क्या आप भी जानते है नीलगिरी के तेल के ये उपयोग और आयुर्वेदिक फ़ायदे

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नीलगिरी(Neelgiri) के तेल में आश्चर्यजनक औषधीय गुण होते हैं। इसमें कोई हैरानी की बात भी नही यदि हम कहें कि इस तेल का प्रयोग आपकी किराने की दुकानों के काफी सामानों में होता है। फायदे तो इसके बहुत हैं, उनमें से कुछ यहाँ आपको बताने जा रहे हैं ।

जानिए नीलगिरी का तेल है क्या?

नीलगिरी के तेल को यूकलिप्टस के तेल के नाम से भी जाना जाता है। यह एक ऐसा तेल है जो हमारे स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है। नीलगिरी के सूखे पत्तों से इसको बनाया जाता है। इन मीठी खुशबूदार पत्तियों को वाष्प शक्ति से आसुत करके तेल बनाया जाता है।

नीलगिरी के तेल के गुण-

एन्टी इंफ्लेमेटरी

एन्टी सपासमोडिक

डीकांगेस्टेन्ट

कीटाणु नाशक

रोगाणु नाशक

जीवाणुनाशक

नीलगिरी के तेल के फायदे-

सर्दी और जमाव के लिए-

नीलगिरी के तेल की तेज खुशबू को सांस के साथ अंदर लेने से छाती का जमाव, सर्दी, फ्लू या ब्रोंकाइटिस जैसी गम्भीर बीमारी में आराम मिलता है।

बालों का पोषण करे-

नीलगिरी के तेल में कुछ तत्व होते हैं जोकि बालों की जड़ों में खून की नालियों को उत्तेजित करके बालों के रोम छिद्रों को भी उत्साहित करते हैं। जिससे जड़ों में खून का दौरा तेज़ होता है और बालों का विकास भी तेज होता है।

बालों की जड़ों में खुजली की समस्या-

नीलगिरी के तेल के साथ नीम के तेल को मिलाकर बालों में लगाने से बालों को पोषण के साथ साथ मॉइस्चर भी मिलता है।

1 चम्मच नीम का तेल

4 से 5 बूंदें नीलगिरी का तेल

3 चम्मच नारियल का तेल

इन सबको मिलाकर बालों और उनकी जड़ों में अच्छे से लगाएं। कुछ घंटे या रात भर के बाद बाल धो लें। परिणाम आप खुद देखेंगे।

पेचिश के लिए-

नीलगिरी के तेल की कुछ बूंदें पेट पर घड़ी की सुई की दिशा की तरह घुमाएं तो पेचिश, सूजन से तो आराम मिलता ही है, यह इन्फेक्शन को भी खत्म करत है।

मधुमेह के लिए-

नीलगिरी का तेल यदि मधुमेह के रोगी इस्तेमाल करें तो उनमे प्रसार बढ़ता है। हर बार नहाने के बाद किसी भी बॉडी लोशन में मिलाकर पूरे शरीर पर लगाएं, तो खून का दौरा तेज़ होगा।

बुखार कम करने के लिए-

इस तेल के एन्टी इंफ्लेमेटरी गुण होने के कारण बुखार के दौरान इसका प्रयोग करने से शरीर का तापमान कम होता है। ये खून की धमनियों को खोल देता है जिससे खून का भाव तेज़ होता है।

मुह की दुर्गंध के लिए

नीलगिरी के तेल में सिनोले नाम का एन्टी सेप्टिक पाया जाता है जो उन बैक्टीरिया को खत्म कर देता है जो मुह की दुर्गंध की वजह बनते हैं। यही वजह है कि आप अपनी किराने की दुकान में माउथवाश और टूथपेस्ट में इसको पाते हैं।

मांसपेशियों की दर्द के लिए-

नीलगिरी एक प्राकृतिक दर्द निवारक है। इसमे एन्टी इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं जिसकी वजह से यह बाह्य दर्दों के लिए असरदार दवाई है। थोड़े से नीलगिरी के तेल की दर्द वाली जगह पर मालिश करें।

साइनस के लिए-

नीलगिरी का तेल श्लेष्मा झिल्ली की सूजन को बहुत ही अच्छे तरीके से कम करता है। यह साइनस की वजह से बंद हुए सांस लेने के रास्ते मे जमे हुए चिपचिपे से पदार्थ को पतला करके आपको आराम दिलाता है।

अस्थमा के लिए-

जब भी अस्थमा का दौरा हो नीलगिरी के तेल की कुछ बूंदें हथेली पर ले के छाती पर मालिश करें या फिर सीधे ही उसको सूंघ लें।

किडनी स्टोन के लिए-

किडनी स्टोन की वजह से दर्द भरी स्थिति में रोगी कमजोर हो जाता है। 1-2 बूंदें तेल की लेकर दर्द वाली जगह पर हल्के हाथ से मलें, दर्द में राहत मिलेगी।

दांतों की समस्या के लिए-

नीलगिरी का तेल अपने कीटाणु नाशक गुणों के कारण कैविटी और दूसरी दांतों की समस्याओं के लिए गुणकारी है। यही वजह है कि माउथवाश, टूथपेस्ट और दूसरे दांतों के उत्पादों में इसका प्रयोग होता है।

नीलगिरी के तेल के उपयोग-

कीड़े मकोड़ों से बचाए

परफ्यूम और सौंदर्य प्रसाधनों में इसका प्रयोग

प्राकृतिक सनस्क्रीन

दर्द निवारक तेल

टूथपेस्ट में

भाप चिकित्सा के लिए

नीलगिरी तेल की मात्रा-

इसका प्रयोग किसी अन्य तेल में मिलाकर किया जाता है जैसे नारियल का तेल। आप शुरू में 1 बूंद नीलगिरी के तेल को 2-3 चम्मच किसी अन्य तेल के साथ मिलाकर प्रयोग करें और बाद में अपनी जरूरत के हिसाब से मात्रा बढ़ा दें।

नीलगिरी के तेल के नुकसान-

यदि हम नीलगिरी के तेल से होने वाले नुकसान की बात करें तो इसका कोई अपवाद नहीं है। इसका प्रयोग करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना पड़ेगा। इस तेल को बिना किसी अन्य तेल में मिलाए न प्रयोग करें चाहे इसको कहीं लगाना हो या फिर पीना हो। इससे होने वाले अन्य नुकसान हैं:-

पेचिश

जी मिचलाना

उल्टी होना

पेट मे गड़बड़

हवा की वजह से होने वाले त्वचा रोग

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