जानिए फेफड़े में पानी के जमाव : कारण, पहचान और उसके अचूक घरेलू उपाय

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कभी यह भी सुनने में आया होगा कि छाती में नली डलवाकर पानी पूरा निकलवाना पड़ा क्योंकि सुई से पानी पूरा निकल नहीं पाया था या फिर पानी; इकट्ठा हुआ तरल पदार्थ काफी गाढ़ा हो गया था जो पतली सुई के जरिये बाहर नहीं आ सकता था।

कभी यह भी सुनने में आया होगा कि किसी मरीज की छाती से एक बार पानी पूरा निकलवा देने के बाद भी दोबारा से पानी भर गया जिसे फिर से निकलवाना पड़ा।

कभी यह भी सुनने में आया होगा कि किसी व्यक्ति की छाती में बार-बार पानी का जमाव हो जाता है और फेफड़े पर दबाव की वजह से साँस फूलने लगती है।

आइये जानते है कि फेफड़ों में पानी का जमाव किस तरिके से और क्यों होता है फेफड़े और छाती की दीवार के बीच खाली जगह होती है जिसमे की साँस लेते हुए हमारे फेफड़े सिकुड़ते एवं फैलते है इसकी खाली जगह को प्लुरल स्पेस कहते है फेफड़े की ऊपरी सतह से पानी रिसता रहता है कई बार पानी छेदों के जरिये पेट से फेफड़ो में आ जाता है छाती की अंदर की दीवार में फेफड़े की ऊपरी सतह से रिसने वाले पानी को सोखने की क्षमता बीस गुणा तक होती है इससे पानी रिसने और सूखने में संतुलन बना रहता है पर जब कोई बीमारी व्यक्ति को घेर लेती है तो उसकी फेफड़ों की सतह से पानी रिसने का दौर तेज हो जाता है और पानी सोखने की क्षमता में कमी आ जाती है और इससे हमारी छाती में चारों और पानी जैसा तरल पदार्थ इकट्ठा हो जाता है।

किसी रोग के लक्षण (symptoms) पहले से ही मालूम हो तो समय पर उसकी पहचान करके उसे बढ़ने से रोक सकते है। इसके इलावा बीमारी का इलाज सही तरीके से करने के लिए उसके कारणों की जानकारी भी होनी चाहिए।आओ जाने इस बीमारी के होने के कारण और इसके होने के बाद दिखाई देने वाले लक्षण व कारण और इलाज ।

फेफड़ों में पानी क्यों जमा होता है :-

फेफड़ों में पानी जमा होने का सबसे बड़ा कारण छाती में टीबी का इंफेक्शन होता है टीबी के इन्फ़ेक्सन से फेफड़े की ऊपरी सतह में तेज प्रतिक्रिया होती है इसके कारण छाती की दीवार से तेज गति से पीला पानी रिसने लग जाता है इससे छाती में पीला पानी इकट्ठा हो जाता है छाती में तरल पदार्थ निमोनिया जैसी बीमारी से भी हो सकता है कैंसर के कारण भी हमारे फेफड़ों  में पानी भरने का मुख्य कारण हो सकता है छाती में कैंसर की वजह से पानी जमा होने में तीन तरह के कैंसर है फेफड़े,ब्रेस्ट और गिल्टी का कैंसर ट्यूमर भी फेफड़ो में पानी भरने का कारण हो सकता है ट्यूमर के रोगी में अक्सर फेफड़ों में पानी भरने की समस्या देखी गयी है अगर ट्यूमर की समस्या को जड़ से ठीक न किया जाएँ तो यह घातक भी हो सकती है।

छाती में पानी के जमाव के लक्षण:-

बुखार इसका मुख्य लक्षण होता है अगर आपको बुखार है और वह श्याम को तेज हो जाता है तो छाती में जमाव की संभावना बढ़ जाती है।

अगर आप इससे पीड़ित है तो आपका वजन निरंतर गिरने लगेगा।

इसमें आपको साँस लेने में भी दिक़्क़त होती है साँस का फूलना और छाती में दर्द होना इत्यादि हो सकता है।

खांसते समय गले में बलगम का इकट्ठा होना या थूक में बलगम आना।

जब भी आप अपने शरीर को हिलाते है तो गड़ -गड़ की आवाज आती है।

इसमें छाती के बाएं और दायीं और भारीपन का होना इसका एक लक्षण है।

फेफड़ों की सूजन या पानी के जमाव को दूर करने के कुछ घरेलू उपाय:-

रेत या नमक को किसी कपड़े में बांध कर हल्का सा गर्म कर लीजिये और अब इसे अपने सीने पर सिकाई करने जहां आपको दर्द और सूजन महसूस होती है।

अलसी भी इसमें लाभदायक है अलसी की पोटली बनाकर सीने की सिकाई करने से आराम मिलेगा।

तुलसी के पत्ते के रस का सेवन सुबह श्याम करने से बहुत आराम मिलता है।

लौंग के एक ग्राम चूर्ण को घी या शहद में मिलाकर सुबह-श्याम सेवन करने से आराम मिलेगा।

गूगल एक ग्राम से भी चौथाई मात्रा में गुड़ के साथ दिन में तीन या चार बार लेने से दर्द दूर होता है।

अगस्त की जड़ की छाल पानी में दस से बीस ग्राम शहद के साथ सेवन करने से कफ निकल जाता है  और इससे बुखार भी उत्तर जाता है।

पालक के रस से कुल्ला करने से भी फेफड़ों की सूजन और खांसी में भी लाभ मिलता है।

त्रिफला फेफड़ों से पानी निकालने में काफी लाभदायक साबित हुई है एक ग्राम त्रिफला का चूर्ण ,एक ग्राम शिलाजीत को 70 से 140 मिलीलीटर गाय के मूत्र में मिलाकर दिन में दो बार लेने से आपके फेफड़ों में जमा पानी धीरे धीरे खतम होने लगेगा और दर्द से भी आराम मिलेगा।

अर्जुन की लकड़ी व जड़ का चूर्ण बराबर मात्रा में ले लीजिये लगभग तीन से छह ग्राम की मात्रा में 250 मिलीलीटर दूध के साथ दिन में दो बार लेने से आपको फेफड़ों के पानी से निजात मिलने लगेगा।

छाती में पानी भर जाएँ तो क्या करें:-

अगर आपने इसको ऐसे ही छोड़ दिया तो इसके दुष्परिणाम आपको भुगतने पढ़ सकते है  जैसे समय बीतता है उस पानी के चारों और एक झिल्ली का निर्माण हो जाता है यह झिल्ली आपके फेफड़ों के पानी को सूखने नहीं देती और हमारे फेफड़े के हिस्से हो दबाती है जिससे हमारे फेफड़ो को कार्य करने में दिक्क्त होती है कभी कभी इकट्ठे हुए पानी के अंदर से साँस नली का हिस्सा जुड़ जाता है इससे खांसी के साथ पानी और बलगम दोनों ही आने लगती है इस भयानक रोग को बी.पी.एफ का नाम दिया गया है इसमें एक तरफ का फेफड़ा तो नष्ट हो ही जाता है पर दूसरी तरफ का फेफड़ा भी नष्ट होने लगता है इसलिए इसका समय पर इलाज कराना चाहिए नहीं तो भयानक स्थिति पैदा हो सकती है।

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