तेजाब (एसिडिटी) वाले रोगी हो जाएं सावधान, इससे बनता है कैंसर

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जिन रोगों की सबसे अधिक अनदेखी की जाती है, उनमें से एक है एसिडिटी। एसिडिटी न सिर्फ एक बड़ी समस्या है, बल्कि कई रोगों का संकेत भी है। बदलती जीवनशैली और बढ़ती सहूलियतों के बीच बैठे-बैठे काम करने की प्रवृत्ति के कारण एसिडिटी बहुत आम समस्या हो गई है।

एसिडिटी के मूल में जाएं तो यह समस्या खाना पचाने की प्रक्रिया से जुड़ी है। दरअसल खाना पचाने के लिए पेट हाइड्रोक्लोरिक एसिड का उत्सर्जन करता है। सामान्य तौर पर यह एसिड पेट में ही रहता है और भोजन नली के संपर्क में नहीं आता। लेकिन कई बार विकृति आने पर भोजन नली अपने आप खुल जाती है और एसिड भोजन नली में पहुंच जाता है।

पेप्टिक अल्सर

यह बीमारी आजकल आम ही लोगों में देखने को मिलती है। इसमें छोटी आंत में घाव(अल्सर) हो जाते हैं। यह बीमारी मुख्य रूप से हेलिकोबैक्टर पाइलोराई नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। कुछ खास ग्रुप की दर्द की दवाएं लेने से भी यह समस्या हो सकती है।

लेकिन आज हम आपको बता दें कि अब आप इस बीमारी को कुदरती तरीके से बिल्कुल ठीक कर सकते है। क्योंकि इसका पक्का इलाज एलोपैथी दवाई में नही है अगर होता तो आपको ये बीमारी दवाई लेने से 10 दिन में ठीक हो गई होती। कुछ लोग तो सुबह होते ही एसिडिटी का कैप्सूल खाना शुरू कर देते है और ये सिलसिला पिछले कई सालों से चला आ रहा है। ये दवाई उनकी जिंदगी का हिस्सा ही बन गई है।

बहुत सी बीमारियों का इलाज आप अपने आप ही कर सकते हो अगर आपको उस बीमारी की जड़ का पता चल जाये क्योंकि जानकारी है तो लोगों ने कैंसर भी ठीक कर लिया और अगर जानकारी नहीं तो लोगों की एसिडिटी भी 10-10 साल ठीक नहीं होती। सबसे ज्यादा जरूरी जानकारी हैं तो आओ हम आपको बता दें की एसिडिटी क्यों होती है।

जो व्यक्ति अपने शरीर का pH सही कर लेगा उसकी एसिडिटी की समस्या तो जिंदगी भर के लिए ठीक हो जाएगी। बल्कि उसके पड़ोसी को भी कभी तेजाब नही बनेगा।

क्या है PH और क्यों है इसका संतुलन अति आवश्यक?

मानव शरीर अरबों कोशिकाओं (सेल्स) से बनी एक जटिल संरचना है। इन कोशिकाओं को जीवित रहने के लिए एवं सुचारु रूप से कार्य करने के लिए अम्ल (एसिड) एवं क्षार (ऐल्कली) का एक उचित संतुलन बनाए रखना बहुतआवयशक है । यह संतुलन आम तौर पर PH संतुलन के नाम से जाना जाता है । एक उचित PH संतुलन सभी रोगों के खिलाफ मज़बूत रक्षा कवच के रूप में कार्य करता है ।

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की सबसे महवतपूर्ण खोजों में से एक यह है कि यदि शरीर एक उचित क्षारीय (एल्कलाइन) अवस्था बनाए रखता है तो कोई भी बिमारी कभी मानव शरीर को प्रभावित नहीं कर सकती । यही खोज संभावित इस संतुलन को सबसे महवतपूर्ण संतुलन के रूप में दर्शाती है तथा हमें इसकी विशेष रूप से देखभाल करनी चाहिए ।

जटिल से जटिल अथवा सबसे सरल बीमारियां जैसे कि फ्लू का कीटाणुओं से कोई सम्बन्ध नहीं है। इन सबका कारण है एसिड। शरीर स्वाभाविक रूप से ही बुखार उत्पन्न करने के लिए प्रोग्राम्ड है ताकि वह त्वचा के छिद्रों को खोलकर शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकाल सकें । यह माना जाता है कि यदि शरीर एल्कलाइन अवस्था में लगातार रहने में सक्षम होता है, तो मनुष्य को कभी सर्दी या फ्लू नहीं होता । सरल शब्दों में,यदि आप स्वस्थ रहना चाहते हैं तो अपने शरीर को शुद्ध एवं एल्कलाइन रखिये ।

