सावधान ! एसिडिटी से होने वाली जलन भी बन सकती है, हार्ट अटैक का कारण

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हृदय जो हमारे शरीर का केंद्र बिंदु होता है, हमारे शरीर में होने वाली हर क्रिया का असर हमारे हृदय पर पड़ता है। यदि हम तनाव में हैं, यदि हम हंस रहें हैं, यदि हम स्वस्थ आहार ले रहें हैं, या फिर हम दूषित आहार ले रहें हैं। इनमें से सभी क्रियाएँ शरीर के अन्य हिस्सों समेत, हमारें हृदय को भी प्रभावित करती हैं। बात बस इतनी सी है, कि शरीर के अन्य अंगों पर इसका असर थोड़ा जल्दी दिख जाता है, लेकिन हृदय पर इसका असर दिखने में बहुत समय लगता है।

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वहीं एक और महत्वपूर्ण बात कि जिस तरह से शरीर के अन्य अंगों पर आपके बिगड़े स्वास्थ्य का असर जल्दी होता है, इसका इलाज भी ज्यादातर उतनी ही आसानी से हो जाता है। लेकिन हृदय पर इसका असर होने में जितना ज्यादा समय लगता है इसका असर भी उतना ही लम्बा और घातक होता है, और यदि आपको इसके लक्षण नजर नहीं आ रहें हैं तो इसका यह मतलब बिलकुल भी नहीं है कि आपके खराब खान-पान और जीवन शैली का गलत असर आपके हृदय पर नहीं हो रहा है। क्योंकि हृदय से जुड़े रोगों के लक्षण भी बहुत देर से नजर आते हैं, और उस वक़्त तक उसकी स्थिति काफी बिगड़ चुकी होती है।

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एसिडिटी कैसे बन जाती है हार्ट अटैक का कारण :-

खून में 20 प्रतिशत अम्ल एसिड अर्थात तेजाब और 80 प्रतिशत क्षार ऐल्काई होता है। जब खून में अम्ल (तेजाब) की मात्रा बढ़ जाती है तो यह अम्ल भोजन पकाने अंग पाकस्थली को प्रभावित करके एसिडिटी रोग उत्पन्न करता है। जब खून की अमलता बढ़ जाती है तो खून को गाढ़ा बना देता है। यह गाढ़ा खून कई बार दिल की नसों में थक्के के रूप में जम जाता है और दिल का दौरा पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। जिसे हम हार्ट अटैक भी कहते हैं  एसिडिटी में जलन व दर्द होता है।

एसिडिटी होने के कारण :-

अम्लपित्त रोग उत्पन्न होने के कई कारण होते हैं, जैसे- समय पर भोजन न करना, अधिक उपवासकरना, बाहरी सड़ी-गली चीजों का सेवन करना, अधिक मिर्च-मसाले वाले भोजन करना, अधिक चाय पीना, कॉफी पीना, शराब पीना आदि। इस सभी कारणों से पाचनशक्ति कमजोरी हो जाती है जिससे वह भोजन को ठीक से नहीं पचा पाती और अम्लपित्त का रोग उत्पन्न हो जाता है।

भोजन और परहेज :-

तोरई, टिण्डा, परवल, पालक, मेथी, मूली, आंवला, नारियल का पानी, पेठे का मुरब्बा, आंवले का मुरब्बा, अमरूद, पपीता आदि का सेवन करना अम्लपित्त के रोगियों के लिए लाभकारी होता है। पुराने शालि चावल, पुरानी जौ, पुराने गेहूं, बथुआ का साग, करेला, लौंग, केला, अंगूर, खजूर, चीनी,घी, मक्खन, सिंघाड़ा, खीरा, अनार, सत्तू, केले का फूल, चीनी, कैथ, कसेरू, दाख, पका पपीता, बेलफल, सेंधानमक, पेठे का मुरब्बा, नारियल का पानी पीना भी लाभकारी होता है। रात को भोजन अपने सामान्य भूख से थोड़ा कम ही करना चाहिए और भोजन करने के बाद थोड़ी देर घूमना चाहिए व ढीले कपड़े पहनकर सोना चाहिए।

आयुर्वेदिक ओषधियों से उपचार

त्रिफला (हरड़, बडेड़ा और आंवला) :

त्रिफला का चूर्ण आधा-आधा चम्मच दिन में 2 से 3 बार पानी के साथ लेने से अम्लपित्त में लाभ मिलता है।

त्रिफला, पीपल, जीरा और कालीमिर्च बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से आधा चम्मच चूर्ण शहद के साथ सुबह-शाम चाटने से पेट की गैस दूर होती है।

त्रिफला को अच्छी तरह पीसकर गर्म लोहे के बर्तन में लेप करके रात भर रख दें। सुबह इसी मिश्रण को शहद या चीनी में मिलाकर सेवन करने से अम्लपित्त के रोग में लाभ मिलता है।

आंवला :-

आंवले का 2 चम्मच रस और 2 चम्मच मिश्री मिलाकर पीने से अम्लता व खट्टी डकारे दूर होती है।

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आंवला के बीजों का चूर्ण 3 से 6 ग्राम को 250 मिलीलीटर दूध के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से अम्लता ठीक होता है।

आंवले का रस एक चम्मच, चौथाई चम्मच भुना हुआ जीरा का चूर्ण, आधा चम्मच धनिये का चूर्ण और मिश्री को मिलाकर लेने से अम्लपित्त कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

आंवला, सफेद चंदन का चूर्ण, चूक, नागरमोथा, कमल के फूल, मुलेठी, छुहारा, मुनक्का एवं खस बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। यह 2-2 चुटकी चूर्ण सुबह-शाम शहद के साथ सेवन करने से अम्लपित्त व पेट की गैस दूर होती है।

आंवला, हरड़, बहेड़, ब्राह्मी और मुंडी बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें मिश्री मिलाकर 6-6 ग्राम चूर्ण बकरी के दूध के साथ प्रतिदिन पीने से गैस की परेशानी दूर होती है।

आंवले के चूर्ण को दही या छाछ के साथ प्रयोग करने से अम्लता में आराम मिलता है।

आंवला के रस में शहद मिलाकर पीने से अम्लपित्त शान्त होता है और डकार के साथ मुंह में पानी आना बंद होता है।

आंवले के 2 ग्राम चूर्ण नारियल पानी के साथ लेने से अम्लपित्त का रोग नष्ट होता है।

शहद :-

धनिया तथा जीरे का चूर्ण शहद के साथ खाने से खट्टी उल्टी आनी बंद होती है।

शहद में 2 चुटकी हरड़ का चूर्ण मिलाकर चाटने से चक्कर आना व गैस दूर होती है।

मुनक्का दाख :-

दाख (मुनक्का) हरड़ और चीनी बराबर-बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीसकर 1-1 ग्राम की गोलियां बना लें। यह 1-1 गोली सुबह-शाम ठंडे पानी के साथ सेवन करने से अम्लपित्त, हृदय व गले की जलन दूर होती है।

रात को 100 मिलीलीटर पानी में मुनक्का 10 ग्राम और सौंफ 5 ग्राम भिगोकर रख दें और सुबह इस उसी पानी में मसलकर पीएं। इससे अम्लपित्त में लाभ मिलता है।

नारियल :-

कच्चे हरे नारियल का 100 से 500 मिलीलीटर पानी दिन में 2 बार पीने से अम्लपित्त रोग ठीक होता है। इसका सेवन प्रतिदिन करने से पेट की जलन एवं छाती की जलन दूर होती है।

नारियल की गिरी की राख को 6 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह सेवन करने से अम्लपित्त की बीमारियां दूर होती है।

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