जामुन केवल फल ही नहीं आयुर्वेदिक औषधि भी है,जानिए जामुन और इसकी गुठली के फायदे और उपयोग की विधि

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जामुन एक मौसमी फल है। खाने में स्वादिष्ट होने के साथ ही इसके कई औषधीय गुण भी हैं। जामुन अम्लीय प्रकृति का फल है पर यह स्वाद में मीठा होता है। जामुन में भरपूर मात्रा में ग्लूकोज और फ्रुक्टोज पाया जाता है। जामुन में लगभग वे सभी जरूरी लवण पाए जाते हैं जिनकी शरीर को आवश्यकता होती है।

जामुन को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है – राजमन, काला जामुन, जमाली, ब्लैकबेरी आदि। इसकी प्रकृति अम्लीय और कसैली होती है, लेकिन इसका स्वाद खाने में मीठा होता है। अम्लीय होने के कारण जामुन को नमक के साथ खाया जाता है। जामुन में ग्लूकोज और फ्रक्टोज पाया जाता है।

जामुन केवल फल ही नहीं औषधि भी है। तो आइये जानते है इसके आयुर्वेदिक गुण।

मधुमेह के रोगियों को हर रोज 200 ग्राम जामुन खाना चाहिए। जामुन के नियमित सेवन से रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित किया जा सकता है।

स्मरण-शक्तिवर्धक – मस्तिष्क की कोशिकाओं की क्षमता घटने से स्मरणशक्ति कमजोर हो जाती है। जामुन में एंटी ऑक्सीडेन्ट्स विशेष रूप से फ्लेबोनायड्स मिलते हैं जो स्मरण-शक्ति ठीक रखने में सहायक है।

आग से जले के सफेद दागों पर जामुन के पत्तों का प्रतिदिन लेप करने से दाग ठीक हो जाते हैं।

जामुन खाने से चेहरे के मुँहासे मिट जाते हैं। इसकी गुठलियों को पानी डालकर, पीसकर चेहरे पर लेप करके आधे घंटे बाद धोने से मुँहासों से छुटकारा मिलेगा।

जामुन का चूर्ण और मिश्री (पिसी) करीब 15 ग्राम की मात्रा में प्रात: सायं दूध के साथ लेने से हर प्रकार की कमजोरी दूर होती है।

होम्योपैथी में मधुमेह के लिए जामुन का रस सीजीजीयम जेम्बोलिनम मदर टिंचर के नाम से काम में लिया जाता है। तीन बार जामुन की गुठली का चूर्ण एक-एक चम्मच सुबह-दोपहर-शाम पानी के साथ लेने से शर्करा आना ठीक हो जाता है। इसके साथ ही आम की गुठली का चूर्ण तीन-तीन ग्राम की मात्रा में पानी से लें।

जामुन (ब्लैकबेरी) की गुठली मधुमेह के लिए रामबाण है। गुठली का पाउडर निर्धारित मात्रा में ही लें, अधिक मात्रा में लेना हानिप्रद है।

जामुन खाना खाने के बाद खायें। तथा इसके सेवन से दो घंटे पूर्व व पश्चात् तक दूध नहीं पियें। दो घंटे के बाद ही दूध पियें।

ब्लैकबेरी में आयरन होता है जो रक्त के लिए काफी जरुरी तत्व होता है ।

हृदय रोगों में भी इसका सेवन लाभदायक है।

अगर शरीर पर कोई फफोला, जलन, घाव हो जाते हैं तो इसकी गुठली पानी में पीसकर रोजाना दो बार लगाने से ये घाव ठीक हो जाते हैं

200 ग्राम ब्लैकबेरी एक गिलास उबलते हुए पानी में डालकर कुछ देर उबालें। फिर उतार कर ठंडा होने दें। इसी पानी में उन्हें मथकर, छानकर एक चम्मच शहद मिलाकर हर रोज तीन बार पियें। इससे शरीर का दुबलापन और मधुमेह रोग में लाभ होता है।

जामुनों को धूप में सुखाकर पीस लें। इस पाउडर की तीन चम्मच हर रोज तीन बार पानी के साथ लेने से भी मधुमेह में लाभ होता है।

पेट की बीमारियों में ब्लैकबेरी लाभदायक है। पेट दर्द, दस्त होने पर इसके रस में सेंधा नमक मिलाकर पीना चाहिए।