यदपि शरीर अपने आप ही PH को समायोजित करने के लिए प्रोग्राम्ड हैं, वह अन्य महवतपूर्ण अंगों की कीमत पर ऐसा करता है जिससे की गंभीर स्वास्थ्य असंतुलन पैदा हो सकता है।

दुनिया भर के डॉक्टरों का यह मानना है कि बीमारियां केवल एक एसिडिक शरीर में ही विकसित होती हैं । एक एसिडिक शरीर बैक्टीरिया ,खमीर ( यीस्ट),फफूंद,वायरस तथा अन्य कई अवांछित जीवों के विकास के लिए एक आदर्श वातावरण तैयार करता है ।

कैंसर जैसी भयानक बीमारियां सदैव उन्ही शरीरों पर प्रहार करती है जो कि ज़्यादा एसिडिक होते हैं । जैसे -जैसे शरीर अधिक एसिडिक हो जाता है ,शरीर में कैल्शियम की मात्रा कम होने लगती है । इस कमी को पूरा करने के लिए शरीर हड्डियों, दांतों एवं टिश्यू से कैल्शियम को खींचने लगता है । इसका पहला प्रमाण होता है शरीर में कैल्शियम का जमना जो पोषक कैल्शियम तत्वों से नहीं बल्कि दांतों व हड्डियों के कैल्शियम से आता है ।

तो हम आपको बता रहे हैं इसका पक्का इलाज।

“पीच अर्क”

इसको अमेरिका में तैयार किया गया है जो कैलिफोर्निया आड़ू फल का अर्क है ये एक खास किस्म की प्रजाति होती है जिसमें विटामिन ए सबसे ज्यादा मिलता है और इसके साथ इसमें ग्वार पाठा जो कि जो दुनिया की400 प्रजातियों में से सबसे अच्छी किस्म A.Bar.Miller से तैयार किया गया है जिसको ख़ास तरीके से बनाया गया है जिस कारण इसमें कोई भी केमिकल नही डाला जाता और इसका ठण्डे तरीके से स्थिरीकरण किया जाता है इस प्रक्रिया से दुनिया में बनने वाला यह पहला अर्क है

ये एक खास तरह का अर्क है जो आपके शरीर में 4 काम करेगा।

डिटॉक्सीफिकेशन:- इसका मतलब है कि आजतक आपके शरीर में जितना भी टॉक्सिन्स / जहर गया है चाहे खाने से, पीने से या हवा से या दवाईयों से जो लगातार कई सालों से खा रहे हो। उस 3-4 किलो जहर को शरीर से बाहर निकालेगा जो आपकी छोटी आंत जिसकी लम्बाई 28 फुट होती है उसमें बहुत सालों से जमा हुआ है और 200 बीमारियों की जड़ है। जिस से आपका शरीर बिलकुल शुद्ध हो जायेगा औऱ गैस, कब्ज और सुस्ती रहना आदि हमेशा के लिए ठीक हो जायेगा।

-ये आपके शरीर का pH को बैलैंस कर देगा जिससे एसिडिटी अपने आप ही ठीक हो जाएगी क्योंकि pH का कम होना ही एसिडिटी होना होता है।

-उसके बाद आपके शरीर को बहुत से पोषक तत्वों की जरूरत होती है जो इस अर्क में मिलेंगे 12 जरूरी विटामिन्स, 20 मिनरल्स, 18 एमिनो, फायटोन्यूट्रिएंट्स और भी बहुत कुछ। इतना पोषण आपको 50 तरह की अलग अलग फल सब्जियों से भी नहीं मिलेगा। इतना पोषण आपको नई ऊर्जा और उत्साह देने के लिए बहुत है।

-जब शरीर में एसिडिटी लम्बे समय तक बनती रहती है तो पेट व खाने की नली में घाव हो जाते हैं जिससे बहुत जलन और असहनीय पीड़ा होती है। ये अर्क कुदरती एंटीबायोटिक, एंटीफंगल, एंटीइंफ्लेमेटरी, और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला होता है

अगर आप लगातार दो महीने इस अर्क को सुबह, दोपहर और शाम को पीओगे तो आप हमेशा के लिए इस बीमारी से छुटकारा पा सकते हैं। फिर कभी भी आप पार्टी में बे झिझक कुछ भी खा सकते है। एक आजाद जिंदगी फिर से जी सकते हैं। आपकी जिंदगी आपके हाथ।

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