटकरी डालकर सेवन करें और दमा के रोगी को छोटी बछड़ी का 1 तोला गोमूत्र नियमित पीना लाभकारी होता है।

यकृत, प्लीहा बढ़ना– 5 तोला गोमूत्र में 1 चुटकी नमक मिलाकर पि‍एं या पुनर्नवा के क्वाथ को समान भाग गोमूत्र मिलाकर लें। आप यह भी कर सकते हैं कि  गर्म ईंट पर उससे गोमूत्र में कपड़ा भिगोकर लपेटें तथा प्रभावित स्थान पर हल्की-हल्की सिंकाई करें।

कब्ज या पेट फूलने पर – 3 तोला ताजा गोमूत्र छानकर उसमें आधा चम्मच नमक मिलाकर पिलाएं।  बच्चे का पेट फूल जाए तो 1 चम्मच गोमूत्र पिलाएं। और गैस की समस्या में प्रात:काल आधे कप गोमूत्र में नमक तथा नींबू का रस मिलाकर पिलाएं या फिर पुराने गैस के रोग के लिए गोमूत्र को पकाकर प्राप्त किया गया क्षार भी गुणकारी है।

चर्मरोग – नीम गिलोय क्वाथ के साथ सुबह-शाम गोमूत्र का सेवन करने से रक्तदोषजन्य चर्मरोग नष्ट हो जाता है। इसके अलावा चर्मरोग पर जीरे को महीन पीसकर गोमूत्र मिलाकर लेप करना भी लाभकारी है।

आंख के रोग – आंख के धुंधलेपन एवं रतौंधी में काली बछिया के मूत्र को तांबे के बर्तन में गर्म करें। चौथाई भाग बचने पर छान लें और उसे कांच की शीशी में भर लें। उससे सुबह-शाम आंख धोएं।

पेट में कृमि – आधा चम्मच अजवाइन के चूर्ण के साथ 4 चम्मच गोमूत्र 1 सप्ताह सेवन करें। और कब्ज की समस्या होने पर हरड़ के चूर्ण के साथ गोमूत्र सेवन करें।

नोट :- गोमूत्र सेवन में कुछ सावधानियां रखना भी बेहद आवश्यक है।

देशी गाय का गोमूत्र ही सेवन करें। गाय गर्भवती या रोगी न हो।

जंगल में चरने वाली गाय का मूत्र सर्वोत्तम है।

1 वर्ष से कम की बछिया का मूत्र सर्वोत्तम है।

पीने हेतु गोमूत्र को 4 से 8 बार कपड़े से छानकर प्रयोग करना चाहिए।

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