अपच होने पर (1) 100 ग्राम ब्लैकबेरी पर नमक डालकर हर रोज खायें। एक कप पानी में एक चम्मच ब्लैकबेरी का सिरका डालकर हर रोज तीन बार पियें। इससे पेट के प्रायः सभी सामान्य रोग ठीक हो जाते हैं। भूख अच्छी लगती है।

पेट दर्द होने पर एक कप पानी में एक चम्मच जामुन का सिरका, जरा-सा काला नमक मिलाकर पियें।

बार-बार होने वाले दस्तों में जामुन के कोमल पत्तों का दस ग्राम रस लेकर थोड़े से शहद में मिलाकर दिन में तीन बार लेने से काफी लाभ होता है। केवल इसका रस पीने से भी दस्त बन्द हो जाते हैं।

मुंह के छाले – जामुन के 40 नरम पत्तों को पीसकर एक गिलास पानी में घोल लें, छानकर कुल्ले व गरारे करें, मुँह के छाले बहुत जल्दी ठीक हो जायेंगे। इसको खाने से भी छाले ठीक हो जाते हैं। पानी में सिरका डालकर भी कुल्ले कर सकते हैं।

जामुन का शर्बत पीने से थकान दूर होकर ताजगी अनुभव होती है

जामुन का सिरका सौंदयवर्धक होता है। इसको नियमित पीने से स्री, पुरुष, बच्चों का सौन्दर्य बढ़ता है। एक कप पानी में एक चम्मच सिरका मिलाकर पियें।

सिरका स्वाद में खट्टा होता है। अतः सिरके को पीने योग्य बनाने के लिए आवश्यकतानुसार पानी मिलायें। इससे भूख बढ़ती है और पुराने पेट के रोग भी ठीक हो जाते हैं। कमजोरी दूर होती है। इसका सिरका बाजार में भी मिलता है।

आम के आम गुठलियों के दाम। यह कहावत तो आपने सुनी ही होगी। आज हम आपको गुठली के अनमोल गुण बताएंगे। लेकिन आम की गुठली के नहीं, जामुन की गुठली के। हम अक्सर जामुन खाकर इसकी गुठली फेंक देते हैं। आज हम आपको इस गुठली की जिस खूबी के बारे में बता रहे हैं, उसे जानकर आप इसकी गुठलियों की कीमत जान जाएंगे।

आयुर्वेद के हिसाब से डायबीटीज के मरीजों के लिए बेहतरीन औषधि है। जामुन की गुठली को सुखाकर उनका पाउडर बनाया जाता है। इस पाउडर को खाली पेट लेने डायबीटीज या मधुमेह जैसी बीमारी में अत्यधिक लाभ मिलता है। शुगर कंट्रोल में रहती है और अपनी लाइफ को पूरी तरह इंजॉय कर पाते हैं।

जामुन की गुठलियों से पाउडर बनाना बेहद आसान है। जामुन खाने के बाद इसकी गुठलियों को धो लें। इन्हें हल्के कपड़े से ढककर धूप में सुखा लें। हल्के कपड़े से हमारा मतलब जॉर्जट या शिफॉन से है। लाइट कॉटन का फैब्रिक सबसे सही रहेगा। जब गुठलियां सूख जाएं तो इनको टुकड़ों में तोड़ लें। इसके लिए अदरक कूटने के मूसल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। जब ये गुठलियां छोटे टुकड़ों में टूट जाएं तो इन्हें मिक्सी में पीसकर पाउडर बना लें। इस पाउडर को सुबह खाली पेट पानी के साथ लें।

हालांकि आयुर्वेदिक औषधियां सेहत पर किसी तरह का साइडइफेक्ट नहीं करती हैं, लेकिन फिर भी औषधि को हमेशा किसी योग्य चिकित्सक की सलाह के बाद ही लेना चाहिए। हमने आपको यहां जामुन की गुठली के लाभ के बारे में बताया है। ताकि आप अन्य दवाओं के साइडइफेक्टस से बच सकें। लेकिन इस पाउडर को आपको कितनी मात्रा में लेना चाहिए, इसके लिए आयुर्वेदिक चिकित्सक से अवश्य परामर्श करें।

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